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टोर्च की रोशनी में जिदंगी को तलाशते रहे लोग
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:47 AM IST
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- कहीं अंधेरा तो कहीं जनरेटर और टोर्च की रोशनी का लिया गया सहारा
- अंधेरे के चलते बचाव कार्य में भी हुई परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
मोदीपुरम।
खतौली में हुए रेल हादसे के बाद लोग अंधेरा होने पर टार्च की रोशनी में जिदंगी तलाशते रहे। रातभर बचाव कार्य चला, कहीं अंधेरा तो कहीं जनरेटर की रोशनी से काम चलाया गया। किसी का पैर कटा था तो किसी का हाथ।
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसा शनिवार शाम करीब पौने छह बजे हुआ था। उस समय काफी दिन था। इसके चलते हादसे का मंजर दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। चारों और लाश दिख रही थी और घायलों की चीख दूर दूर तक सुनाई दे रही थी। जैसे जैसे अंधेरा छाया बचाव कार्य में परेशानी आने लगी। अंधेरे के बीच लोग टार्च की रोशनी में जिंदगी तलाशते नजर आए। कोई ट्रेन के नीचे था तो कोई ट्रेन के अंदर था। किसी का हाथ कटा तो किसी का पैर कटा हुआ था। टोल रूट ऑपरेशन के डायरेक्टर पंकज सिंह और टोल के सुरक्षाधिकारी मनिंदर विहान ने बताया कि रातभर उनकी टीम बचाव कार्य में जुटी रही। अंधेरे में काफी परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि जनरेटर की व्यवस्था की गई, लेकिन ट्रेन का क्षतिग्रस्त हिस्सा काफी लंबा था। जिसके बीच टार्च की रोशनी का ही सहारा लेना पड़ा। यदि वहां विद्युत की उचित व्यवस्था होती तो बचाव कार्य में ज्यादा परेशानी नहीं आती। वहीं हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और स्वतंत्र प्रभार मंत्री सुरेश राणा को मौके पर भेजा। उन्होंने घटनास्थल पर जाकर निरीक्षण किया अस्पताल में घायलों का हाल जाना।
एक बोगी में चार लाशें बुरी तरह फंसी थी
टोल के पंकज सिंह और मनिंदर विहान ने बताया कि एक बोगी में चार लाशें बुरी तरह फंसी हुई थी। उन्हें निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। एक-एक कर उन्हें निकाला गया। हादसे के दौरान जो भीड़ में नीचे दब गया, वह बाहर नहीं निकल सका और उसकी मौत हो गई। बोगी को कटर चलाकर भी लाशों को निकाला गया।
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- अंधेरे के चलते बचाव कार्य में भी हुई परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
मोदीपुरम।
खतौली में हुए रेल हादसे के बाद लोग अंधेरा होने पर टार्च की रोशनी में जिदंगी तलाशते रहे। रातभर बचाव कार्य चला, कहीं अंधेरा तो कहीं जनरेटर की रोशनी से काम चलाया गया। किसी का पैर कटा था तो किसी का हाथ।
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसा शनिवार शाम करीब पौने छह बजे हुआ था। उस समय काफी दिन था। इसके चलते हादसे का मंजर दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। चारों और लाश दिख रही थी और घायलों की चीख दूर दूर तक सुनाई दे रही थी। जैसे जैसे अंधेरा छाया बचाव कार्य में परेशानी आने लगी। अंधेरे के बीच लोग टार्च की रोशनी में जिंदगी तलाशते नजर आए। कोई ट्रेन के नीचे था तो कोई ट्रेन के अंदर था। किसी का हाथ कटा तो किसी का पैर कटा हुआ था। टोल रूट ऑपरेशन के डायरेक्टर पंकज सिंह और टोल के सुरक्षाधिकारी मनिंदर विहान ने बताया कि रातभर उनकी टीम बचाव कार्य में जुटी रही। अंधेरे में काफी परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि जनरेटर की व्यवस्था की गई, लेकिन ट्रेन का क्षतिग्रस्त हिस्सा काफी लंबा था। जिसके बीच टार्च की रोशनी का ही सहारा लेना पड़ा। यदि वहां विद्युत की उचित व्यवस्था होती तो बचाव कार्य में ज्यादा परेशानी नहीं आती। वहीं हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और स्वतंत्र प्रभार मंत्री सुरेश राणा को मौके पर भेजा। उन्होंने घटनास्थल पर जाकर निरीक्षण किया अस्पताल में घायलों का हाल जाना।
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एक बोगी में चार लाशें बुरी तरह फंसी थी
टोल के पंकज सिंह और मनिंदर विहान ने बताया कि एक बोगी में चार लाशें बुरी तरह फंसी हुई थी। उन्हें निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। एक-एक कर उन्हें निकाला गया। हादसे के दौरान जो भीड़ में नीचे दब गया, वह बाहर नहीं निकल सका और उसकी मौत हो गई। बोगी को कटर चलाकर भी लाशों को निकाला गया।
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