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निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होते ही भाजपाइयों में गुटबाजी

Sat, 12 Aug 2017 02:51 AM IST
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:51 AM IST
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निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होते ही भाजपाइयों में गुटबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ।
नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल पूरा होते ही निगम में भाजपाइयों की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। जो पार्षद पूरे पांच साल महापौर के सबसे करीबी माने जाते रहे वह अब कार्यकारिणी की आड़ में महापौर के विरोध में उतर आए हैं। इतना ही नहीं भाजपा के कुछ पार्षद महापौर को कार्यकारिणी समिति का अध्यक्ष भी मानने को तैयार नहीं हैं। शुक्रवार को भाजपा के चार पार्षद निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष को साथ लेकर अपर नगरायुक्त से मिले। इसकी सूचना महापौर को नहीं दी गयी। यह मामला भाजपा आलाकमान तक पहुंच गया है।
नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल आठ अगस्त को खत्म हो चुका है। शासनादेश के मुताबिक निगम की कार्यकारिणी समिति निगरानी समिति के रूप में कार्य करेगी। शुक्रवार को कार्यकारिणी की उपाध्यक्ष रेनू गुप्ता, पंकज कतीरा, सुधीर पुंडीर, कैलाश, राजू वर्मा अपर नगरायुक्त से मिलने पहुंचे। इनके साथ महापौर का न होना चर्चा का विषय बन गया। इतना ही नहीं महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने पार्टी के कार्यकारिणी समिति सदस्यों का गलत कदम बताते हुए शिकायत पार्टी संगठन से की। महापौर कार्यकारिणी समिति के इन सदस्यों की कार्य प्रणाली को पार्टी विरोधी मानकर चल रहे हैं, जबकि कार्यकारिणी सदस्य पंकज कतीरा का कहना है कि वह अनौपचारिक रूप से अपर नगरायुक्त से मिलने गए थे। 15 अगस्त और जन्माष्ठमी त्पर शहर में पथ प्रकाश, सफाई, चूना, रंगोली सजाने के संबंध में वे मिले।
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ये है निगम अधिनियम की धारा 51
नगर निगम अधिनियम की धारा 51 क, के अनुसार पदेन कार्यकारिणी समिति का सभापति महापौर होता है। कार्यकारिणी समिति ऐसे 12 व्यक्तियों की होगी जो निगम पार्षदों में से चुने गए सदस्य होंगे। शासनादेश में निगम कार्यकारिणी समिति ही चुनाव आचार संहिता लगने तक निगरानी समिति के रूप में रहेगी।
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निकायों में अंतरिम व्यवस्था का शासनादेश
- 15 जुलाई को जारी शासनादेश के मुताबिक नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के उपरांत नगरायुक्त को नगर निगम के कार्य संचालन का दायित्व सौंप दिया जाएगा।
- निकाय कार्यकारिणी समिति बहुमत द्वारा नगरायुक्त को परामर्श दे सकेगी। समिति नागरिकों को दी जाने वाली सुविधाओं का पर्यवेक्षण भी करेगी। इस दौरान कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को कोई मानदेय, भत्ता नहीं मिलेगा।

इनका ये है कहना-----
कुछ नहीं स्पष्ट
शासनादेश में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। महापौर बता रहे हैं कि वह कार्यकारिणी के अध्यक्ष के रूप में रहेंगे। सही स्थिति अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं। -पंकज कतीरा, सदस्य कार्यकारिणी।

महापौर हैं सभापति
कार्यकारिणी समिति का जो स्वरूप पूर्व से चला आ रहा है। वहीं आगे भी रहेगा। महापौर कार्यकारिणी समिति के सभापति के रूप में होते हैं। अभी भी होंगे। -अलीहसन कर्नी, अपर नगरायुक्त


खुद ही वापस की सुविधा
शासनदेश में कहीं नहीं कहा गया है कि महापौर कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष नहीं रहेंगे और न ही सुविधा वापस करने की बात कही गई है। फिर भी हमने स्वेच्छा से निगम की गाड़ी, चालक, दो स्टेनो वापस कर दिए। अपर नगरायुक्त का हमें सुविधा वापस करने के संबंध में पत्र मिला है। उसका जवाब भी भेजा जा रहा है। रही बात कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों की असहमति की। इस संबंध में पार्टी हाईकमान को सूचित कर दिया गया है। मैं कार्यकारिणी समिति अध्यक्ष के रूप में कार्य करूंगा। -हरिकांत अहलुवालिया, महापौर

खास बातें
- जो थे खास, उन्होंने ही छोड़ दिया महापौर का साथ
- महापौर को कार्यकारिणी का अध्यक्ष भी मानने को तैयार नहीं हैं भाजपा पार्षद
- महापौर बोले, कार्यकारिणी का अध्यक्ष हूं और रहूंगा
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