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एचआईवी पीड़ित भी जी सकते हैं सामान्य जीवन
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:58 AM IST
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आईआईएमटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग में हुआ सेमिनार
एआरटी सेंटर चल रहा है एड्स जागरूकता अभियान
मेरठ। मेडिकल कॉलेज स्थितएआरटी सेंटर के एड्स जागरूकता अभियान के अंतर्गत बुधवार को मवाना रोड स्थित आईआईएमटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मेरठ के वरिष्ठ समाजसेवी सुनील दत्त, मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर के नोडल ऑफिसर तुंगवीर सिंह आर्य, एआरटी काउंसलर गौरी गुप्ता, रेजिडेंट मेडिसिन डॉ. अर्पिता कठेरिया, प्रिंसिपल कॉलेज ऑफ नर्सिंग आशा यादव ने एचआईवी-एड्स पर चर्चा की।
एआरटी काउंसलर गौरी गुप्ता ने बताया कि यदि किसी को एचआईवी-एड्स के लक्षण हों तो उसे अपना एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए। टेस्ट से पहले और बाद में दोनों समय विशेष काउिंसलिंग या सहयोग की आवश्यकता होती है। टेस्ट करने से पहले रोगी को विश्वास में लेकर उसका पूरा इतिहास पूछा जाता है और टेस्ट के बाद यदि वह एचआईवी पॉजिटिव पाया जाता है तो उसको विश्वास दिलाया जाता है कि यदि वह दवाएं खाएगा तो उसकी समस्या काफी कुछ कम हो जाएगी और उसका जीवन लगभग सामान्य रूप से चलता रहेगा, लेकिन शर्त यह है कि वह लगातार आजीवन दवाएं खाता रहे।
डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने कहा कि यदि हम अपने जीवन साथी के प्रति समर्पित और वफादार नहीं हैं तो दूसरों से वफादारी की उम्मीद करना बेकार है। उन्होंने कहा कि जितने अधिक स्त्री, पुरुषों के शारीरिक संबंध होंगे उतना ही उनमें एचआईवी, एड्स होने की आशंका बढ़ती जाएगी। उन्होंने उपस्थित सभी ढाई सौ छात्र-छात्राओं को वफादारी, ईमानदारी, समर्पण और नैतिकता की एड्स शपथ दिलाई। सुनील दत्त ने मेडिकल कॉलेज मेरठ के एआरटी सेंटर के सहयोग से पिछले 12 वर्ष से चलाए जा रहे एड्स जागरूकता अभियान के बारे में बताया। मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर अर्पिता कठेरिया ने एचआईवी और एड्स में क्या अंतर है, वायरस शरीर में घुसने के बाद किन-किन अंगों पर विशेष प्रभाव डालता है, आदि के बारे में बताया। प्रधानाचार्य आशा यादव ने कहा कि चारित्रिक दृढ़ता और ईमानदारी से एचआईवी एड्स जैसी भयंकर बीमारी से बच सकते हैं। स्वयं बच सकते हैं और अपने परिवार समाज और विश्व को भी एड्स से मुक्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में कॉलेज की अध्यापिकाएं नीतू मलिक, अमृता, कनिका, कविता शर्मा, कुमारी निधि, आंचल, पल्लवी, रुबीना, अंजू, शैली, रवि, संदीप, फिरोज खान, नितिन और रिजवान मौजूद रहे।
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एआरटी सेंटर चल रहा है एड्स जागरूकता अभियान
मेरठ। मेडिकल कॉलेज स्थितएआरटी सेंटर के एड्स जागरूकता अभियान के अंतर्गत बुधवार को मवाना रोड स्थित आईआईएमटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मेरठ के वरिष्ठ समाजसेवी सुनील दत्त, मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर के नोडल ऑफिसर तुंगवीर सिंह आर्य, एआरटी काउंसलर गौरी गुप्ता, रेजिडेंट मेडिसिन डॉ. अर्पिता कठेरिया, प्रिंसिपल कॉलेज ऑफ नर्सिंग आशा यादव ने एचआईवी-एड्स पर चर्चा की।
एआरटी काउंसलर गौरी गुप्ता ने बताया कि यदि किसी को एचआईवी-एड्स के लक्षण हों तो उसे अपना एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए। टेस्ट से पहले और बाद में दोनों समय विशेष काउिंसलिंग या सहयोग की आवश्यकता होती है। टेस्ट करने से पहले रोगी को विश्वास में लेकर उसका पूरा इतिहास पूछा जाता है और टेस्ट के बाद यदि वह एचआईवी पॉजिटिव पाया जाता है तो उसको विश्वास दिलाया जाता है कि यदि वह दवाएं खाएगा तो उसकी समस्या काफी कुछ कम हो जाएगी और उसका जीवन लगभग सामान्य रूप से चलता रहेगा, लेकिन शर्त यह है कि वह लगातार आजीवन दवाएं खाता रहे।
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डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने कहा कि यदि हम अपने जीवन साथी के प्रति समर्पित और वफादार नहीं हैं तो दूसरों से वफादारी की उम्मीद करना बेकार है। उन्होंने कहा कि जितने अधिक स्त्री, पुरुषों के शारीरिक संबंध होंगे उतना ही उनमें एचआईवी, एड्स होने की आशंका बढ़ती जाएगी। उन्होंने उपस्थित सभी ढाई सौ छात्र-छात्राओं को वफादारी, ईमानदारी, समर्पण और नैतिकता की एड्स शपथ दिलाई। सुनील दत्त ने मेडिकल कॉलेज मेरठ के एआरटी सेंटर के सहयोग से पिछले 12 वर्ष से चलाए जा रहे एड्स जागरूकता अभियान के बारे में बताया। मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर अर्पिता कठेरिया ने एचआईवी और एड्स में क्या अंतर है, वायरस शरीर में घुसने के बाद किन-किन अंगों पर विशेष प्रभाव डालता है, आदि के बारे में बताया। प्रधानाचार्य आशा यादव ने कहा कि चारित्रिक दृढ़ता और ईमानदारी से एचआईवी एड्स जैसी भयंकर बीमारी से बच सकते हैं। स्वयं बच सकते हैं और अपने परिवार समाज और विश्व को भी एड्स से मुक्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में कॉलेज की अध्यापिकाएं नीतू मलिक, अमृता, कनिका, कविता शर्मा, कुमारी निधि, आंचल, पल्लवी, रुबीना, अंजू, शैली, रवि, संदीप, फिरोज खान, नितिन और रिजवान मौजूद रहे।
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