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मेरे मुल्क का वो नागरिक गददार नही है।
Updated Sun, 27 Aug 2017 07:27 PM IST
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फलावदा।
कस्बा स्थित जमालुल उलूम दरबार में सामाजिक तंजीम अंजुमन इर्तिका-ए-अदब उर्दू की ओर से सम्मान समारोह एवं एजाजी मुशायरे का आयोजन किया गया।
मुशायरे की शमा रोशन मुख्य अतिथि डा. मोहम्मद असलम जमशेदपुरी अध्यक्ष उर्दू विभाग चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय मेरठ, सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष सैयद रिहानुद्दीन ने की। मुशायरे में उस्ताद शायर अनवारूहक़ शादां एवं जमील मजहर सियानवी का सम्मान स्मृति चिह्न एवं शाल प्रदान कर डा. असलम जमशेदपुरी ने अंजुमन इर्तिका-ए-अदब उर्दू की ओर से किया। मुशायरे में बतौर अतिथि शामिल हुए। डा. असलम जमशेदपुरी, सैयद मैराजुद्दीन एवं डा. फुरकान सरधनवी का भी सम्मान किया गया। इसके बाद मुशायरे का आयोजन नाते पाक से किया गया। शायर अनवारूल हक शादा ने पढ़ा कि कौन डरता है जमाने में सितम साजों से। जिंदगी नाम है हक़ बात पे मर जाने का। जमील मजहर सियानवी ने पढ़ा कि वो अगर मेरी जुबान काटे तो आकर काट ले। इक सितमगर को सितमगर कह दिया तो कह दिया। शम्स देवबंदी ने पढ़ा कि वहीं-वहीं पे हवाओं ने पैर फैलाये। जहां-जहां भी चरागों का एहतमाम हुआ। अहमद मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा कि ऐ चांद तू जो रहता है गर्दिश में रात-दिन। तू भी किसी के प्यार में पागल हुआ है क्या। डा. सदाकत देवबंदी ने पढ़ा कि मेरी पसंद में तुम, इंतखाब में तुम हो। कोई सवाल हो, लेकिन जवाब में तुम हो। मा. फैयाज नादिर फलावदा ने पढ़ा कि- क्या बात है खाइफ है जहां किसलिए हमसे। बरछी नहीं, भाला नहीं, तलवार नहीं हम। याकूब मोहसिन सरधना ने पढ़ा कि आने न देंगे आंच कभी आन बान पर। अपने वतन के वास्ते खेलेंगे जान पर। मौ. आशिक महलकवी ने पढ़ा कि तुमको जुबां ही नहीं अपनी बलुंदी पे गुरूर। तुम तो फरियाद थे ललकार बनाया हम ने। निसार अहमद अहकर ने पढ़ा कि दोजख में तेरी देख मैं हरगिज न जाऊंगा। दुनिया में उम्र काटी मैंने अजाब की। मौ. अली रहबर ने पढा़ कि इश्क में कैसे पिघलता है जिगर। देख लीजिये मोम रखकर धूप में। कुमार मुनीश अक्स ने पढ़ा कि करता जो भारत मां की जय जयकार नहीं है। मेरे मुल्क का वो नागरिक गद्दार नहीं है। यहां पर कई अन्य शायरों ने भी कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता पूर्व चेयरमैन सैयद मैराजुद्दीन ने की एवं संचालन डा. मौ. फुरकान सरधनवी, मोहम्मद आशिक महलकवी ने संयुक्त रूप से किया। यहां गुल मलिक, शहजाद नानपुरी, अमजद आतिश, मौलाना नबील, महमूद अजनबी, जियाउद्दीन तालिब, अब्दुस्सलाम फरीदी, रोशन जिया आदि ने भी कलाम पेश किए। मुशायरे में सैयद रिहानुद्दीन, मिर्जा शफीकुद्दीन, अतीकुर्रहमान, हाफिज अहसान,क़ारी आरिफ, मा. नवाबुद्दीन, सत्यवीर सिंह, शाहिद लुहार, नीरज राना, मोहम्मद सुहैल, शराफत अली, शाहिद उस्मानी, सलमान हकीम, करीमुद्दीन सैफ़ी आदि लोगों ने देर रात तक मुशायरे का आनंद लिया।
बकाएदारों के कनेक्शन काटे
फलावदा। कस्बा स्थित बिजलीघर पर विद्युत निगम के अधिकारियों द्वारा कैंप लगाकर उपभोक्ताओं की समस्या का समाधान किया गया। जेई विनोद कुमार ने बताया कि रविवार को 25 उपभोक्ताओं के बिल दुरुस्त किए गए। उपभोक्ताओं से करीब दो लाख रुपये बकाया जमा कराया गया। बिजली बिल समय से जमा नहीं करने पर 30 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए। यहां एक्सईएन महेश चंद, जेई विनोद कुमार,बाबू ललित कुमार, कमल सिंह, इकराम, सतवीर, मुकेश आदि मौजूद थे।
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कस्बा स्थित जमालुल उलूम दरबार में सामाजिक तंजीम अंजुमन इर्तिका-ए-अदब उर्दू की ओर से सम्मान समारोह एवं एजाजी मुशायरे का आयोजन किया गया।
मुशायरे की शमा रोशन मुख्य अतिथि डा. मोहम्मद असलम जमशेदपुरी अध्यक्ष उर्दू विभाग चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय मेरठ, सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष सैयद रिहानुद्दीन ने की। मुशायरे में उस्ताद शायर अनवारूहक़ शादां एवं जमील मजहर सियानवी का सम्मान स्मृति चिह्न एवं शाल प्रदान कर डा. असलम जमशेदपुरी ने अंजुमन इर्तिका-ए-अदब उर्दू की ओर से किया। मुशायरे में बतौर अतिथि शामिल हुए। डा. असलम जमशेदपुरी, सैयद मैराजुद्दीन एवं डा. फुरकान सरधनवी का भी सम्मान किया गया। इसके बाद मुशायरे का आयोजन नाते पाक से किया गया। शायर अनवारूल हक शादा ने पढ़ा कि कौन डरता है जमाने में सितम साजों से। जिंदगी नाम है हक़ बात पे मर जाने का। जमील मजहर सियानवी ने पढ़ा कि वो अगर मेरी जुबान काटे तो आकर काट ले। इक सितमगर को सितमगर कह दिया तो कह दिया। शम्स देवबंदी ने पढ़ा कि वहीं-वहीं पे हवाओं ने पैर फैलाये। जहां-जहां भी चरागों का एहतमाम हुआ। अहमद मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा कि ऐ चांद तू जो रहता है गर्दिश में रात-दिन। तू भी किसी के प्यार में पागल हुआ है क्या। डा. सदाकत देवबंदी ने पढ़ा कि मेरी पसंद में तुम, इंतखाब में तुम हो। कोई सवाल हो, लेकिन जवाब में तुम हो। मा. फैयाज नादिर फलावदा ने पढ़ा कि- क्या बात है खाइफ है जहां किसलिए हमसे। बरछी नहीं, भाला नहीं, तलवार नहीं हम। याकूब मोहसिन सरधना ने पढ़ा कि आने न देंगे आंच कभी आन बान पर। अपने वतन के वास्ते खेलेंगे जान पर। मौ. आशिक महलकवी ने पढ़ा कि तुमको जुबां ही नहीं अपनी बलुंदी पे गुरूर। तुम तो फरियाद थे ललकार बनाया हम ने। निसार अहमद अहकर ने पढ़ा कि दोजख में तेरी देख मैं हरगिज न जाऊंगा। दुनिया में उम्र काटी मैंने अजाब की। मौ. अली रहबर ने पढा़ कि इश्क में कैसे पिघलता है जिगर। देख लीजिये मोम रखकर धूप में। कुमार मुनीश अक्स ने पढ़ा कि करता जो भारत मां की जय जयकार नहीं है। मेरे मुल्क का वो नागरिक गद्दार नहीं है। यहां पर कई अन्य शायरों ने भी कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता पूर्व चेयरमैन सैयद मैराजुद्दीन ने की एवं संचालन डा. मौ. फुरकान सरधनवी, मोहम्मद आशिक महलकवी ने संयुक्त रूप से किया। यहां गुल मलिक, शहजाद नानपुरी, अमजद आतिश, मौलाना नबील, महमूद अजनबी, जियाउद्दीन तालिब, अब्दुस्सलाम फरीदी, रोशन जिया आदि ने भी कलाम पेश किए। मुशायरे में सैयद रिहानुद्दीन, मिर्जा शफीकुद्दीन, अतीकुर्रहमान, हाफिज अहसान,क़ारी आरिफ, मा. नवाबुद्दीन, सत्यवीर सिंह, शाहिद लुहार, नीरज राना, मोहम्मद सुहैल, शराफत अली, शाहिद उस्मानी, सलमान हकीम, करीमुद्दीन सैफ़ी आदि लोगों ने देर रात तक मुशायरे का आनंद लिया।
बकाएदारों के कनेक्शन काटे
फलावदा। कस्बा स्थित बिजलीघर पर विद्युत निगम के अधिकारियों द्वारा कैंप लगाकर उपभोक्ताओं की समस्या का समाधान किया गया। जेई विनोद कुमार ने बताया कि रविवार को 25 उपभोक्ताओं के बिल दुरुस्त किए गए। उपभोक्ताओं से करीब दो लाख रुपये बकाया जमा कराया गया। बिजली बिल समय से जमा नहीं करने पर 30 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए। यहां एक्सईएन महेश चंद, जेई विनोद कुमार,बाबू ललित कुमार, कमल सिंह, इकराम, सतवीर, मुकेश आदि मौजूद थे।
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