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रजिस्ट्रार के फर्जी वैरीफिकेशन पर कनाडा से मांगा जवाब
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सीसीएसयू में मार्कशीट के फर्जी वेरिफिकेशन का खेल
कनाडा से जांच के लिए आई मार्कशीट पर निकले रजिस्ट्रार के फर्जी हस्ताक्षर, जांच शुरू
विदेश में पढ़ने जाने वाले छात्र-छात्राओं का डब्ल्यूईएस कराती है वेरिफिकेशन
मेरठ। सीसीएसयू में फर्जीवाड़े का खेल बढ़ता जा रहा है। फर्जी मार्कशीट तो पहले भी पकड़ी जाती रही हैं, लेकिन अब मार्कशीट का फर्जी वेरिफिकेशन भी हो रहा है। कनाडा से जांच के लिए ऐसी मार्कशीट आई, जिस पर रजिस्ट्रार के ही फर्जी हस्ताक्षर थे। मामला खुलने पर सीसीएसयू में हड़कंप मच गया है। पहले से ही अपनी साख बचाने की कोशिशों में लगी सीसीएसयू के लिए ये एक बड़ा झटका है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई है। कैंपस में दलालों के नेटवर्क पर जांच को फोकस किया गया है।
छात्रों को अगर विदेश में पढ़ाई करने जाना होता है, तो उन्हें संबंधित देश के कॉलेज या विश्वविद्यालय में ऑनलाइन फार्म भरना होता है। आवेदन के बाद रेफरेंस आईडी मिलती है, जिसके बाद एक फॉर्म डाउनलोड करना पड़ता है। इस फॉर्म के साथ छात्र-छात्राएं अपनी मार्कशीट, डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट आदि लगाते हैं, जिसके बाद वह प्रमाण पत्रों को अपनी यूनिवर्सिटी में जाकर प्रमाणित कराते हैं। फिर सीसीएसयू कैंपस के डाकघर से या डीएचएल और फीडेक्स कोरियर कंपनी द्वारा इसे स्पीड पोस्ट किया जाता है। इसके बाद विदेश के कॉलेज-यूनिवर्सिटी वर्ल्ड एजूकेशन सर्विसेज की तरफ से इसका वेरिफिकेशन कराते हैं। डब्ल्यूईएस की तरफ से यूनिवर्सिटी के विजिलेंस विभाग में ऑनलाइन वेरिफिकेशन कराया जाता है। इसके बाद यहां से ओके रिपोर्ट लगने पर ही छात्र-छात्रा को एडमिशन की अनुमति मिलती है। डब्लूईएस की तरफ से रोजाना पांच से दस वेरिफिकेशन कराए जाते हैं। लेकिन अब इस काम में भी दलाल घुस गए हैं। बीडीएस की एक छात्रा द्वारा कनाडा में आवेदन किए जाने पर डब्ल्यूईएस ने यूनिवर्सिटी में उसके प्रमाण पत्रों की जांच कराई। सामने आया कि प्रमाण पत्रों पर जो हस्ताक्षर हैं, वह रजिस्ट्रार के नहीं हैं।
हर महीने पकड़ी जाती हैं 15-20 फर्जी मार्कशीट
यूनिवर्सिटी में तमाम यूनिवर्सिटी, प्राइवेट कंपनी और सरकारी विभागों से मार्कशीट और डिग्री जांच के लिए आती हैं। इनकी संख्या हर महीने 500 से 1000 तक होती है। इनमें से 15-20 मार्कशीट-डिग्री फर्जी पकड़ी जाती हैं। सीसीएसयू के नाम पर फर्जी मार्कशीट के मामले पहले भी पकड़े जा चुके हैं। महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रही हरमनप्रीत कौर के नाम से बनी सीसीएसयू की डिग्री भी फर्जी पाई गई थी। इसके अलावा तमाम मामले फर्जी मार्कशीट के पकड़े जा रहे हैं।
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एक प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन में 300 रुपये फीस
एक प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन में 300 रुपये फीस ली जाती है। कैंपस में दलाल सक्रिय हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि कहीं बीडीएस की यह छात्रा दलालों का शिकार तो नहीं बन गई। दरअसल, कुछ जगहों पर बाहर भी प्रमाण पत्र बेचे जाने के आरोप छात्र लगाते रहे हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि कहीं किसी ने पैसे लेकर फर्जी रिपोर्ट तो लगाकर नहीं भेज दी।
ऑनलाइन भी हो रहा फर्जीवाड़ा
कई फर्जी कंपनियां ऑनलाइन भी छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्रों का वेरिफिकेशन कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रही हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी की जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे खेल के पीछे किसका हाथ है।
छात्रा द्वारा शिकायत किए जाने की सूचना
इस मामले में छात्रा द्वारा रजिस्ट्रार ऑफिस में शिकायत किए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि छात्रा ने अपनी मार्कशीट को सही बताते हुए दलालों द्वारा ठगे जाने की शिकायत की है। यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इतने संगीन मामले में भी विवि के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
मामला गंभीर, जांच कराएंगे
शुक्रवार को दफ्तर में छात्रा के प्रार्थना पत्र की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। यह गंभीर मामला है। इसमें कौन लिप्त हैं, इसके बारे में पता लगाकर कार्रवाई करेंगे।
- वीपी कौशल, कार्यवाहक रजिस्ट्रार सीसीएसयू
कनाडा से जांच के लिए आई मार्कशीट पर निकले रजिस्ट्रार के फर्जी हस्ताक्षर, जांच शुरू
विदेश में पढ़ने जाने वाले छात्र-छात्राओं का डब्ल्यूईएस कराती है वेरिफिकेशन
मेरठ। सीसीएसयू में फर्जीवाड़े का खेल बढ़ता जा रहा है। फर्जी मार्कशीट तो पहले भी पकड़ी जाती रही हैं, लेकिन अब मार्कशीट का फर्जी वेरिफिकेशन भी हो रहा है। कनाडा से जांच के लिए ऐसी मार्कशीट आई, जिस पर रजिस्ट्रार के ही फर्जी हस्ताक्षर थे। मामला खुलने पर सीसीएसयू में हड़कंप मच गया है। पहले से ही अपनी साख बचाने की कोशिशों में लगी सीसीएसयू के लिए ये एक बड़ा झटका है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई है। कैंपस में दलालों के नेटवर्क पर जांच को फोकस किया गया है।
छात्रों को अगर विदेश में पढ़ाई करने जाना होता है, तो उन्हें संबंधित देश के कॉलेज या विश्वविद्यालय में ऑनलाइन फार्म भरना होता है। आवेदन के बाद रेफरेंस आईडी मिलती है, जिसके बाद एक फॉर्म डाउनलोड करना पड़ता है। इस फॉर्म के साथ छात्र-छात्राएं अपनी मार्कशीट, डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट आदि लगाते हैं, जिसके बाद वह प्रमाण पत्रों को अपनी यूनिवर्सिटी में जाकर प्रमाणित कराते हैं। फिर सीसीएसयू कैंपस के डाकघर से या डीएचएल और फीडेक्स कोरियर कंपनी द्वारा इसे स्पीड पोस्ट किया जाता है। इसके बाद विदेश के कॉलेज-यूनिवर्सिटी वर्ल्ड एजूकेशन सर्विसेज की तरफ से इसका वेरिफिकेशन कराते हैं। डब्ल्यूईएस की तरफ से यूनिवर्सिटी के विजिलेंस विभाग में ऑनलाइन वेरिफिकेशन कराया जाता है। इसके बाद यहां से ओके रिपोर्ट लगने पर ही छात्र-छात्रा को एडमिशन की अनुमति मिलती है। डब्लूईएस की तरफ से रोजाना पांच से दस वेरिफिकेशन कराए जाते हैं। लेकिन अब इस काम में भी दलाल घुस गए हैं। बीडीएस की एक छात्रा द्वारा कनाडा में आवेदन किए जाने पर डब्ल्यूईएस ने यूनिवर्सिटी में उसके प्रमाण पत्रों की जांच कराई। सामने आया कि प्रमाण पत्रों पर जो हस्ताक्षर हैं, वह रजिस्ट्रार के नहीं हैं।
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हर महीने पकड़ी जाती हैं 15-20 फर्जी मार्कशीट
यूनिवर्सिटी में तमाम यूनिवर्सिटी, प्राइवेट कंपनी और सरकारी विभागों से मार्कशीट और डिग्री जांच के लिए आती हैं। इनकी संख्या हर महीने 500 से 1000 तक होती है। इनमें से 15-20 मार्कशीट-डिग्री फर्जी पकड़ी जाती हैं। सीसीएसयू के नाम पर फर्जी मार्कशीट के मामले पहले भी पकड़े जा चुके हैं। महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रही हरमनप्रीत कौर के नाम से बनी सीसीएसयू की डिग्री भी फर्जी पाई गई थी। इसके अलावा तमाम मामले फर्जी मार्कशीट के पकड़े जा रहे हैं।
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एक प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन में 300 रुपये फीस
एक प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन में 300 रुपये फीस ली जाती है। कैंपस में दलाल सक्रिय हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि कहीं बीडीएस की यह छात्रा दलालों का शिकार तो नहीं बन गई। दरअसल, कुछ जगहों पर बाहर भी प्रमाण पत्र बेचे जाने के आरोप छात्र लगाते रहे हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि कहीं किसी ने पैसे लेकर फर्जी रिपोर्ट तो लगाकर नहीं भेज दी।
ऑनलाइन भी हो रहा फर्जीवाड़ा
कई फर्जी कंपनियां ऑनलाइन भी छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्रों का वेरिफिकेशन कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रही हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी की जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे खेल के पीछे किसका हाथ है।
छात्रा द्वारा शिकायत किए जाने की सूचना
इस मामले में छात्रा द्वारा रजिस्ट्रार ऑफिस में शिकायत किए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि छात्रा ने अपनी मार्कशीट को सही बताते हुए दलालों द्वारा ठगे जाने की शिकायत की है। यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इतने संगीन मामले में भी विवि के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
मामला गंभीर, जांच कराएंगे
शुक्रवार को दफ्तर में छात्रा के प्रार्थना पत्र की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। यह गंभीर मामला है। इसमें कौन लिप्त हैं, इसके बारे में पता लगाकर कार्रवाई करेंगे।
- वीपी कौशल, कार्यवाहक रजिस्ट्रार सीसीएसयू