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कोर्ट ने किया दौराला थानाध्यक्ष को तलब
Updated Mon, 27 Nov 2017 07:10 PM IST
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मेरठ। न्यायालय सीजेएम तबरेज अहमद ने थानाध्यक्ष दौराला को 28 नवंबर (आज) की सुबह 11 बजे व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। कोर्ट ने एसएसपी को अनुपालन कराने के लिए भेजे आदेश में कहा है कि क्यों न थानाध्यक्ष को न्यायिक हिरासत में ले लिया जाए।
रुड़की-दिल्ली बाईपास पर सिवाया स्थित जैन शिकंजी रेस्टोरेंट के पार्टनर अंकुर कुमार ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर थानाध्यक्ष दौराला धर्मेंद्र कुमार और दरोगा आशीष रस्तोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। प्रार्थना पत्र में आरोप था कि विगत 22 जून को रेस्टोरेंट के बाहर कुछ लोगों ने फ्लैक्स फाड़ दिए थे। वह इसकी शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो वहां आरोपी पहले से मौजूद थे। अंकुर का आरोप है कि थानाध्यक्ष और दरोगा ने समझौता करने का दबाव डाला और न मानने पर पिटाई करते हुए उसका सामान छीन लिया।
न्यायालय ने प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए 14 नवंबर को थाना दौराला से इस बाबत रिपोर्ट मांगी कि उक्त प्रकरण में कोई मुकदमा थाने पर दर्ज है या नही। इसके बाद 15,18, 20, 25 और 27 नवंबर की तिथियां नियत की गईं। लेकिन थाने से रिपोर्ट नहीं आई। यहां तक कि थाने के पैरोकार को दो बार फोन किया गया। लेकिन वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। इस प्रकरण को न्यायालय ने बेहद गंभीर मानते हुए थानाध्यक्ष दौराला को 28 नवंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब कर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
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- एसओ और दरोगा पर व्यापारी को थाने में पीटने का आरोप
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रुड़की-दिल्ली बाईपास पर सिवाया स्थित जैन शिकंजी रेस्टोरेंट के पार्टनर अंकुर कुमार ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर थानाध्यक्ष दौराला धर्मेंद्र कुमार और दरोगा आशीष रस्तोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। प्रार्थना पत्र में आरोप था कि विगत 22 जून को रेस्टोरेंट के बाहर कुछ लोगों ने फ्लैक्स फाड़ दिए थे। वह इसकी शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो वहां आरोपी पहले से मौजूद थे। अंकुर का आरोप है कि थानाध्यक्ष और दरोगा ने समझौता करने का दबाव डाला और न मानने पर पिटाई करते हुए उसका सामान छीन लिया।
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न्यायालय ने प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए 14 नवंबर को थाना दौराला से इस बाबत रिपोर्ट मांगी कि उक्त प्रकरण में कोई मुकदमा थाने पर दर्ज है या नही। इसके बाद 15,18, 20, 25 और 27 नवंबर की तिथियां नियत की गईं। लेकिन थाने से रिपोर्ट नहीं आई। यहां तक कि थाने के पैरोकार को दो बार फोन किया गया। लेकिन वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। इस प्रकरण को न्यायालय ने बेहद गंभीर मानते हुए थानाध्यक्ष दौराला को 28 नवंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब कर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
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