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सच संस् था
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:47 AM IST
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मेरठ। मीट फैक्ट्री की जमीन के मामले में एडीएम सिटी मुकेश चंद्र ने पूर्व सांसद शाहिद अखलाक को क्लीन चिट दे दी है। रिपोर्ट के अनुसार अभिलेखों को देखते हुए स्पष्ट है कि पहले सोसायटी ने प्लॉट्स आवंटित किए थे एवं एक भूखंड को पिकप का ऋण वापस न करने के कारण नीलाम किया गया था। शेष खसरे सोसायटी ने लीज पर दिए हैं।
इस पर सच संस्था के संस्थापक संदीप पहल ने पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया है कि फर्जी जांच रिपोर्ट अधिकारियों ने तैयार की है। मीट फैक्ट्री हैंडलूम कांप्लेक्स की जमीन पर अवैध रूप से खड़ी की गई है। किसानों से भू अर्जन कर यह जमीन हैंडलूम इस्टेट लिमिटेड को कांप्लेक्स के लिए दी गई थी। फर्जीवाड़ा कर 55 बीघा इस जमीन को 40 साल से कब्जाया हुआ है। इससे सरकार को करीब 40 करोड़ रुपये की हानि होगी।
शाहिद अखलाक का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। आरोप लगाने से पहले कम से कम यह तो सोच लें कि इसकी जांच कितनी बार हो चुकी है। मैंने यह जमीन पिकप से नीलामी में ली है। वर्ष 2007 में तत्कालीन जिलाधिकारी, 2013 में तथा वर्तमान में फिर से इस पर जांच हो चुकी हैं। सारी रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि फैक्ट्री नियमानुसार खरीदी गई जमीन पर बनी है।
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इस पर सच संस्था के संस्थापक संदीप पहल ने पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया है कि फर्जी जांच रिपोर्ट अधिकारियों ने तैयार की है। मीट फैक्ट्री हैंडलूम कांप्लेक्स की जमीन पर अवैध रूप से खड़ी की गई है। किसानों से भू अर्जन कर यह जमीन हैंडलूम इस्टेट लिमिटेड को कांप्लेक्स के लिए दी गई थी। फर्जीवाड़ा कर 55 बीघा इस जमीन को 40 साल से कब्जाया हुआ है। इससे सरकार को करीब 40 करोड़ रुपये की हानि होगी।
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शाहिद अखलाक का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। आरोप लगाने से पहले कम से कम यह तो सोच लें कि इसकी जांच कितनी बार हो चुकी है। मैंने यह जमीन पिकप से नीलामी में ली है। वर्ष 2007 में तत्कालीन जिलाधिकारी, 2013 में तथा वर्तमान में फिर से इस पर जांच हो चुकी हैं। सारी रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि फैक्ट्री नियमानुसार खरीदी गई जमीन पर बनी है।
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