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मन के बुरे विचारों की तरंगों को विलीन करना ही वास्तविक पूजा
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:59 AM IST
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शंकर का स्वरूप होते है गुरु: पैन्यूली
मेरठ। आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने कहा कि कंप्यूटर के इस युग में व्यक्ति के पास समय नहीं है। मन में उठने वाले बुरे विचारों की तरंगों को विलीन कर देना ही वास्तविक पूजन है। यह संदेश आचार्य मुनि ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सातवें दिन ब्रह्मपुरी स्थित जैनिस पैलेस सत्संग स्थल पर भक्तों को संबोधित करते हुए रखे। मुनि ने कहा कि वर्तमान में भगवान की प्रतिमा और मुनि नकली नहीं हैं नकल का अर्थ मूल लेख की प्रतिलिपि है और प्रतिलिपि हमेशा प्रमाणिक होती है। कथा व्यास आचार्य विनोद भाई पैन्यूली ने कहा कि गुरु स्वयं शंकर का स्वरूप है। ज्ञान हर व्यक्ति के पास अंतर आत्मा में व्याप्त है गुरु उस ज्ञान को प्रकट करने का काम करते है। इस मौके पर आचार्य गौरव किशोर, आचार्य पंकज पैन्यूली, स्वामी मुकेश पैन्यूली, कुंवर सिंह, सुनील जैन, सुधीर मित्तल व मुकेश वर्मा आदि मौजूद रहे। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
बाबा दीपचंद महाराज की शोभा यात्रा निकाली
मेरठ। बाबा दीपचंद महाराज की अंतिम शोभा यात्रा बुधवार को बैंडबाजों के साथ निकाली गई। एक रथ पर बाबा महाराज को बैठाया हुआ था। शोभा यात्रा में शामिल लोग पीले वस्त्र धारण किए हुए थे। शोभा यात्रा जैन नगर से प्रारंभ करके रेलवे रोड, घंटाघर, बच्चा पार्क से होते हुए सूरजकुंड पर संपन्न हुई। शोभा यात्रा में उप्र प्रदेश ही नहीं बल्कि पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि प्रांतों से भी दिगंबर समाज और श्वेतांबर समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। सूरजकुंड शमशान घाट पर महाराज जी के गृहस्थ जीवन के परिवार के लोगों ने उन्हें मुखाग्नि दी। सुनील जैन ने बताया कि ध्यान योग संथारा साधक तपस्वी बाबा दीपचंद महाराज ने 20 मार्च को निर्जल व्रत प्रारंभ कर 26 मार्च को संथारा व्रत ग्रहण किया था। पूर्ण आहुति दो अप्रैल को हुई। शोभा यात्रा में सुरेश जैन रितुराज, सुरेंद्र जैन, प्रमोद जैन, रंजीत जैन, शांति स्वरूप सतीश जैन, पारस जैन, सुनील जैन सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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मेरठ। आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने कहा कि कंप्यूटर के इस युग में व्यक्ति के पास समय नहीं है। मन में उठने वाले बुरे विचारों की तरंगों को विलीन कर देना ही वास्तविक पूजन है। यह संदेश आचार्य मुनि ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सातवें दिन ब्रह्मपुरी स्थित जैनिस पैलेस सत्संग स्थल पर भक्तों को संबोधित करते हुए रखे। मुनि ने कहा कि वर्तमान में भगवान की प्रतिमा और मुनि नकली नहीं हैं नकल का अर्थ मूल लेख की प्रतिलिपि है और प्रतिलिपि हमेशा प्रमाणिक होती है। कथा व्यास आचार्य विनोद भाई पैन्यूली ने कहा कि गुरु स्वयं शंकर का स्वरूप है। ज्ञान हर व्यक्ति के पास अंतर आत्मा में व्याप्त है गुरु उस ज्ञान को प्रकट करने का काम करते है। इस मौके पर आचार्य गौरव किशोर, आचार्य पंकज पैन्यूली, स्वामी मुकेश पैन्यूली, कुंवर सिंह, सुनील जैन, सुधीर मित्तल व मुकेश वर्मा आदि मौजूद रहे। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
बाबा दीपचंद महाराज की शोभा यात्रा निकाली
मेरठ। बाबा दीपचंद महाराज की अंतिम शोभा यात्रा बुधवार को बैंडबाजों के साथ निकाली गई। एक रथ पर बाबा महाराज को बैठाया हुआ था। शोभा यात्रा में शामिल लोग पीले वस्त्र धारण किए हुए थे। शोभा यात्रा जैन नगर से प्रारंभ करके रेलवे रोड, घंटाघर, बच्चा पार्क से होते हुए सूरजकुंड पर संपन्न हुई। शोभा यात्रा में उप्र प्रदेश ही नहीं बल्कि पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि प्रांतों से भी दिगंबर समाज और श्वेतांबर समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। सूरजकुंड शमशान घाट पर महाराज जी के गृहस्थ जीवन के परिवार के लोगों ने उन्हें मुखाग्नि दी। सुनील जैन ने बताया कि ध्यान योग संथारा साधक तपस्वी बाबा दीपचंद महाराज ने 20 मार्च को निर्जल व्रत प्रारंभ कर 26 मार्च को संथारा व्रत ग्रहण किया था। पूर्ण आहुति दो अप्रैल को हुई। शोभा यात्रा में सुरेश जैन रितुराज, सुरेंद्र जैन, प्रमोद जैन, रंजीत जैन, शांति स्वरूप सतीश जैन, पारस जैन, सुनील जैन सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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