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अनुशासन, संस्कृति, राष्ट्रवाद के साथ सिखाया शक्ति का पाठ
Updated Mon, 26 Feb 2018 02:36 AM IST
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राष्ट्रवाद के साथ सिखाया शक्ति का पाठ
मेरठ। राष्ट्रोदय स्वयंसेवक समागम में युवा शक्ति को संघ प्रमुख डॉ. मोहन राव भागवत ने अनुशासन के साथ ही संस्कृति, राष्ट्रवाद और युवा शक्ति का भी पाठ पढ़ाया। कहा कि दुनिया अच्छी बातें तब ही मानती है जब उसके पीछे कोई शक्ति हो। लेकिन शक्ति का कभी प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।
संघ प्रमुख ने युवाओं से आह्वान किया कि शक्ति दिखाने की जरूरत नहीं होती। जो ऐसा करते हैं वे खत्म हो जाते हैं। इस पर उन्होंने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि जंगल में एक शेर की मौत के बाद उसके शावक को सबने राजा मान लिया। वो गुफा में रहने लगा। एक बार उसे लगा कि शायद लोग उसे जंगल का राजा नहीं मानते हैं। ऐसे में उसने जंगल के जीवों से पूछना शुरू कर दिया। उसने खरगोश और सियार से पूछा कि जंगल का राजा कौन है, तो जवाब मिला कि इसमें भी कोई शक है क्या, राजा तो आप ही हैं। शावक ने यही सवाल एक हाथी से किया तो उसने उसे सूंड में लपेटकर फेंक दिया। शावक ने जैसे-तैसे अपनी इज्जत बचाने के लिए हाथी से कहा कि आपको नहीं पता था तो बता देते। लेकिन मेरी इज्जत तो मत खराब करते। इस कथा के जरिए उन्होंने स्वयं सेवकों को समझाया कि शक्ति को कभी प्रदर्शित करने की जरूरत नहीं होती।
अपनी शक्ति को पहचानो।
संघ प्रमुख ने कहा कि जो शक्ति पहचान लेता है, वो बलवान बन जाता है। उन्होंने एक और प्रसंग सुनाया कि जब राम का दूत बनकर लंका जाने की बारी आई तो जामवंत, नल और नील ने कोई न कोई मजबूरी बताकर वहां जाने से मना कर दिया। इस पर जामवंत ने पेड़ के नीचे लेटे हनुमान से लंका जाने को कहा तो वे कहने लगे कि जब तुम नहीं जा सकते तो मैं कैसे जा पाऊंगा। इस पर जब सबने उन्हें शक्ति का अहसास दिलाया तो लंका गए हनुमान ने न केवल रावण को राम की शक्ति का अहसास कराया बल्कि लंका दहन भी कर दी।
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राष्ट्र के प्रति समर्पण क्या होता है
इसके लिए उन्होंने सन 1971 के युद्ध में कक्षा नौ के एक छात्र की शहादत के बारे में बताया। कहा कि दुश्मनों की सेना जब बांग्लादेश सीमा से घुसी तो कक्षा नौ में पढ़ने वाले स्वयंसेवक ने बीएसएफ को इसकी जानकारी दी। साथ ही वो खुद गोला लेकर जवानों के साथ चला गया। देश के लिए शहीद हो गया। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा हमारे राष्ट्र का प्रयोजन ऐसा है जिससे जीवन चलता रहता है। वह धर्म है। इसलिए हमारा राष्ट्र अमर है।
यहां सब बराबर
राष्ट्रोदय समागम में बच्चों से लेकर बड़ों तक गणवेश में नजर आए तो यहां पर सारा भेदभाव मिट गया। न जात-पात का कोई भेद दिखा और न ही राजनीतिक पार्टियों की तरह सफेद कपड़ों में बैठे नेताओं और कार्यकर्ताओं वाला भेद नजर नहीं आया। जो जैसे पहुंचा उसे बैठने की जगह भी वहीं मिली। कतारों में बच्चे-युवा-बुजुर्ग सब एक तरह से नजर आए। समागम में विधायक हों या फिर सांसद और केंद्रीय मंत्री, यहां सब एक ही समान थे। कोई विधायक जमीन पर बैठा था तो कोई विधायक ई-रिक्शा में बैठकर मैदान तक पहुंच रहा था।
सबक है राष्ट्रोदय समागम
मेरठ। शहर में रविवार को जितना बड़ा आयोजन हुआ, शायद इससे पहले कभी मेरठ में ऐसा हुआ हो। लेकिन इसके बाद भी शहर में कहीं कोई अराजकता नहीं हुई। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों के लिए राष्ट्रोदय समागम बड़ा सबक है। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी शहर में इतनी भीड़ होने के बावजूद सब कुछ ठीक ठाक निपट गया।
शिक्षकों से लेकर कुलपति तक हुए शामिल
समागम का हिस्सा बनने के लिए शिक्षा के क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पहुंचे थे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, मेरठ कॉलेज के शिक्षक डॉ. मनोज सिवाच भी स्वयंसेवकों के साथ शामिल हुए।
खास बातें
- संघ प्रमुख बोले, शक्ति का कभी प्रदर्शन नहीं करना चाहिए
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मेरठ। राष्ट्रोदय स्वयंसेवक समागम में युवा शक्ति को संघ प्रमुख डॉ. मोहन राव भागवत ने अनुशासन के साथ ही संस्कृति, राष्ट्रवाद और युवा शक्ति का भी पाठ पढ़ाया। कहा कि दुनिया अच्छी बातें तब ही मानती है जब उसके पीछे कोई शक्ति हो। लेकिन शक्ति का कभी प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।
संघ प्रमुख ने युवाओं से आह्वान किया कि शक्ति दिखाने की जरूरत नहीं होती। जो ऐसा करते हैं वे खत्म हो जाते हैं। इस पर उन्होंने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि जंगल में एक शेर की मौत के बाद उसके शावक को सबने राजा मान लिया। वो गुफा में रहने लगा। एक बार उसे लगा कि शायद लोग उसे जंगल का राजा नहीं मानते हैं। ऐसे में उसने जंगल के जीवों से पूछना शुरू कर दिया। उसने खरगोश और सियार से पूछा कि जंगल का राजा कौन है, तो जवाब मिला कि इसमें भी कोई शक है क्या, राजा तो आप ही हैं। शावक ने यही सवाल एक हाथी से किया तो उसने उसे सूंड में लपेटकर फेंक दिया। शावक ने जैसे-तैसे अपनी इज्जत बचाने के लिए हाथी से कहा कि आपको नहीं पता था तो बता देते। लेकिन मेरी इज्जत तो मत खराब करते। इस कथा के जरिए उन्होंने स्वयं सेवकों को समझाया कि शक्ति को कभी प्रदर्शित करने की जरूरत नहीं होती।
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अपनी शक्ति को पहचानो।
संघ प्रमुख ने कहा कि जो शक्ति पहचान लेता है, वो बलवान बन जाता है। उन्होंने एक और प्रसंग सुनाया कि जब राम का दूत बनकर लंका जाने की बारी आई तो जामवंत, नल और नील ने कोई न कोई मजबूरी बताकर वहां जाने से मना कर दिया। इस पर जामवंत ने पेड़ के नीचे लेटे हनुमान से लंका जाने को कहा तो वे कहने लगे कि जब तुम नहीं जा सकते तो मैं कैसे जा पाऊंगा। इस पर जब सबने उन्हें शक्ति का अहसास दिलाया तो लंका गए हनुमान ने न केवल रावण को राम की शक्ति का अहसास कराया बल्कि लंका दहन भी कर दी।
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राष्ट्र के प्रति समर्पण क्या होता है
इसके लिए उन्होंने सन 1971 के युद्ध में कक्षा नौ के एक छात्र की शहादत के बारे में बताया। कहा कि दुश्मनों की सेना जब बांग्लादेश सीमा से घुसी तो कक्षा नौ में पढ़ने वाले स्वयंसेवक ने बीएसएफ को इसकी जानकारी दी। साथ ही वो खुद गोला लेकर जवानों के साथ चला गया। देश के लिए शहीद हो गया। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा हमारे राष्ट्र का प्रयोजन ऐसा है जिससे जीवन चलता रहता है। वह धर्म है। इसलिए हमारा राष्ट्र अमर है।
यहां सब बराबर
राष्ट्रोदय समागम में बच्चों से लेकर बड़ों तक गणवेश में नजर आए तो यहां पर सारा भेदभाव मिट गया। न जात-पात का कोई भेद दिखा और न ही राजनीतिक पार्टियों की तरह सफेद कपड़ों में बैठे नेताओं और कार्यकर्ताओं वाला भेद नजर नहीं आया। जो जैसे पहुंचा उसे बैठने की जगह भी वहीं मिली। कतारों में बच्चे-युवा-बुजुर्ग सब एक तरह से नजर आए। समागम में विधायक हों या फिर सांसद और केंद्रीय मंत्री, यहां सब एक ही समान थे। कोई विधायक जमीन पर बैठा था तो कोई विधायक ई-रिक्शा में बैठकर मैदान तक पहुंच रहा था।
सबक है राष्ट्रोदय समागम
मेरठ। शहर में रविवार को जितना बड़ा आयोजन हुआ, शायद इससे पहले कभी मेरठ में ऐसा हुआ हो। लेकिन इसके बाद भी शहर में कहीं कोई अराजकता नहीं हुई। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों के लिए राष्ट्रोदय समागम बड़ा सबक है। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी शहर में इतनी भीड़ होने के बावजूद सब कुछ ठीक ठाक निपट गया।
शिक्षकों से लेकर कुलपति तक हुए शामिल
समागम का हिस्सा बनने के लिए शिक्षा के क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पहुंचे थे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, मेरठ कॉलेज के शिक्षक डॉ. मनोज सिवाच भी स्वयंसेवकों के साथ शामिल हुए।
खास बातें
- संघ प्रमुख बोले, शक्ति का कभी प्रदर्शन नहीं करना चाहिए