फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   आंखें नहीं देख पा रही साफ, वर्दी का सपना हुआ खाक

आंखें नहीं देख पा रही साफ, वर्दी का सपना हुआ खाक

Wed, 17 Apr 2019 02:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2019 02:10 AM IST
विज्ञापन
आंखें नहीं देख पा रही साफ, वर्दी का सपना हुआ खाक
आंखें नहीं देख पा रही साफ, वर्दी का सपना हुआ खाक
विज्ञापन

यूपी पुलिस सिपाही व एसआई भर्ती परीक्षा में औसतन आठ प्रतिशत अभ्यर्थी नजर की कमजोरी से हुए बाहर
डॉक्टर बोले खानपान की कमी से भी कमजोर हो रहीं हैं युवाओं की नजर
मोबाइल, कंप्यूटर और एलईडी लाइट की रोशनी हो रही खतरनाक
भर्ती बोर्ड के सीओ बोले पहले बहुत कम छात्रों को लगाना पड़ता था चश्मा
मनु चौधरी
मेरठ। कमजोर आंखें कई युवाओं का वर्दी पहनने का सपना तोड़ रहीं हैं। यूपी पुलिस सिपाही और एसआई भर्ती में यह अभ्यर्थी लिखित परीक्षा पास करने और दौड़, लंबाई और नापतौल पूरी होने बाद मेडिकल प्रकिया तक पहुंचे हैं, लेकिन नजर कमजोर होने के कारण कई अभ्यार्थी बाहर हो गए।
एसआई भर्ती के लिए मेरठ मंडल के मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ और गौतमबुद्घनगर जिलों के अभ्यर्थियों का पुलिस लाइन में मेडिकल चल रहा है। यहां सात डॉक्टरों का पैनल मेडिकल कर रहा है। वहीं सिपाही भर्ती में मेरठ जिले के अभ्यर्थियों के मेडिकल के लिए अलग से सात डॉक्टरों का पैनल है। पैनल में शामिल नेत्र रोत्र विशेषज्ञ का कहना है कि औसतन सात से आठ प्रतिशत अभ्यर्थी नजर कमजोर होने के कारण भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।
विज्ञापन

यह है स्थिति
13 अप्रैल को सिपाही भर्ती में 98 में से नौ अभ्यर्थी नजर की कमजोरी के चलते बाहर हुए। 14 अप्रैल को 138 में से 11 अभ्यर्थी भी कमजोर नजर के कारण बाहर हुए। 15 अप्रैल को 148 में से पांच अभ्यार्थी जबकि 15 अप्रैल को एसआई भर्ती के मेडिकल में 75 में से 8 अभ्यर्थाी भी इसी वजह से बाहर हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

औसतन 20 से 28 साल उम्र के अभ्यार्थी
सिपाही अभ्यर्थी की उम्र भी औसतन 20 साल से लेकर 28 साल के बीच की है। जबकि भर्ती की तैयारी करने वाले अधिकांश अभ्यर्थी कंप्यूटर पर भी अधिक काम नहीं करते। यह भी सामने आया कि अधिकांश अभ्यर्थी ग्रामीण क्षेत्र से हैं, लेकिन इनके खानपान में कमी आई है। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जी के अलावा विटामिन ए, सी और ई की कमी से नजर कमजोर हो रही हैं। इसके अलावा दूध की गुणवत्ता भी पहले जैसी नहीं रहीं। डॉक्टरों का यह भी कहना है जो छात्र सात से आठ घंटे की पढ़ाई करते हैं उन्हें चश्मे की आवश्कता पड़ रही है।
ऐसे किया जाता है आई परीक्षण
नेत्र परीक्षण अधिकारी कहते हैं नियमावली के अनुसार ही परीक्षण किया जाता है। इस दौरान एक कुर्सी पर अभ्यर्थी को बैठाया जाता है। नेत्र रोत्र विशेषज्ञ अभ्यर्थी की आंख को बारीकी से और लाइट के माध्यम से देखते हैं। अभ्यर्थी की आंखों से छह मीटर की दूरी पर एक फ्लैग लगाया जाता है। इस फ्लैक्स पर काले रंग में अक्षर लिखे होते हैं। प्रत्येक लाइन में अक्षरों का साइज अलग अलग होता है। सबसे नीचे की लाइन में अक्षरों का साइज 6/6 होता है। इससे ऊपर की लाइन में अक्षरों का साइज मोटा होता ओर 6/9 का होता है। उससे और भी ऊपर की तरफ 6/12 होता है। अभ्यर्थी को सबसे पहले छोटे अक्षरों वाली लाइन के प्रत्येक अक्षर पढ़ने को कहा जाता है, प्रत्येक आंख से यदि 6/6 के अक्षर पढ़ दिए तो आंख सही है। यदि छोटे अक्षर नहीं पढ़ा, तो उससे मोटाई का अक्षर पढ़ने को कहा जाता है। यदि किसी भी एक आंख से 6/6 या दोनों आंखों से 6/9 का अक्षर भी पढ़ दिया तो नजर सही बताते हैं।

खानपान की कमी भी
पुलिस भर्ती प्रक्रिया में औसतन आठ प्रतिशत अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनकी नजर कमजोर हैं। पुरूष अभ्यर्थ्यों के साथ महिला अभ्यार्थी भी इनमें शामिल हैं। युवाओं में खानपान की कमी, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप के अलावा एलईडी लाइट या दूधिया रोशनी आंखों के लिए नुकसानदायक हैं। - डॉ विकास चौधरी, भर्ती प्रक्रिया के पैनल में शामिल नेत्र रोग विशेषज्ञ

युवाओं के लिए बड़ी समस्या
पुलिस भर्ती में अभ्यर्थी कदकाठी से मजबूत होते हैं। लिखित परीक्षा और दौड, लंबाई व नापतौल में पास होने के बाद मेरिट में आने के बाद मेडिकल किया जाता है। कमजोर नजर युवाओं के लिए समस्या हैं। पहले कोई छात्र ही मिलता था जिसे चश्मा लगाकार पढ़ाई करनी पड़ती थी, लेकिन आब 20 से 30 प्रतिशत छात्र चश्मा लगाते हैं। - संजीव देशवाल, भर्ती पैनल के सीओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed