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अब पालने में खेल सकेंगे लावारिस शिशु, गोद भी ले सकेंगे लोग
Updated Fri, 06 Jul 2018 02:12 AM IST
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कचरे का ढेर पर नहीं अब पालने में खेलेंगे लावारिस शिशु
मेरठ। कुछ लोग अपने नवजात बच्चों को कचरे के ढेर या झाड़ियों में छोड़ जाते थेे, अब उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। पालना स्वागत केंद्र में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी उनका स्वागत करेंगे। वे बच्चा का लालन-पालन करेंगे। इन बच्चों को कोई गोद लेना चाहे तो दत्तक ग्रहण इकाइयों के माध्यम से गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह पालना केंद्र सही से काम करें, इसलिए इसकी हर महीने जिलाधिकारी समीक्षा करेंगे।
यह पालना केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सरूरपुर, खरखौदा, माछरा और परीक्षितगढ़ में खोले जा चुके हैं, जबकि बाकी आठ सीएचसी हस्तिनापुर, मवाना, भूड़भराल, जानी, रोहटा, सरधना, दौराला और भावनपुर में प्रक्रिया आखिरी दौर में है। इनकेअलावा जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और महिला जिला चिकित्सालय में पालना व्यवस्था इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी।
जो अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते, वह इस पालने में बच्चे को रखकर जा सकते हैं। माना जाता है कि फेंके जाने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या ज्यादा होती है। कई बार ऐसे शिशु कुत्ते या फिर दूसरे जानवरों का शिकार भी बन जाते हैं। ऐसे नवजातों को बचाने के लिए सरकार ने यह बीड़ा उठाया है। पालने में शिशु को रखते ही घंटी बज जाएगी। इससे संबंधित केंद्र के कर्मचारियों को बच्चे के आने की जानकारी मिल जाएगी। वहीं सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि पालना में नवजात के मिलने की सूचना तैनात इंचार्ज द्वारा बाल कल्याण समिति, जिला परिवीक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस एवं संबंधित चाइल्ड लाइन, विभागीय अधिकारियों तथा महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों को दी जाएगी।
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मुजफ्फरनगर में आए दो मामले
हाल ही में मुजफ्फरनगर जिले में इस तरह का दो मामले प्रकाश में आए थे। एक शिशु को कार सवार कुछ लोग से एक घर केगेट पर छोड़ गए थे, यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। हालांकि बाद में पुलिस ने उस परिवार को ट्रेस कर लिया था। इसके अलावा एक अन्य शिशु को भी इसी तरह लावारिस छोड़ा गया था।
यह है योजना
प्रदेश सरकार अनचाहे शिशुओं को बचाने के लिए पालना शिशु स्वागत केंद्र खोल रही है। पालना केंद्र सभी सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेज, राजकीय बाल गृह, चाइल्ड लाइन व दत्तक ग्रहण इकाइयों में खोले जा रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार इसमें 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के साथ ही 181 महिला हेल्पलाइन की भी मदद लेगी।
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मेरठ। कुछ लोग अपने नवजात बच्चों को कचरे के ढेर या झाड़ियों में छोड़ जाते थेे, अब उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। पालना स्वागत केंद्र में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी उनका स्वागत करेंगे। वे बच्चा का लालन-पालन करेंगे। इन बच्चों को कोई गोद लेना चाहे तो दत्तक ग्रहण इकाइयों के माध्यम से गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह पालना केंद्र सही से काम करें, इसलिए इसकी हर महीने जिलाधिकारी समीक्षा करेंगे।
यह पालना केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सरूरपुर, खरखौदा, माछरा और परीक्षितगढ़ में खोले जा चुके हैं, जबकि बाकी आठ सीएचसी हस्तिनापुर, मवाना, भूड़भराल, जानी, रोहटा, सरधना, दौराला और भावनपुर में प्रक्रिया आखिरी दौर में है। इनकेअलावा जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और महिला जिला चिकित्सालय में पालना व्यवस्था इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी।
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जो अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते, वह इस पालने में बच्चे को रखकर जा सकते हैं। माना जाता है कि फेंके जाने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या ज्यादा होती है। कई बार ऐसे शिशु कुत्ते या फिर दूसरे जानवरों का शिकार भी बन जाते हैं। ऐसे नवजातों को बचाने के लिए सरकार ने यह बीड़ा उठाया है। पालने में शिशु को रखते ही घंटी बज जाएगी। इससे संबंधित केंद्र के कर्मचारियों को बच्चे के आने की जानकारी मिल जाएगी। वहीं सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि पालना में नवजात के मिलने की सूचना तैनात इंचार्ज द्वारा बाल कल्याण समिति, जिला परिवीक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस एवं संबंधित चाइल्ड लाइन, विभागीय अधिकारियों तथा महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों को दी जाएगी।
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मुजफ्फरनगर में आए दो मामले
हाल ही में मुजफ्फरनगर जिले में इस तरह का दो मामले प्रकाश में आए थे। एक शिशु को कार सवार कुछ लोग से एक घर केगेट पर छोड़ गए थे, यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। हालांकि बाद में पुलिस ने उस परिवार को ट्रेस कर लिया था। इसके अलावा एक अन्य शिशु को भी इसी तरह लावारिस छोड़ा गया था।
यह है योजना
प्रदेश सरकार अनचाहे शिशुओं को बचाने के लिए पालना शिशु स्वागत केंद्र खोल रही है। पालना केंद्र सभी सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेज, राजकीय बाल गृह, चाइल्ड लाइन व दत्तक ग्रहण इकाइयों में खोले जा रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार इसमें 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के साथ ही 181 महिला हेल्पलाइन की भी मदद लेगी।