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अंतरिम बजट को भगवा रंग में रंग गठबंधन से लडने की तैयारी
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अमर उजाला ब्यूरो
मवाना। लोकसभा चुनाव से पहले शुक्रवार को जारी अंतरिम बजट खादर क्षेत्र के 19 गांव के किसानों के लिए राहत लेकर आया है। लगभग हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलने के चलते आर्थिक संकट से जूझने वाले किसानों को बैंकों एवं समिति से लिया गया कर्ज भुखमरी की ओर धकेलता है। अंतरिम बजट में आपदा पीड़ित किसानों को ब्याज में पांच फीसदी छूट मिलने से किसानों को राहत मिलेगी। वहीं, तीन राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में किसानों, व्यापारियों एवं नौकरीपेशा लोगों को राहत देकर साधने का प्रयास किया है।
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बजट में आपदा पीड़ित किसानों के लिए कोई राहत नहीं थी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आए अंतरिम बजट में आपदा पीड़ित किसानों का सरकार ने ध्यान रखा। इस बजट में आपदा पीड़ित किसानों को ब्याज पर पांच प्रतिशत में छूट दी गई है। बता दें कि हर वर्ष खादर क्षेत्र के फतेहपुरप्रेम, भीकुंड, शिरजेपुर, गांवड़ी, बधवा, खेड़ी कलां, हरिपुर, परसापुर, हंसापुर आदि 19 गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते है। जिस कारण यहां हजारों हेक्टेयर धान व ज्वार की फसल नष्ट हो जाती हैं। इस बजट से यहां के किसानों को काफी राहत मिलने वाली है। वहीं विपक्ष के निशाने पर रही भाजपा ने लोकलुभावन अंतरिम बजट पेश किया है। गरीब तबके, पशुपालकों व किसानों को बजट में राहत दी गई है। केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकसभा चुनाव में महागठबंधन से मजबूती से लड़ने के लिए इस बजट को शस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने का मन बनाया है। हालांकि जीएसटी में कोई फेरबदल नहीं किया गया, जिस कारण बड़ा व्यापारी अब भी इस बजट से नाखुश दिखाई दे रहा है। नगर और आसपास के गांव के किसानों ने इस बजट की काफी सराहना की है। वहीं, सवर्णों को आर्थिक आधार पर दस प्रतिशत का आरक्षण व इसके बाद किसानों, मध्यम वर्ग के व्यापारी व सर्विस करने वाले लोगों को राहत देकर सरकार ने चुनावी पैंतरा चलकर महागठबंधन से लड़ने की तैयारी कर ली है।
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मवाना। लोकसभा चुनाव से पहले शुक्रवार को जारी अंतरिम बजट खादर क्षेत्र के 19 गांव के किसानों के लिए राहत लेकर आया है। लगभग हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलने के चलते आर्थिक संकट से जूझने वाले किसानों को बैंकों एवं समिति से लिया गया कर्ज भुखमरी की ओर धकेलता है। अंतरिम बजट में आपदा पीड़ित किसानों को ब्याज में पांच फीसदी छूट मिलने से किसानों को राहत मिलेगी। वहीं, तीन राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में किसानों, व्यापारियों एवं नौकरीपेशा लोगों को राहत देकर साधने का प्रयास किया है।
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बजट में आपदा पीड़ित किसानों के लिए कोई राहत नहीं थी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आए अंतरिम बजट में आपदा पीड़ित किसानों का सरकार ने ध्यान रखा। इस बजट में आपदा पीड़ित किसानों को ब्याज पर पांच प्रतिशत में छूट दी गई है। बता दें कि हर वर्ष खादर क्षेत्र के फतेहपुरप्रेम, भीकुंड, शिरजेपुर, गांवड़ी, बधवा, खेड़ी कलां, हरिपुर, परसापुर, हंसापुर आदि 19 गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते है। जिस कारण यहां हजारों हेक्टेयर धान व ज्वार की फसल नष्ट हो जाती हैं। इस बजट से यहां के किसानों को काफी राहत मिलने वाली है। वहीं विपक्ष के निशाने पर रही भाजपा ने लोकलुभावन अंतरिम बजट पेश किया है। गरीब तबके, पशुपालकों व किसानों को बजट में राहत दी गई है। केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकसभा चुनाव में महागठबंधन से मजबूती से लड़ने के लिए इस बजट को शस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने का मन बनाया है। हालांकि जीएसटी में कोई फेरबदल नहीं किया गया, जिस कारण बड़ा व्यापारी अब भी इस बजट से नाखुश दिखाई दे रहा है। नगर और आसपास के गांव के किसानों ने इस बजट की काफी सराहना की है। वहीं, सवर्णों को आर्थिक आधार पर दस प्रतिशत का आरक्षण व इसके बाद किसानों, मध्यम वर्ग के व्यापारी व सर्विस करने वाले लोगों को राहत देकर सरकार ने चुनावी पैंतरा चलकर महागठबंधन से लड़ने की तैयारी कर ली है।
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