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जुगाड
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:52 AM IST
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चोरी का इंजन से तैयार हो रहे जुगाड़
मेरठ। शहर में दौड़ रहे जुगाड़ चोरी के इंजन और कबाड़ के सामान से तैयार किये जा रहे हैं। एक रेहडे़ को जुगाड़ का रूप देने के लिए आठ से दस हजार रुपये लगते हैं। जुगाड़ में लगाने के लिए इंजन सोतीगंज से लाया जाता है। इंजन के कोई कागज आदि किसी जुगाड़ चालके के पास नहीं है।
अमर उजाला ने अवैध जुगाड़ के खिलाफ अभियान शुरू किया हुआ है। पुलिस लंबे चौडे़ दावे करने के बाद दो चार जुगाड़ बंद करके औपचारिकता पूरी कर लेती है। चोरी के इंजन से चलने वाले जुगाड़ पर सख्ती से कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही, समझ से परे है। दिल्ली रोड़ पर नवीन मंडी में सैकड़ों की संख्या में जुगाड़ संचालित होते हैं। इससे दोगुने दिल्ली रोड और गढ़ रोड पर चलते हैं।
जानकार बताते हैं कि शहर में चोरी होने वाले दुपहिया वाहनों में से अधिकांश के इंजन इन्ही जुगाड़ में खपाये जा रहे हैं। एक जुगाड़ चलाने वाले युवक से बात की गई तो उसने बताया कि नया जुगाड़ बनाने में दस हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। सोतीगंज से चार हजार रुपये तक इंजन मिल जाता है, एक हजार रुपये तक कबाड़ियों के यहां से सामान और कुछ अन्य खर्च के साथ जुगाड़ तैयार कराया जाता है। बागपत रोड, सोतीगंज मार्केट और नवीन मंडी के पास कई मिस्त्री जुगाड़ तैयार कर रहे हैं।
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जुगाड़ के सामान से तैयार ये वाहन सड़क पर चलने वाले दूसरे चालकों के लिए कितना खतरनाक है, ये बात पुलिस अच्छी तरह जानती है, लेकिन किसके दबाव में कार्रवाई बंद कर दी जाती है, ये पुलिस अधिकारी ही बेहतर जानते हैं। ओवरलोड जुगाड़ कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। इनके कारण जाम की स्थिति तो बनती ही है, नियमों की धज्जियां भी खूब उड़ रही हैं।
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मेरठ। शहर में दौड़ रहे जुगाड़ चोरी के इंजन और कबाड़ के सामान से तैयार किये जा रहे हैं। एक रेहडे़ को जुगाड़ का रूप देने के लिए आठ से दस हजार रुपये लगते हैं। जुगाड़ में लगाने के लिए इंजन सोतीगंज से लाया जाता है। इंजन के कोई कागज आदि किसी जुगाड़ चालके के पास नहीं है।
अमर उजाला ने अवैध जुगाड़ के खिलाफ अभियान शुरू किया हुआ है। पुलिस लंबे चौडे़ दावे करने के बाद दो चार जुगाड़ बंद करके औपचारिकता पूरी कर लेती है। चोरी के इंजन से चलने वाले जुगाड़ पर सख्ती से कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही, समझ से परे है। दिल्ली रोड़ पर नवीन मंडी में सैकड़ों की संख्या में जुगाड़ संचालित होते हैं। इससे दोगुने दिल्ली रोड और गढ़ रोड पर चलते हैं।
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जानकार बताते हैं कि शहर में चोरी होने वाले दुपहिया वाहनों में से अधिकांश के इंजन इन्ही जुगाड़ में खपाये जा रहे हैं। एक जुगाड़ चलाने वाले युवक से बात की गई तो उसने बताया कि नया जुगाड़ बनाने में दस हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। सोतीगंज से चार हजार रुपये तक इंजन मिल जाता है, एक हजार रुपये तक कबाड़ियों के यहां से सामान और कुछ अन्य खर्च के साथ जुगाड़ तैयार कराया जाता है। बागपत रोड, सोतीगंज मार्केट और नवीन मंडी के पास कई मिस्त्री जुगाड़ तैयार कर रहे हैं।
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जुगाड़ के सामान से तैयार ये वाहन सड़क पर चलने वाले दूसरे चालकों के लिए कितना खतरनाक है, ये बात पुलिस अच्छी तरह जानती है, लेकिन किसके दबाव में कार्रवाई बंद कर दी जाती है, ये पुलिस अधिकारी ही बेहतर जानते हैं। ओवरलोड जुगाड़ कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। इनके कारण जाम की स्थिति तो बनती ही है, नियमों की धज्जियां भी खूब उड़ रही हैं।