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एमडीए खबर
Updated Sun, 31 Dec 2017 02:05 AM IST
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किसानों का छह जनवरी को योगी से मिलने का एलान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
एमडीए कार्यालय पर धरना दे रहे किसानों ने आरोप लगाया है कि एमडीए अधिकारियों की नीयत में खोट है। ऐसे में वे छह जनवरी को मोहिउद्दीनपुर मिल में आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी बात रखेंगे। अधिकारियों से वार्ता के विफल होने के बाद किसानों ने कहा कि चाहे जान भी चली जाए, धरना बिना मांग पूरी हुए समाप्त नहीं होगा।
दो साल पहले बोर्ड बैठक में एमडीए ने किसानों को अतिरिक्त प्रतिकर देने का प्रस्ताव पारित किया था। अभी तक उस पर अमल न होने से नाराज किसानों ने एमडीए पर धरना दे रखा है। सभी गेटों पर महिला किसानों ने कब्जा कर लिया और अधिकारियों का बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया। किसान रात को भी एमडीए में ही रहते हैं। उन्होंने कहा है जब तक किसानों को चेक नहीं दिए जाएंगे या टेबल पर बैठकर शासन से आई अनुमति को नहीं दिखाया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। एक महिला किसान पुष्पा देवी की हालत खराब है और उसका धरना स्थल पर ही उपचार चल रहा है।
किसानों के सवालों पर निरुत्तर हो गए अधिकारी
तीसरे दिन एमडीए अधिकारियों को किसानों की याद आई। वीसी साहब सिंह ने वार्ता केलिए उन्हें बुलाया। एमडीए सभागार में हुई वार्ता में किसानों केसवाल और तर्कों का एमडीए अधिकारी जवाब ही नहीं दे पाए। वीसी के पास बस एक ही जवाब था कि शासन को पत्र भेजा जा चुका है। व्हाट्सएप पर भी भेज दिया है। संघर्ष समिति के महामंत्री हरविंदर सिंह ने कहा कि बुलंदशहर के जिस प्रकरण में हाईकोर्ट के आदेश का बहाना बनाया जा रहा है उसकी एसआईटी जांच हो चुकी है। जांच में स्पष्ट कहा गया है कि मुआवजा वितरण में कोई घोटाला नहीं हुआ क्योंकि सारा पेमेंट आरटीजीएस से हुआ। यदि एमडीए अधिकारियों के पास कोई मुआवजा रोकने का आदेश है तो दिखाएं। एमडीए अधिकारी ऐसा कोई आदेश नहीं दिखा सके। किसानों ने साफ कर दिया कि यदि एमडीए अपने वायदे से मुकर रहा है तो अब किसान भी अपने वायदे से मुकरकर नई अधिग्रहण नीति से मुआवजे की मांग शुरू कर देंगे। धरना समाप्त नहीं होगा।
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विधायक को लेकर शासन में जाओ
वार्ता में एमडीए अधिकारियों ने गेंद राजनेताओं के पाले में डालने की कोशिश की। कहा कि विधायक को लेकर शासन में जाओ और वहां पैरवी करो। वीसी न कहा कि चाहो तो मैं भी चलूंगा। प्रमुख सचिव आवास को वह पत्र लिख चुके हैं। किसान इस पर भड़क गए। कहा कि वे शासन में क्यों जाएं? वे तो अपना धरना यही जारी रखेंगे। यह काम अधिकारियों का है। वार्ता में सचिव राजकुमार, तहसीलदार मनोज सिंह, एक्सईएन पीपी सिंह के अलावा जसवीर प्रधान, सत्यपाल सिंह, अनिल चौधरी, मंगत सिंह, मुस्तफा, रविंद्र दौरालिया, राहुल भड़ाना, विनोद गुर्जर आदि मौजूद रहे। धरने पर संतरपाल, किरनपाल, राजपाल सिंह, सतीश, जागेश्वरी देवी, सरस्वती, सीमा, सतीश आदि किसान मौजूद रहे।
आरआरएफ तैनात की
सुरक्षा के मद्देनजर एमडीए कार्यालय पर आरआरएफ (रैपिड रेस्पांस फोर्स) तैनात रही। यहां तक कि जिस समय वार्ता हुई उस समय भी एमडीए सभागार गेट पर पुलिस तैनात रही। चूंकि रात को भी महिला किसान धरना दे रही है तो भी सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की गई है।
किसानों को हमारा समर्थन
किसानों की मांग पूरी तरह से जायज है और किसान केपास धरना ही सबसे बड़ा हथियार है। अपने हक की लड़ाई के लिए किसान धरना दे रहे हैं। मेरा पूरा समर्थन इस धरने को है और जब किसान कहेेंगे भाकियू कार्यकर्ता इस धरने में शामिल हो जाएंगे। मैं खुद आ आऊंगा। - राकेश टिकैत, प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन
खास बात
एमडीए अधिकारियों के साथ वार्ता हुई विफल, तीन दिन से एमडीए पर धरना दे रहे हैं किसान
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
एमडीए कार्यालय पर धरना दे रहे किसानों ने आरोप लगाया है कि एमडीए अधिकारियों की नीयत में खोट है। ऐसे में वे छह जनवरी को मोहिउद्दीनपुर मिल में आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी बात रखेंगे। अधिकारियों से वार्ता के विफल होने के बाद किसानों ने कहा कि चाहे जान भी चली जाए, धरना बिना मांग पूरी हुए समाप्त नहीं होगा।
दो साल पहले बोर्ड बैठक में एमडीए ने किसानों को अतिरिक्त प्रतिकर देने का प्रस्ताव पारित किया था। अभी तक उस पर अमल न होने से नाराज किसानों ने एमडीए पर धरना दे रखा है। सभी गेटों पर महिला किसानों ने कब्जा कर लिया और अधिकारियों का बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया। किसान रात को भी एमडीए में ही रहते हैं। उन्होंने कहा है जब तक किसानों को चेक नहीं दिए जाएंगे या टेबल पर बैठकर शासन से आई अनुमति को नहीं दिखाया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। एक महिला किसान पुष्पा देवी की हालत खराब है और उसका धरना स्थल पर ही उपचार चल रहा है।
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किसानों के सवालों पर निरुत्तर हो गए अधिकारी
तीसरे दिन एमडीए अधिकारियों को किसानों की याद आई। वीसी साहब सिंह ने वार्ता केलिए उन्हें बुलाया। एमडीए सभागार में हुई वार्ता में किसानों केसवाल और तर्कों का एमडीए अधिकारी जवाब ही नहीं दे पाए। वीसी के पास बस एक ही जवाब था कि शासन को पत्र भेजा जा चुका है। व्हाट्सएप पर भी भेज दिया है। संघर्ष समिति के महामंत्री हरविंदर सिंह ने कहा कि बुलंदशहर के जिस प्रकरण में हाईकोर्ट के आदेश का बहाना बनाया जा रहा है उसकी एसआईटी जांच हो चुकी है। जांच में स्पष्ट कहा गया है कि मुआवजा वितरण में कोई घोटाला नहीं हुआ क्योंकि सारा पेमेंट आरटीजीएस से हुआ। यदि एमडीए अधिकारियों के पास कोई मुआवजा रोकने का आदेश है तो दिखाएं। एमडीए अधिकारी ऐसा कोई आदेश नहीं दिखा सके। किसानों ने साफ कर दिया कि यदि एमडीए अपने वायदे से मुकर रहा है तो अब किसान भी अपने वायदे से मुकरकर नई अधिग्रहण नीति से मुआवजे की मांग शुरू कर देंगे। धरना समाप्त नहीं होगा।
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विधायक को लेकर शासन में जाओ
वार्ता में एमडीए अधिकारियों ने गेंद राजनेताओं के पाले में डालने की कोशिश की। कहा कि विधायक को लेकर शासन में जाओ और वहां पैरवी करो। वीसी न कहा कि चाहो तो मैं भी चलूंगा। प्रमुख सचिव आवास को वह पत्र लिख चुके हैं। किसान इस पर भड़क गए। कहा कि वे शासन में क्यों जाएं? वे तो अपना धरना यही जारी रखेंगे। यह काम अधिकारियों का है। वार्ता में सचिव राजकुमार, तहसीलदार मनोज सिंह, एक्सईएन पीपी सिंह के अलावा जसवीर प्रधान, सत्यपाल सिंह, अनिल चौधरी, मंगत सिंह, मुस्तफा, रविंद्र दौरालिया, राहुल भड़ाना, विनोद गुर्जर आदि मौजूद रहे। धरने पर संतरपाल, किरनपाल, राजपाल सिंह, सतीश, जागेश्वरी देवी, सरस्वती, सीमा, सतीश आदि किसान मौजूद रहे।
आरआरएफ तैनात की
सुरक्षा के मद्देनजर एमडीए कार्यालय पर आरआरएफ (रैपिड रेस्पांस फोर्स) तैनात रही। यहां तक कि जिस समय वार्ता हुई उस समय भी एमडीए सभागार गेट पर पुलिस तैनात रही। चूंकि रात को भी महिला किसान धरना दे रही है तो भी सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की गई है।
किसानों को हमारा समर्थन
किसानों की मांग पूरी तरह से जायज है और किसान केपास धरना ही सबसे बड़ा हथियार है। अपने हक की लड़ाई के लिए किसान धरना दे रहे हैं। मेरा पूरा समर्थन इस धरने को है और जब किसान कहेेंगे भाकियू कार्यकर्ता इस धरने में शामिल हो जाएंगे। मैं खुद आ आऊंगा। - राकेश टिकैत, प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन
खास बात
एमडीए अधिकारियों के साथ वार्ता हुई विफल, तीन दिन से एमडीए पर धरना दे रहे हैं किसान