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साल भर सियासत, नहीं हुआ फूटी कौड़ी का भी विकास
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:11 AM IST
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साल भर सियासत, नहीं हुआ धेलेभर का काम
मेरठ। जिला पंचायत के लिए यह वित्तीय वर्ष बहुत ही खराब रहा। वित्तीय वर्ष में ही सरकार बदलने के साथ जिला पंचायत में उलटफेर और विवाद शुरू हो गए। पूरा साल इन्हीं विवादों में बीत गया, जब विवाद सुलझे तब तक वित्तीय वर्ष अपनी समाप्ति पर आ चुका था। ऐसे में इस साल तीन बार कार्ययोजना बनने के बावजूद एक रुपये का भी विकास कार्य नहीं हो पाया।
कुर्सी को लेकर मची मारामारी
विधानसभा चुनाव के बाद 19 मार्च 2017 को भाजपा सरकार का गठन हुआ। उस समय जिला पंचायत अध्यक्ष समाजवादी पार्टी की सीमा प्रधान थीं। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लामबंदी शुरू हो गयी। इस उठापटक में नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत ही बिगड़ गयी और जिला पंचायत बोर्ड से विकास कार्य का कोई प्रस्ताव होना तो दूर बैठक तक नहीं हुई। करीब एक माह तक चली अविश्वास लाने की मशक्कत में भाजपाई कामयाब रहे और अपने पक्ष में अविश्वास का समर्थन जुटा लिया। लेकिन इससे पहले कि अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाकर मतदान होता, सीमा प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और शासन ने जिला पंचायत में प्रशासक नियुक्त कर दिया।
फिर आपस में ठनी रही
प्रशासक नियुक्त होने के बाद तमाम कार्य बाधित हो गए। इसके बाद हुए उपचुनाव में कुलविंदर सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में 28 अगस्त को शपथ ली। लेकिन चुनाव के दौरान ही उनकी अपने ही भाजपाई सदस्यों से ठन गयी और अध्यक्ष चुने जाने के दौरान जो सदस्य उनके साथ थे, उनमें से भी कुछ अलग हो गए। इसके बाद पैदा हुई इस गुटबाजी में जिला पंचायत की जो कार्ययोजना तैयार हुई, उस पर इन सदस्याें ने आपत्ति लगा दी और मंडलायुक्त के निर्देश पर प्रस्ताव खारिज हो गए।
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ई-टेंडरिंग में फंसी कार्ययोजना
इसके बाद फिर से कार्ययोजना तैयार हुई। लेकिन वह ई-टेंडरिंग में फंस गयी। इसी दौरान रूठे हुए सदस्यों से तो जिला पंचायत अध्यक्ष की सुलह हो गयी। मगर तत्कालीन एएमए से ठन गयी। इस विवाद के बीच तत्कालीन एएमए का स्थानांतरण हो गया। ऐसे मेें तीसरी बार फिर से कार्ययोजना बनायी गयी। लेकिन इसके टेंडर अभी तक जारी नहीं हुए हैं।
10 दिन में क्या होगा
वित्तीय वर्ष 2017-18 के समाप्त होने में अब 10 दिन शेष बचे हैं। लेकिन इस पूरे साल में जिला पंचायत एक भी रुपये का विकास कार्य नहीं करा पाया। जिला पंचायत सूत्रों के अनुसार ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी वित्तीय वर्ष में जिला पंचायत फूटी कौड़ी का भी विकास कार्य न करा पायी हो।
तोड़ देंगे पिछले रिकॉर्ड
जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह का इस पर कहना है कि कुछ तकनीकी और कुछ विवादों के कारण यह साल पूरी तरह शून्य निकल गया। मेरा कार्यकाल तो मात्र अभी सात माह का हुआ है। लेकिन इस दौरान मैंने तीन बार विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार की। तीनों ही कार्ययोजना 15 करोड़ से 17 करोड़ तक रहीं। मगर किसी न किसी कारण बाधा आती रही। जबकि एक कार्ययोजना तैयार करने में पूरी मशीनरी लगती है। फिर भी उम्मीद है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में हम विकास के पिछले रिकॉर्ड तोड़ देंगे।
खास बातें:
जिला पंचायत:
- पूरे वित्तीय वर्ष में बनी तीन बार कार्ययोजना, नहीं छूटे ठेके
- पहली बार जिला पंचायत के इतिहास में बीता ऐसा साल
- अब ठेके भी छूटे तो 31 मार्च के बाद ही शुरू हो पाएगा काम
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मेरठ। जिला पंचायत के लिए यह वित्तीय वर्ष बहुत ही खराब रहा। वित्तीय वर्ष में ही सरकार बदलने के साथ जिला पंचायत में उलटफेर और विवाद शुरू हो गए। पूरा साल इन्हीं विवादों में बीत गया, जब विवाद सुलझे तब तक वित्तीय वर्ष अपनी समाप्ति पर आ चुका था। ऐसे में इस साल तीन बार कार्ययोजना बनने के बावजूद एक रुपये का भी विकास कार्य नहीं हो पाया।
कुर्सी को लेकर मची मारामारी
विधानसभा चुनाव के बाद 19 मार्च 2017 को भाजपा सरकार का गठन हुआ। उस समय जिला पंचायत अध्यक्ष समाजवादी पार्टी की सीमा प्रधान थीं। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लामबंदी शुरू हो गयी। इस उठापटक में नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत ही बिगड़ गयी और जिला पंचायत बोर्ड से विकास कार्य का कोई प्रस्ताव होना तो दूर बैठक तक नहीं हुई। करीब एक माह तक चली अविश्वास लाने की मशक्कत में भाजपाई कामयाब रहे और अपने पक्ष में अविश्वास का समर्थन जुटा लिया। लेकिन इससे पहले कि अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाकर मतदान होता, सीमा प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और शासन ने जिला पंचायत में प्रशासक नियुक्त कर दिया।
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फिर आपस में ठनी रही
प्रशासक नियुक्त होने के बाद तमाम कार्य बाधित हो गए। इसके बाद हुए उपचुनाव में कुलविंदर सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में 28 अगस्त को शपथ ली। लेकिन चुनाव के दौरान ही उनकी अपने ही भाजपाई सदस्यों से ठन गयी और अध्यक्ष चुने जाने के दौरान जो सदस्य उनके साथ थे, उनमें से भी कुछ अलग हो गए। इसके बाद पैदा हुई इस गुटबाजी में जिला पंचायत की जो कार्ययोजना तैयार हुई, उस पर इन सदस्याें ने आपत्ति लगा दी और मंडलायुक्त के निर्देश पर प्रस्ताव खारिज हो गए।
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ई-टेंडरिंग में फंसी कार्ययोजना
इसके बाद फिर से कार्ययोजना तैयार हुई। लेकिन वह ई-टेंडरिंग में फंस गयी। इसी दौरान रूठे हुए सदस्यों से तो जिला पंचायत अध्यक्ष की सुलह हो गयी। मगर तत्कालीन एएमए से ठन गयी। इस विवाद के बीच तत्कालीन एएमए का स्थानांतरण हो गया। ऐसे मेें तीसरी बार फिर से कार्ययोजना बनायी गयी। लेकिन इसके टेंडर अभी तक जारी नहीं हुए हैं।
10 दिन में क्या होगा
वित्तीय वर्ष 2017-18 के समाप्त होने में अब 10 दिन शेष बचे हैं। लेकिन इस पूरे साल में जिला पंचायत एक भी रुपये का विकास कार्य नहीं करा पाया। जिला पंचायत सूत्रों के अनुसार ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी वित्तीय वर्ष में जिला पंचायत फूटी कौड़ी का भी विकास कार्य न करा पायी हो।
तोड़ देंगे पिछले रिकॉर्ड
जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह का इस पर कहना है कि कुछ तकनीकी और कुछ विवादों के कारण यह साल पूरी तरह शून्य निकल गया। मेरा कार्यकाल तो मात्र अभी सात माह का हुआ है। लेकिन इस दौरान मैंने तीन बार विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार की। तीनों ही कार्ययोजना 15 करोड़ से 17 करोड़ तक रहीं। मगर किसी न किसी कारण बाधा आती रही। जबकि एक कार्ययोजना तैयार करने में पूरी मशीनरी लगती है। फिर भी उम्मीद है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में हम विकास के पिछले रिकॉर्ड तोड़ देंगे।
खास बातें:
जिला पंचायत:
- पूरे वित्तीय वर्ष में बनी तीन बार कार्ययोजना, नहीं छूटे ठेके
- पहली बार जिला पंचायत के इतिहास में बीता ऐसा साल
- अब ठेके भी छूटे तो 31 मार्च के बाद ही शुरू हो पाएगा काम