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खसरा नंबर 4632 बना प्रशासन के गले की फांस
Updated Mon, 27 Nov 2017 02:26 AM IST
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खसरा नंबर 4632 बना प्रशासन के गले की फांस
मेरठ।
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला प्रशासन के गले की फांस बन गया है। जमीन पर कब्जेदारों की रिट पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को ही मामले का नियमानुसार निस्तारण करने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरा पक्ष इस मामले में प्रशासन को कोर्ट की अवमानना में घसीट रहा है। जबकि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व इस जमीन को नजूल मानकर पीपीएक्ट के तहत वाद चलाने हेतु एसीएम के यहां फाइल ट्रांसफर करने के आदेश दे चुके हैं।
हापुड़ अड्डे पर खसरा नंबर 4632 में अवैध रूप से बनाये गये कांप्लेक्स का समाचार अमर उजाला में प्रकाशित हुआ था। इसकी जांच हुई तो कांप्लेक्स तो अवैध पाया ही गया, साथ ही तहसील सदर की रिपोर्ट में बताया गया कि यह जमीन नजूल की है और इस जमीन पर 93 अन्य कब्जेदार हैं। इसके बाद एमडीए ने अवैध रूप से बनाए गए कांप्लेक्स को ध्वस्त कर अपना काम पूरा कर दिया। वहीं तहसील की रिपोर्ट के आधार पर नजूल के नोडल प्रभारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने सभी कब्जेदारों को मालिकाना हक के साक्ष्य सहित जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी कर दिया।
इस नोटिस पर कुछ कब्जेदारों ने अपने जवाब दाखिल किये। जिस पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने पिछले दिनों इस जमीन को नजूल मानते हुए इसे पीपीएक्ट के तहत वाद योजित कर सुनवाई हेतु संबंधित क्षेत्र के एसीएम को फाइल ट्रांसफर कर दी।
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इन सबके बीच इस पूरे प्रकरण पर हो रही लेटलतीफी में समाजसेवी सचिन सैनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की। जिस पर हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को आदेश करते हुए दो सप्ताह में जिलाधिकारी और एमडीए को इस मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया। लेकिन जब मामला निस्तारित नहीं हुआ तो सचिन सैनी ने अवमानना का वाद दायर कर दिया। इस बीच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने इस मामले को पीपीएक्ट के तहत निस्तारित करने का आदेश कर दिया।
कब्जेदार पहुंचे आदेश के खिलाफ कोर्ट
पीपीएक्ट के तहत वाद दायर करने के आदेश के खिलाफ कब्जेदार हाईकोर्ट पहुंच गये। जहां पर कहा गया कि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने उन्हें सुना नहीं, जबकि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने 21 नवंबर को जिलाधिकारी द्वारा दो सप्ताह में मामले का निस्तारण करने के लिए नहीं बल्कि जिस अधिकारी ने नोटिस जारी किये हैं, वही अधिकारी इस मामले की नियमानुसार सुनवाई कर निस्तारित करेगा, यह आदेश जारी किया है। ऐसे में अब फिर से इस मामले की सुनवाई अपर जिलाधिकारी वित्त के यहां होगी।
खास बात
हाईकोर्ट के आदेश पर पीपी एक्ट का मामला अटका
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ही करेंगे सुनवाई
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मेरठ।
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला प्रशासन के गले की फांस बन गया है। जमीन पर कब्जेदारों की रिट पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को ही मामले का नियमानुसार निस्तारण करने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरा पक्ष इस मामले में प्रशासन को कोर्ट की अवमानना में घसीट रहा है। जबकि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व इस जमीन को नजूल मानकर पीपीएक्ट के तहत वाद चलाने हेतु एसीएम के यहां फाइल ट्रांसफर करने के आदेश दे चुके हैं।
हापुड़ अड्डे पर खसरा नंबर 4632 में अवैध रूप से बनाये गये कांप्लेक्स का समाचार अमर उजाला में प्रकाशित हुआ था। इसकी जांच हुई तो कांप्लेक्स तो अवैध पाया ही गया, साथ ही तहसील सदर की रिपोर्ट में बताया गया कि यह जमीन नजूल की है और इस जमीन पर 93 अन्य कब्जेदार हैं। इसके बाद एमडीए ने अवैध रूप से बनाए गए कांप्लेक्स को ध्वस्त कर अपना काम पूरा कर दिया। वहीं तहसील की रिपोर्ट के आधार पर नजूल के नोडल प्रभारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने सभी कब्जेदारों को मालिकाना हक के साक्ष्य सहित जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी कर दिया।
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इस नोटिस पर कुछ कब्जेदारों ने अपने जवाब दाखिल किये। जिस पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने पिछले दिनों इस जमीन को नजूल मानते हुए इसे पीपीएक्ट के तहत वाद योजित कर सुनवाई हेतु संबंधित क्षेत्र के एसीएम को फाइल ट्रांसफर कर दी।
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इन सबके बीच इस पूरे प्रकरण पर हो रही लेटलतीफी में समाजसेवी सचिन सैनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की। जिस पर हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को आदेश करते हुए दो सप्ताह में जिलाधिकारी और एमडीए को इस मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया। लेकिन जब मामला निस्तारित नहीं हुआ तो सचिन सैनी ने अवमानना का वाद दायर कर दिया। इस बीच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने इस मामले को पीपीएक्ट के तहत निस्तारित करने का आदेश कर दिया।
कब्जेदार पहुंचे आदेश के खिलाफ कोर्ट
पीपीएक्ट के तहत वाद दायर करने के आदेश के खिलाफ कब्जेदार हाईकोर्ट पहुंच गये। जहां पर कहा गया कि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने उन्हें सुना नहीं, जबकि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने 21 नवंबर को जिलाधिकारी द्वारा दो सप्ताह में मामले का निस्तारण करने के लिए नहीं बल्कि जिस अधिकारी ने नोटिस जारी किये हैं, वही अधिकारी इस मामले की नियमानुसार सुनवाई कर निस्तारित करेगा, यह आदेश जारी किया है। ऐसे में अब फिर से इस मामले की सुनवाई अपर जिलाधिकारी वित्त के यहां होगी।
खास बात
हाईकोर्ट के आदेश पर पीपी एक्ट का मामला अटका
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ही करेंगे सुनवाई