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खिलाड़ियों ने कहा सुविधाएं मिले तो हम भी गाड़ेंगे सफलता के झंडे
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12 ब्लॉक हैं जिले में, 550 खिलाड़ियों ने लिया विभिन्न स्पर्धाओं में हिस्सा
- ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने कहा सुविधाओं के अभाव में पिछड़ रहीं प्रतिभाएं
- युवा कल्याण विभाग द्वारा स्टेडियम में प्रतिभाग करने पहुंचे खिलाड़ियों ने की मन की बात
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाएं ब्लॉक स्तर पर ही दम तोड़ रही हैं। युवा कल्याण विभाग द्वारा कैलाश प्रकाश स्टेडियम में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पहुंचे खिलाड़ियों ने मन की बात की। प्रतियोगिता में जिले के 12 ब्लॉक से साढ़े पांच सौ खिलाड़ियाें ने प्रतिभाग किया। कहा कि गांवों में सुविधा मिले तो हम भी सफलता के झंडे गाडे़ेंगे। लेकिन गांवों में संसाधनों की कमी के कारण खेलों पर प्रभाव पड़ रहा है। इसके जिम्मेदार युवा कल्याण विभाग पर सवाल उठने लगे हैं।
शूटिंग, कुश्ती, कबड्डी, वॉलीबाल, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों में ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी अलका तोमर, शूटिंग खिलाड़ी सौरभ चौधरी, रवि कुमार, शहजर रिजवी, एथलीट अन्नू रानी सहित कई खिलाड़ियों ने देश का नाम विदेशों में रोशन किया। इन खिलाड़ियों ने मेरठ में रहकर खुद को तैयार किया। लेकिन अधिकतर ग्रामीण खिलाड़ियों के पास शहर आने की सुविधाएं नहीं हैं। जिसके कारण प्रतिभा गांवों से लेकर ब्लॉक स्तर पर ही समाप्त हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर कोई मिनी स्टेडियम नहीं है। शहर के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक, कबड्डी के लिए मैट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों की प्रतिभाएं ब्लॉक स्तर पर ही दम तोड़ रही हैं। युवा कल्याण विभाग का ग्रामीण युवाओं पर कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में ग्रामीण खिलाड़ियों का भविष्य राम भरोसे ही है। वहीं, अधिकारियों की मानें तो युवा कल्याण विभाग के पास 12 हजार रुपये प्रति ब्लॉक के हिसाब से साल में दो लाख रुपये का बजट ही आता है।
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नहीं है मैट
कबड्डी के लिये मैट पर अभ्यास होना चाहिये। लेकिन गांवों में तो मैट नहीं है, स्टेडियम में भी मैट की सुविधा नहीं है। ऐसे में शहर में अभ्यास करना भी बेकार है। -विपुल चौधरी, रोहटा
मिनी स्टेडियम नहीं
सीनियर वर्ग के लिए वो कबड्डी खेलते हैं, लेकिन गांवों में कोई मिनी स्टेडियम नहीं है। मैट पर अभ्यास हो तो प्रो कबड्डी में जाने की राह मिले। -सूर्या तालियान, सरूरपुर
नहीं हैं संसाधन
गांवों में खिलाड़ियों के लिए संसाधन नहीं है। खिलाड़ी निजी प्रयास से शहर आते हैं। लेकिन दिल्ली से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तरीय सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। -विक्की, जानी निवासी
सुविधाओं पर नहीं ध्यान
खिलाड़ियों की सुविधाओं पर किसी का ध्यान नहीं है। प्रो कबड्डी के बाद युवाओं में कबड्डी का क्रेज बढ़ा। खिलाड़ियों के पास उच्च स्तरीय सुविधाएं नही हैं। -रक्षित, पिठलोकर
सिंथेटिक ट्रैक होना चाहिए
स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक होना चाहिए। वो गांव से स्टेडियम में अभ्यास करने आते हैं। मैदान में सिंथेटिक ट्रैक हो तो खिलाड़ियों में नई ऊर्जा मिलेगी। -अश्वनी भराला, दौराला
गलत प्रभाव पड़ रहा
जिला स्तर पर कई बार प्रतिभाग कर चुका हूं। सिंथेटिक ट्रैक मिले तो रफ्तार को धार मिले। मैदान पर दौड़ने से खिलाड़ियों के शरीर पर गलत प्रभाव पड़ते हैं। -सागर कुमार, बाफर
शहर आने का होगा फायदा
सिंथेटिक ट्रैक स्टेडियम में आ जाए तो अच्छा रहेगा। प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने मेरठ आए हैं। सिंथेटिक ट्रैक हो तो शहर आने का फायदा होगा। -शुभम पूनिया, नेक
होता है अंतर
जमीन पर दौड़ लगाने के बाद सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ना बेहद मुश्किल है। ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी सिंथेटिक ट्रैक पर पूरी तरह फेल हो जाते हैं। -अजय धंजू, पल्लवपुरम
अटकी है फाइल
स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक की फाइल लखनऊ में अटकी है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक से ग्रामीण युवाओं को भी लाभ होगा। -आले हैदर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
विशेष ध्यान देंगे
साल में एक बार ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता कराने का बजट मिलता है। जिला योजना में विभाग को शामिल करने की बात चल रही है। जिसके बाद बजट मिलेगा तो खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। -प्रेम सिंह, प्रभारी जिला कल्याण विभाग अधिकारी
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- ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने कहा सुविधाओं के अभाव में पिछड़ रहीं प्रतिभाएं
- युवा कल्याण विभाग द्वारा स्टेडियम में प्रतिभाग करने पहुंचे खिलाड़ियों ने की मन की बात
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाएं ब्लॉक स्तर पर ही दम तोड़ रही हैं। युवा कल्याण विभाग द्वारा कैलाश प्रकाश स्टेडियम में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पहुंचे खिलाड़ियों ने मन की बात की। प्रतियोगिता में जिले के 12 ब्लॉक से साढ़े पांच सौ खिलाड़ियाें ने प्रतिभाग किया। कहा कि गांवों में सुविधा मिले तो हम भी सफलता के झंडे गाडे़ेंगे। लेकिन गांवों में संसाधनों की कमी के कारण खेलों पर प्रभाव पड़ रहा है। इसके जिम्मेदार युवा कल्याण विभाग पर सवाल उठने लगे हैं।
शूटिंग, कुश्ती, कबड्डी, वॉलीबाल, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों में ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी अलका तोमर, शूटिंग खिलाड़ी सौरभ चौधरी, रवि कुमार, शहजर रिजवी, एथलीट अन्नू रानी सहित कई खिलाड़ियों ने देश का नाम विदेशों में रोशन किया। इन खिलाड़ियों ने मेरठ में रहकर खुद को तैयार किया। लेकिन अधिकतर ग्रामीण खिलाड़ियों के पास शहर आने की सुविधाएं नहीं हैं। जिसके कारण प्रतिभा गांवों से लेकर ब्लॉक स्तर पर ही समाप्त हो रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर कोई मिनी स्टेडियम नहीं है। शहर के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक, कबड्डी के लिए मैट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों की प्रतिभाएं ब्लॉक स्तर पर ही दम तोड़ रही हैं। युवा कल्याण विभाग का ग्रामीण युवाओं पर कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में ग्रामीण खिलाड़ियों का भविष्य राम भरोसे ही है। वहीं, अधिकारियों की मानें तो युवा कल्याण विभाग के पास 12 हजार रुपये प्रति ब्लॉक के हिसाब से साल में दो लाख रुपये का बजट ही आता है।
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नहीं है मैट
कबड्डी के लिये मैट पर अभ्यास होना चाहिये। लेकिन गांवों में तो मैट नहीं है, स्टेडियम में भी मैट की सुविधा नहीं है। ऐसे में शहर में अभ्यास करना भी बेकार है। -विपुल चौधरी, रोहटा
मिनी स्टेडियम नहीं
सीनियर वर्ग के लिए वो कबड्डी खेलते हैं, लेकिन गांवों में कोई मिनी स्टेडियम नहीं है। मैट पर अभ्यास हो तो प्रो कबड्डी में जाने की राह मिले। -सूर्या तालियान, सरूरपुर
नहीं हैं संसाधन
गांवों में खिलाड़ियों के लिए संसाधन नहीं है। खिलाड़ी निजी प्रयास से शहर आते हैं। लेकिन दिल्ली से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तरीय सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। -विक्की, जानी निवासी
सुविधाओं पर नहीं ध्यान
खिलाड़ियों की सुविधाओं पर किसी का ध्यान नहीं है। प्रो कबड्डी के बाद युवाओं में कबड्डी का क्रेज बढ़ा। खिलाड़ियों के पास उच्च स्तरीय सुविधाएं नही हैं। -रक्षित, पिठलोकर
सिंथेटिक ट्रैक होना चाहिए
स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक होना चाहिए। वो गांव से स्टेडियम में अभ्यास करने आते हैं। मैदान में सिंथेटिक ट्रैक हो तो खिलाड़ियों में नई ऊर्जा मिलेगी। -अश्वनी भराला, दौराला
गलत प्रभाव पड़ रहा
जिला स्तर पर कई बार प्रतिभाग कर चुका हूं। सिंथेटिक ट्रैक मिले तो रफ्तार को धार मिले। मैदान पर दौड़ने से खिलाड़ियों के शरीर पर गलत प्रभाव पड़ते हैं। -सागर कुमार, बाफर
शहर आने का होगा फायदा
सिंथेटिक ट्रैक स्टेडियम में आ जाए तो अच्छा रहेगा। प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने मेरठ आए हैं। सिंथेटिक ट्रैक हो तो शहर आने का फायदा होगा। -शुभम पूनिया, नेक
होता है अंतर
जमीन पर दौड़ लगाने के बाद सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ना बेहद मुश्किल है। ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी सिंथेटिक ट्रैक पर पूरी तरह फेल हो जाते हैं। -अजय धंजू, पल्लवपुरम
अटकी है फाइल
स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक की फाइल लखनऊ में अटकी है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक से ग्रामीण युवाओं को भी लाभ होगा। -आले हैदर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
विशेष ध्यान देंगे
साल में एक बार ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता कराने का बजट मिलता है। जिला योजना में विभाग को शामिल करने की बात चल रही है। जिसके बाद बजट मिलेगा तो खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। -प्रेम सिंह, प्रभारी जिला कल्याण विभाग अधिकारी