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मुक्ताकाश ने साझा कराया कला का आसमान
Updated Sat, 21 Jul 2018 02:52 AM IST
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मेरठ। शहर के युवाओं को रंगकर्म में निपुण बनाने की जिम्मेदारी शहर की नाट्य संस्था मुक्ताकाश निभा रही है।
वर्ष 1964 में सुरेंद्र कौशिक द्वारा मेरठ में मुक्ताकाश नाट्य संस्था की स्थापना की गई। सामाजिक कुरीतियों पर नाटकों के माध्यम से चाबुक चलाने के उद्देश्य से शुरू हुई इस नाट्य संस्था ने शहर के युवा कलाकारों की कला को एक मुक्त गगन दिया। जहां रंगकर्म में रुचि रखने वाले युवाओं को अभिनय की बारीकियां सीखने का अवसर मिला। साथ ही युवा रंगकर्मियों क ी प्रतिभा का नया मंच मिला। तब से संस्था लगातार शहर में सजीव रंगकर्म की ज्योति जलाए है। संस्था अब तक हजारों नाटक ों का मंचन कर चुकी है।
संस्था के निदेशक व संस्थापक सुरेंद्र कौशिक को 1988 में राज्यपाल द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। साथ ही किशोर कुमार कला सम्मान, रत्न अवार्ड, चतुरंग अवार्ड, फिदा हुसैन नरसी अवार्ड, अप्टा द्वारा नाट्य शिरोमणि लाइफ टाइम सम्मान 2012, संस्कार गौरव सम्मान, इप्टा द्वारा भीष्म साहनी सम्मान 2015 से सम्मानित हो चुके हैं। बिरजू महाराज से मेरठ गौरव सम्मान भी मिल चुका है।
हर रविवार होता है नाटक मंचन
मुक्ताकाश यानी खुला आकाश, ओपन थिएटर। 1964 में कलाकारों के श्रमदान से मुक्ताकाश की स्थापना एनएसडी से पास आउट सुरेंद्र कौशिक द्वारा की गई। स्थापना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को नाट्य कला, साहित्य व तकनीक के माध्यम से समाज के सामने लाना था। हर रविवार संस्था द्वारा नाटकों का मंचन होता।
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संस्था द्वारा इन नाटकों का हुआ मंचन
शहंशाह इडिपस, पंच परमेश्वर, कांचन रंग, मृच्छकीटकम, कंजूस, रजनी गंधा, ताजमहल का टेंडर, चरनदास चोर, बिच्छू, दीवार में एक खिड़की रहती थी, आषाढ़ का एक दिन, जलछवि, त्रिशंकु, आजादी की मशाल, हिंदुस्तान हमारा सहित सैकड़ों नाटकों का मंचन हुआ है। पंच परमेश्वर नाटक का सबसे ज्यादा मंचन संस्था द्वारा किया गया है। इसके लिए संस्था को रुड़की विवि में सम्मानित भी किया गया। साथ ही बेटी का ब्याह, नया सवेरा, सफल पत्नी आदि नाटकों का मंचन व नुक्कड़ नाटकों का मंचन भी संस्था कर चुकी है।
कई सम्मानों का मिला साथ
संस्था को समय-समय पर विभिन्न समारोहों में सम्मानित भी किया जा चुका है। नेशनल लॉ सर्विस अथॉरिटी द्वारा दिल्ल्ी में महिला दिवस पर सम्मान मिला। संस्था ने स्वयं बाढ़ सहायता कोष व सांप्रदायिक दंगों के वक्त सौहार्द बनाए रखने के लिए भी नाटक मंचित किए हैं।
खास बातें:
54 साल से युवाओं को नाट्य कला में निपुण बना रही नाट्य संस्था मुक्ताकाश
सांप्रदायिक दंगों के दौरान नाटक के माध्यम से दिया सौहार्द बनाए रखने का संदेश
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वर्ष 1964 में सुरेंद्र कौशिक द्वारा मेरठ में मुक्ताकाश नाट्य संस्था की स्थापना की गई। सामाजिक कुरीतियों पर नाटकों के माध्यम से चाबुक चलाने के उद्देश्य से शुरू हुई इस नाट्य संस्था ने शहर के युवा कलाकारों की कला को एक मुक्त गगन दिया। जहां रंगकर्म में रुचि रखने वाले युवाओं को अभिनय की बारीकियां सीखने का अवसर मिला। साथ ही युवा रंगकर्मियों क ी प्रतिभा का नया मंच मिला। तब से संस्था लगातार शहर में सजीव रंगकर्म की ज्योति जलाए है। संस्था अब तक हजारों नाटक ों का मंचन कर चुकी है।
संस्था के निदेशक व संस्थापक सुरेंद्र कौशिक को 1988 में राज्यपाल द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। साथ ही किशोर कुमार कला सम्मान, रत्न अवार्ड, चतुरंग अवार्ड, फिदा हुसैन नरसी अवार्ड, अप्टा द्वारा नाट्य शिरोमणि लाइफ टाइम सम्मान 2012, संस्कार गौरव सम्मान, इप्टा द्वारा भीष्म साहनी सम्मान 2015 से सम्मानित हो चुके हैं। बिरजू महाराज से मेरठ गौरव सम्मान भी मिल चुका है।
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हर रविवार होता है नाटक मंचन
मुक्ताकाश यानी खुला आकाश, ओपन थिएटर। 1964 में कलाकारों के श्रमदान से मुक्ताकाश की स्थापना एनएसडी से पास आउट सुरेंद्र कौशिक द्वारा की गई। स्थापना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को नाट्य कला, साहित्य व तकनीक के माध्यम से समाज के सामने लाना था। हर रविवार संस्था द्वारा नाटकों का मंचन होता।
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संस्था द्वारा इन नाटकों का हुआ मंचन
शहंशाह इडिपस, पंच परमेश्वर, कांचन रंग, मृच्छकीटकम, कंजूस, रजनी गंधा, ताजमहल का टेंडर, चरनदास चोर, बिच्छू, दीवार में एक खिड़की रहती थी, आषाढ़ का एक दिन, जलछवि, त्रिशंकु, आजादी की मशाल, हिंदुस्तान हमारा सहित सैकड़ों नाटकों का मंचन हुआ है। पंच परमेश्वर नाटक का सबसे ज्यादा मंचन संस्था द्वारा किया गया है। इसके लिए संस्था को रुड़की विवि में सम्मानित भी किया गया। साथ ही बेटी का ब्याह, नया सवेरा, सफल पत्नी आदि नाटकों का मंचन व नुक्कड़ नाटकों का मंचन भी संस्था कर चुकी है।
कई सम्मानों का मिला साथ
संस्था को समय-समय पर विभिन्न समारोहों में सम्मानित भी किया जा चुका है। नेशनल लॉ सर्विस अथॉरिटी द्वारा दिल्ल्ी में महिला दिवस पर सम्मान मिला। संस्था ने स्वयं बाढ़ सहायता कोष व सांप्रदायिक दंगों के वक्त सौहार्द बनाए रखने के लिए भी नाटक मंचित किए हैं।
खास बातें:
54 साल से युवाओं को नाट्य कला में निपुण बना रही नाट्य संस्था मुक्ताकाश
सांप्रदायिक दंगों के दौरान नाटक के माध्यम से दिया सौहार्द बनाए रखने का संदेश