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वेद ही ज्ञान का मूल श्रोत
Updated Sat, 02 Sep 2017 02:28 AM IST
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वेद ही ज्ञान का मूल श्रोत
मेरठ। थापरनगर में आयोजित आर्य समाज के वेद प्रचार कार्यक्रम के तहत दूसरे दिन का कार्यक्रम रुड़की रोड स्थित राजन कुंज में उषा सचदेवा के आवास पर हुआ। आचार्य वागीश्वर शास्त्री ने देवयज्ञ कर कार्यक्रम शुरू किया। संचालन करते हुए राजेश सेठी ने कहा कि गीता में श्री कृष्ण ने ज्ञान की सबसे पवित्र वस्तु की संज्ञा दी है। वास्तविक रूप से वेद ही ज्ञान का मूल श्रोत है। जिसके अनुसार मनुष्य के कर्म करने से उसका जीवन स्वर्ग बन जाता है। पंडित योगेश दत्त ने कहा कि संसार ईश्वर की दिव्य रचना है। डॉ ज्वलंत कुमार शास्त्री ने कहा कि वर्तमान में हमारे पतन का मुख्य कारण वेद से दूर होना है। प्रत्येक कार्य को हमें सत्य और असत्य का विचार करना चाहिए। कहा कि गुरुकुल डौरली अनेक महापुरुषों एवं क्रांतिकारियों की स्थली रहा है। वैदिक विचारों का अनुसरण कर अनेक विद्वानों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका निभाई है। संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। प्रधानाचार्य आरके सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान सुभाष मल्होत्रा, ऊषा अरोड़ा, सुशील बंसल, अशोक सुधाकर, शोभा महिल शील चंद चौहान और प्रीति सेठी मौजूद रहीं।
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मेरठ। थापरनगर में आयोजित आर्य समाज के वेद प्रचार कार्यक्रम के तहत दूसरे दिन का कार्यक्रम रुड़की रोड स्थित राजन कुंज में उषा सचदेवा के आवास पर हुआ। आचार्य वागीश्वर शास्त्री ने देवयज्ञ कर कार्यक्रम शुरू किया। संचालन करते हुए राजेश सेठी ने कहा कि गीता में श्री कृष्ण ने ज्ञान की सबसे पवित्र वस्तु की संज्ञा दी है। वास्तविक रूप से वेद ही ज्ञान का मूल श्रोत है। जिसके अनुसार मनुष्य के कर्म करने से उसका जीवन स्वर्ग बन जाता है। पंडित योगेश दत्त ने कहा कि संसार ईश्वर की दिव्य रचना है। डॉ ज्वलंत कुमार शास्त्री ने कहा कि वर्तमान में हमारे पतन का मुख्य कारण वेद से दूर होना है। प्रत्येक कार्य को हमें सत्य और असत्य का विचार करना चाहिए। कहा कि गुरुकुल डौरली अनेक महापुरुषों एवं क्रांतिकारियों की स्थली रहा है। वैदिक विचारों का अनुसरण कर अनेक विद्वानों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका निभाई है। संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। प्रधानाचार्य आरके सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान सुभाष मल्होत्रा, ऊषा अरोड़ा, सुशील बंसल, अशोक सुधाकर, शोभा महिल शील चंद चौहान और प्रीति सेठी मौजूद रहीं।