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सैटेलाइट के जरिए खंगाली जा रही कैंट बोर्ड की सीमा
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- सिटी और केंट बोर्ड की सीमा को अलग करने के लिए सर्वे
- कैंट बोर्ड के कर्मचारी कर रहे कार्य
मेरठ। कैंट और सिटी क्षेत्र की सीमाओं को अलग करने के लिए कैंट बोर्ड द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से सीमा खंगाली जा रही है। इससे पहले भी साल 2011-14 तक आईआईटी रुड़की को सर्वे का जिम्मा सौंपा गया था। उस समय भी सीमा पर पिलर खंगाले गए थे।
बता दें कि आजादी के पहले कैंट क्षेत्र की सीमा को चिह्नित करने के लिए पिलर लगाए गए थे। यह पिलर रुड़की रोड, माल रोड, सिटी स्टेशन, भैसाली बस अड्डे के आसपास लगाए गए थे। लेकिन बढ़ती आबादी के बाद पिलर गायब हो गए। इन पर अतिक्रमण कर मकान खड़े कर लिए गए। एक बार फिर कैंट क्षेत्र में कर्मचारियों ने पिलर ढूंढने का कार्य शुरू कर दिया है। सैटेलाइट के माध्यम से पिलर को ढूंढा जा रहा है। इस कार्य में आईआईटी रुड़की की टीम के साथ-साथ कैंट बोर्ड कर्मचारियों की टीम भी लगी है। कैंट बोर्ड के अनुसार कुल 111 पिलर मौजूद हैं। इन्हीं पिलर को दोबारा से ढूंढा जा रहा है। कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष बीना वाधवा का कहना है कि यह कार्य लगातार होना चाहिए। यह जांच का विषय है कि कहां-कहां पिलर गायब हो गए हैं। वहीं, इस सर्वे को सैटेलाइट के माध्यम से चार साल में किया जाता है।
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- कैंट बोर्ड के कर्मचारी कर रहे कार्य
मेरठ। कैंट और सिटी क्षेत्र की सीमाओं को अलग करने के लिए कैंट बोर्ड द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से सीमा खंगाली जा रही है। इससे पहले भी साल 2011-14 तक आईआईटी रुड़की को सर्वे का जिम्मा सौंपा गया था। उस समय भी सीमा पर पिलर खंगाले गए थे।
बता दें कि आजादी के पहले कैंट क्षेत्र की सीमा को चिह्नित करने के लिए पिलर लगाए गए थे। यह पिलर रुड़की रोड, माल रोड, सिटी स्टेशन, भैसाली बस अड्डे के आसपास लगाए गए थे। लेकिन बढ़ती आबादी के बाद पिलर गायब हो गए। इन पर अतिक्रमण कर मकान खड़े कर लिए गए। एक बार फिर कैंट क्षेत्र में कर्मचारियों ने पिलर ढूंढने का कार्य शुरू कर दिया है। सैटेलाइट के माध्यम से पिलर को ढूंढा जा रहा है। इस कार्य में आईआईटी रुड़की की टीम के साथ-साथ कैंट बोर्ड कर्मचारियों की टीम भी लगी है। कैंट बोर्ड के अनुसार कुल 111 पिलर मौजूद हैं। इन्हीं पिलर को दोबारा से ढूंढा जा रहा है। कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष बीना वाधवा का कहना है कि यह कार्य लगातार होना चाहिए। यह जांच का विषय है कि कहां-कहां पिलर गायब हो गए हैं। वहीं, इस सर्वे को सैटेलाइट के माध्यम से चार साल में किया जाता है।
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