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फर्जी गन्ना सर्वेक्षण रोकने को लखनऊ से हो रही निगरानी
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फर्जी गन्ना सर्वेक्षण रोकने को लखनऊ से हो रही निगरानी
- मेरठ मंडल के नोडल एवं संयुक्त गन्ना आयुक्त ने तीन दिन से डाल रखा है डेरा
- फर्जी गन्ना सर्वेक्षण रोकने के लिए खतौनी का राजस्व विभाग से होगा सत्यापन
मेरठ।
फर्जी गन्ना सर्वेक्षण रोकने के लिए गन्ना आयुक्त कार्यालय से नोडल अधिकारी बना दिए हैं, जो क्षेत्र में दौरा कर सर्वे पर नजर रखेंगे। मेरठ मंडल के नोडल अधिकारी एवं संयुक्त गन्ना आयुक्त डॉ. वीबी सिंह पिछले तीन दिन से क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। फर्जी गन्ना सर्वेक्षण मिलने पर दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
कुछ किसान सर्वे टीम, मिल व गन्ना विभाग कर्मियों से सेटिंग कर फर्जी गन्ना सर्वे कराकर पर्ची बढ़वाने में कामयाब हो जाते हैं। इसके लिए किसान जमीन की फर्जी खसरा खतौनी लगाकर जमीन को बढ़ा हुआ दिखा देते हैं। अधिक पर्ची होने पर वे समय से पहले गन्ना आपूर्ति करने के बाद छोटे किसानों का गन्ना सस्ती दरों पर खरीदकर गन्ने की तस्करी करने लगते हैं। इन सभी शिकायतों को देखते हुए गन्ना विभाग पिछले चार साल से न केवल जीपीएस के माध्यम से सर्वे करा रहा है, बल्कि फर्जी बांड और रकबे को भी पकड़कर गन्ना माफियाओं की कमर तोड़ रहा है।
इस बार शासन ने शत प्रतिशत गन्ना सर्वे जीपीएस से कराने के अलावा फर्जी गन्ना सर्वे को पकड़ने और इसे तय समय के अंदर कराने के लिए लखनऊ स्तर से नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। मेरठ मंडल का नोडल अधिकारी संयुक्त गन्ना आयुक्त (समिति) को बनाया गया है। मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि फर्जी सर्वे पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है। किसानों से जमीन और उस पर खडे़ गन्ने का घोषणापत्र लेने के अलावा जमीन की खसरा खतौनी ली जा रही है। इसका सत्यापन राजस्व विभाग से कराया जाना है। पिछले साल भी 700 से ज्यादा मृतक किसानों के बांड और तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा फर्जी गन्ना रकबा पकड़ा था।
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- मेरठ मंडल के नोडल एवं संयुक्त गन्ना आयुक्त ने तीन दिन से डाल रखा है डेरा
- फर्जी गन्ना सर्वेक्षण रोकने के लिए खतौनी का राजस्व विभाग से होगा सत्यापन
मेरठ।
फर्जी गन्ना सर्वेक्षण रोकने के लिए गन्ना आयुक्त कार्यालय से नोडल अधिकारी बना दिए हैं, जो क्षेत्र में दौरा कर सर्वे पर नजर रखेंगे। मेरठ मंडल के नोडल अधिकारी एवं संयुक्त गन्ना आयुक्त डॉ. वीबी सिंह पिछले तीन दिन से क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। फर्जी गन्ना सर्वेक्षण मिलने पर दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
कुछ किसान सर्वे टीम, मिल व गन्ना विभाग कर्मियों से सेटिंग कर फर्जी गन्ना सर्वे कराकर पर्ची बढ़वाने में कामयाब हो जाते हैं। इसके लिए किसान जमीन की फर्जी खसरा खतौनी लगाकर जमीन को बढ़ा हुआ दिखा देते हैं। अधिक पर्ची होने पर वे समय से पहले गन्ना आपूर्ति करने के बाद छोटे किसानों का गन्ना सस्ती दरों पर खरीदकर गन्ने की तस्करी करने लगते हैं। इन सभी शिकायतों को देखते हुए गन्ना विभाग पिछले चार साल से न केवल जीपीएस के माध्यम से सर्वे करा रहा है, बल्कि फर्जी बांड और रकबे को भी पकड़कर गन्ना माफियाओं की कमर तोड़ रहा है।
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इस बार शासन ने शत प्रतिशत गन्ना सर्वे जीपीएस से कराने के अलावा फर्जी गन्ना सर्वे को पकड़ने और इसे तय समय के अंदर कराने के लिए लखनऊ स्तर से नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। मेरठ मंडल का नोडल अधिकारी संयुक्त गन्ना आयुक्त (समिति) को बनाया गया है। मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि फर्जी सर्वे पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है। किसानों से जमीन और उस पर खडे़ गन्ने का घोषणापत्र लेने के अलावा जमीन की खसरा खतौनी ली जा रही है। इसका सत्यापन राजस्व विभाग से कराया जाना है। पिछले साल भी 700 से ज्यादा मृतक किसानों के बांड और तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा फर्जी गन्ना रकबा पकड़ा था।
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