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मोदी की रैली में भीड़ जुटाना होगा चुनौती-Meerut
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मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ में दो बार जनसभा कर चुके हैं और दोनों बार भीड़ अच्छी रही थी। लेकिन इस बार भीड़ जुटाना बड़ी चुनौती होगा। इस बार रैली दो लोकसभा क्षेत्रों के स्तर पर की जा रही है। इसमें 3.50 लाख की भीड़ का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन माहौल और कार्यकर्ताओं की उदासीनता को देखते हुए इस लक्ष्य के आसपास भी जाना बड़ी चुनौती होगा।
नरेंद्र मोदी की पहली रैली 2 फरवरी 2014 को हुई थी। यह रैली उस समय की गई थी जब भाजपा ने अपने प्रत्याशी भी घोषित नहीं किए थे। यह रैली पश्चिमी क्षेत्र के सहारनपुर और मेरठ मंडल के जनपदों की थी। ऐसे में सभी 10 लोकसभा सीटों के दावेदार अपने दावे को मजबूत करने के लिए इस रैली में भीड़ लेकर पहुंचे थे, जो ऐतिहासिक हुई थी। दूसरी रैली 4 फरवरी 2017 में विधानसभा चुनाव को लेकर हुई थी और इस रैली के समय भी प्रत्याशी घोषित नहीं हुए थे। दावेदार अपने साथ भारी भीड़ लेकर पहुंचे थे।
लेकिन इस बार प्रत्याशी पहले ही घोषित हो चुके हैं, तो प्रत्याशियों के जिम्मे ही भीड़ का ज्यादा भार रहेगा। ऊपर से टिकट वितरण को लेकर पैदा हुआ असंतोष भी रैली की भीड़ को कहीं न कहीं प्रभावित करेगा। भाजपा नेतृत्व रैली में भीड़ लाने के लिए मुजफ्फरनगर और मेरठ लोकसभा सीट के सभी भाजपा विधायकों के साथ ही हस्तिनापुर और सिवालखास विधायक पर भीड़ जुटाने का दबाव दे रहे हैं। साथ ही जिला और महानगर अध्यक्षों के माध्यम से सभी मोर्चा व प्रकोष्ठ के मंडल स्तर तक के पदाधिकारियों को भीड़ का लक्ष्य दिया जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं में है उदासीनता
भाजपा में मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर कहीं न कहीं टिकट वितरण के बाद कार्यकर्ताओं में उदासीनता नजर आ रही है। यह उदासीनता मोदी की रैली में भीड़ जुटा पाएगी, इसे लेकर संदेह है। क्योंकि अब विधायक भी रैली में भीड़ लाने के लिए ज्यादा उत्साहित और दबाव बनाते नजर नहीं आएंगे, ऐसा पार्टी सूत्रों का कहना है। जिसे लेकर नेतृत्व चिंता में है।
भीड़ को देखते हुए बदला रैली स्थल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित राष्ट्रोदय स्थल पर प्रस्तावित थी। लेकिन शनिवार को मुजफ्फरनगर लोकसभा को भी रैली से जोड़ते हुए रैली स्थल एनएच-58 पर सिवाया टोल प्लाजा के पास कर दिया गया। इसके पीछे मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान का दबाव बताया जा रहा है। लेकिन सूत्रों की मानें तो मेरठ से भीड़ को लेकर नेतृत्व भी चिंता में था, ऐसे में मुजफ्फरनगर लोकसभा को रैली से जोड़ने के बाद भाजपा के पश्चिमी नेतृत्व का मानना है कि मुजफ्फरनगर क्षेत्र से भीड़ ज्यादा आएगी।
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नरेंद्र मोदी की पहली रैली 2 फरवरी 2014 को हुई थी। यह रैली उस समय की गई थी जब भाजपा ने अपने प्रत्याशी भी घोषित नहीं किए थे। यह रैली पश्चिमी क्षेत्र के सहारनपुर और मेरठ मंडल के जनपदों की थी। ऐसे में सभी 10 लोकसभा सीटों के दावेदार अपने दावे को मजबूत करने के लिए इस रैली में भीड़ लेकर पहुंचे थे, जो ऐतिहासिक हुई थी। दूसरी रैली 4 फरवरी 2017 में विधानसभा चुनाव को लेकर हुई थी और इस रैली के समय भी प्रत्याशी घोषित नहीं हुए थे। दावेदार अपने साथ भारी भीड़ लेकर पहुंचे थे।
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लेकिन इस बार प्रत्याशी पहले ही घोषित हो चुके हैं, तो प्रत्याशियों के जिम्मे ही भीड़ का ज्यादा भार रहेगा। ऊपर से टिकट वितरण को लेकर पैदा हुआ असंतोष भी रैली की भीड़ को कहीं न कहीं प्रभावित करेगा। भाजपा नेतृत्व रैली में भीड़ लाने के लिए मुजफ्फरनगर और मेरठ लोकसभा सीट के सभी भाजपा विधायकों के साथ ही हस्तिनापुर और सिवालखास विधायक पर भीड़ जुटाने का दबाव दे रहे हैं। साथ ही जिला और महानगर अध्यक्षों के माध्यम से सभी मोर्चा व प्रकोष्ठ के मंडल स्तर तक के पदाधिकारियों को भीड़ का लक्ष्य दिया जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं में है उदासीनता
भाजपा में मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर कहीं न कहीं टिकट वितरण के बाद कार्यकर्ताओं में उदासीनता नजर आ रही है। यह उदासीनता मोदी की रैली में भीड़ जुटा पाएगी, इसे लेकर संदेह है। क्योंकि अब विधायक भी रैली में भीड़ लाने के लिए ज्यादा उत्साहित और दबाव बनाते नजर नहीं आएंगे, ऐसा पार्टी सूत्रों का कहना है। जिसे लेकर नेतृत्व चिंता में है।
भीड़ को देखते हुए बदला रैली स्थल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित राष्ट्रोदय स्थल पर प्रस्तावित थी। लेकिन शनिवार को मुजफ्फरनगर लोकसभा को भी रैली से जोड़ते हुए रैली स्थल एनएच-58 पर सिवाया टोल प्लाजा के पास कर दिया गया। इसके पीछे मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान का दबाव बताया जा रहा है। लेकिन सूत्रों की मानें तो मेरठ से भीड़ को लेकर नेतृत्व भी चिंता में था, ऐसे में मुजफ्फरनगर लोकसभा को रैली से जोड़ने के बाद भाजपा के पश्चिमी नेतृत्व का मानना है कि मुजफ्फरनगर क्षेत्र से भीड़ ज्यादा आएगी।