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भागवत ज्ञान वैराग्य को जागृत करने की कथा है।------पंडित घनश्याम शास्त्री
Updated Wed, 13 Sep 2017 03:15 AM IST
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दुर्गा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन
अमर उजाला ब्यूरो
किठौर।
कस्बा स्थित दुर्गा मंदिर मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान सप्ताह के अंतिम दिन मंगलवार को परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ भागवत कथा के 18 हजार श्लोकों का सार बताया। वहीं भगवान कृष्ण ने सुदामा से अपनी दोस्ती आदि लीलाओं का मंचन किया गया।
कथावाचक पंडित घनश्याम शास्त्री ने कहा कि जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी ईश्वर को पहचाने का प्रयत्न नही करता है। इसी कारण उसे आनंद की प्राप्ति नही होती है। भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला सिखाती है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नही छोड़ा। उन्होेने स्वधर्म त्याग नही किया। फिर भी वह भगवान कृष्ण को प्राप्त कर सकीं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा ज्ञान वैराग्य को जागृत करने की कथा है।
परीक्षित मोक्ष की कथा में उन्होंने बताया कि परीक्षित ने मृत्यु के भय को भुलाते हुए मानसिक रूप से निर्वाण की तैयारी कर ली। इस कारण उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि मित्रता मे जाति, धर्म, गरीबी-अमीरी नही होती। मित्रता हर रिश्ते से ऊपर होती है। इस बात को खुद भगवान कृष्ण ने अपनी दोस्ती सुदामा से करके उदाहरण प्रस्तुत किया। समापन पर पंडित महेश अग्निहोत्री ने बताया कि बुधवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर राजेश सिंघल, इंदु सिंघल, अमन बंसल, यश गोयल, रजनी, अनुराधा, अलका, अर्चना, तनु आदि मौजूद रहीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
किठौर।
कस्बा स्थित दुर्गा मंदिर मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान सप्ताह के अंतिम दिन मंगलवार को परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ भागवत कथा के 18 हजार श्लोकों का सार बताया। वहीं भगवान कृष्ण ने सुदामा से अपनी दोस्ती आदि लीलाओं का मंचन किया गया।
कथावाचक पंडित घनश्याम शास्त्री ने कहा कि जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी ईश्वर को पहचाने का प्रयत्न नही करता है। इसी कारण उसे आनंद की प्राप्ति नही होती है। भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला सिखाती है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नही छोड़ा। उन्होेने स्वधर्म त्याग नही किया। फिर भी वह भगवान कृष्ण को प्राप्त कर सकीं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा ज्ञान वैराग्य को जागृत करने की कथा है।
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परीक्षित मोक्ष की कथा में उन्होंने बताया कि परीक्षित ने मृत्यु के भय को भुलाते हुए मानसिक रूप से निर्वाण की तैयारी कर ली। इस कारण उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि मित्रता मे जाति, धर्म, गरीबी-अमीरी नही होती। मित्रता हर रिश्ते से ऊपर होती है। इस बात को खुद भगवान कृष्ण ने अपनी दोस्ती सुदामा से करके उदाहरण प्रस्तुत किया। समापन पर पंडित महेश अग्निहोत्री ने बताया कि बुधवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर राजेश सिंघल, इंदु सिंघल, अमन बंसल, यश गोयल, रजनी, अनुराधा, अलका, अर्चना, तनु आदि मौजूद रहीं।
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