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ग्राम समाज के ही हैं पेड़
Updated Sat, 25 Nov 2017 02:18 AM IST
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मेरठ। वन विभाग अधिकारियों ने ग्राम समाज की जमीन में लगे पेड़ यह कहते हुए काट डाले कि 40 साल पहले वन विभाग ने ही ये पौधे रोपे थे। आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने जांच के बाद निर्देश दिए हैं कि वन विभाग का इन पेड़ों पर कोई अधिकार नहीं। इनसे प्राप्त रकम को ग्राम समाज के खाते में ही जमा कराया जाए।
मामला मवाना के गांव गूढ़ा का है। यहां समाज सेवी धर्मपाल सिंह ने आयुक्त से शिकायत की थी। दरअसल, यहां ग्राम समाज की जमीन में लगे पेड़ों पर वन विभाग ने आरा चलवा दिया और नायब तहसीलदार ने ये पेड़ यहां से हटवा भी दिए। पेड़ों की कीमत पांच लाख रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही है। वन विभाग का दावा था कि वर्ष 1977 में वन विभाग ने इस गांव में ग्राम समाज की जमीन पर पौधरोपण किया था। वे ही पौधे आज विशाल पेड़ बन गए और उन पर वन विभाग का अधिकार था। आयुक्त ने इस बाबत जांच कराई और शिकायत का निस्तारण कर दिया। उन्होंने कहा कि भले ही वन विभाग ने पौधरोपण किया था पर इन पेड़ों पर अधिकार ग्राम समाज का ही है। केवल पौधे लगाने से वन विभाग पेड़ों का मालिक नहीं बन गया। उन्होंने एसडीएम को पत्र भेजकर कहा कि इन पेड़ों से प्राप्त रकम को ग्राम समाज को ही दिया जाए।
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मामला मवाना के गांव गूढ़ा का है। यहां समाज सेवी धर्मपाल सिंह ने आयुक्त से शिकायत की थी। दरअसल, यहां ग्राम समाज की जमीन में लगे पेड़ों पर वन विभाग ने आरा चलवा दिया और नायब तहसीलदार ने ये पेड़ यहां से हटवा भी दिए। पेड़ों की कीमत पांच लाख रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही है। वन विभाग का दावा था कि वर्ष 1977 में वन विभाग ने इस गांव में ग्राम समाज की जमीन पर पौधरोपण किया था। वे ही पौधे आज विशाल पेड़ बन गए और उन पर वन विभाग का अधिकार था। आयुक्त ने इस बाबत जांच कराई और शिकायत का निस्तारण कर दिया। उन्होंने कहा कि भले ही वन विभाग ने पौधरोपण किया था पर इन पेड़ों पर अधिकार ग्राम समाज का ही है। केवल पौधे लगाने से वन विभाग पेड़ों का मालिक नहीं बन गया। उन्होंने एसडीएम को पत्र भेजकर कहा कि इन पेड़ों से प्राप्त रकम को ग्राम समाज को ही दिया जाए।
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