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100 नमूने लिए, ढाई लाख के खाद्य पदार्थ कराए नष्ट
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100 sample swetts
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100 नमूने लिए, ढाई लाख के खाद्य पदार्थ कराए नष्ट
मेरठ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने दीपावली पर लिए नमूने की रिपोर्ट शासन को भेजी दी है। इस दौरान खाद्य पदार्थों के करीब 100 नमूने लिए गए और ढाई लाख से ज्यादा के खाद्य पदार्थ नष्ट कराए। इसके अलावा दो लाख से ज्यादा कीमत की खाद्य सामग्री सीज की गई थी।
इससे साफ है कि दीपावली पर मिलावट का ‘खेल’ खूब खेला गया। सैंपलों को जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एफएसडीए ने इस दौरान 249 किलो मिल्क पाउडर और 74 किलो घी जब्त किया था। 20 किलो बर्फी और पांच किलो रसगुल्ला नष्ट कराया था। 124 किलो सोया टोफू सीज किया था। इसके अलावा 60 किलोग्राम खाद्य पदार्थ (44 किलोग्राम दूध पाउडर, 13 किलो तेल और तीन किलो रंग) सीज किया था। 292 किलोग्राम अपमिश्रित खाद्य पदार्थ (260 किलोग्राम चीनी का सड़ा घोल, छह किलो बंगाली रसगुल्ला, 20 किलो बेसन के लड्डू, 5 किलो बर्फी और एक किलो रंगी मूंगफली) नष्ट की थी।
आजीवन कारावास तक की है सजा
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाएंगे, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलेगा। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के साथ ही तीन लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
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खाद्य पदार्थ बनाने के ये हैं नियम
- खाद्य सामग्री खुले में न रखें।
- शुद्ध पानी का इस्तेमाल करें।
- संक्रामक रोग से ग्रसित कर्मचारी को खाद्य निर्माण प्रतिष्ठान में न रखें।
- बर्तन साफ और धुले हुए हों।
- बासी खाद्य सामग्री का प्रयोग न करें।
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बीमार होने का रहता है खतरा
फिजिशियन डॉ. विश्वजीत बैंबी ने बताया कि गंदगी में बन रहे खाद्य पदार्थ खाने से बीमार होने का खतरा बना रहता है। सबसे ज्यादा पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बदहजमी आदि शिकायतें हो सकती हैं। मिलावटी पदार्थ का लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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मेरठ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने दीपावली पर लिए नमूने की रिपोर्ट शासन को भेजी दी है। इस दौरान खाद्य पदार्थों के करीब 100 नमूने लिए गए और ढाई लाख से ज्यादा के खाद्य पदार्थ नष्ट कराए। इसके अलावा दो लाख से ज्यादा कीमत की खाद्य सामग्री सीज की गई थी।
इससे साफ है कि दीपावली पर मिलावट का ‘खेल’ खूब खेला गया। सैंपलों को जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एफएसडीए ने इस दौरान 249 किलो मिल्क पाउडर और 74 किलो घी जब्त किया था। 20 किलो बर्फी और पांच किलो रसगुल्ला नष्ट कराया था। 124 किलो सोया टोफू सीज किया था। इसके अलावा 60 किलोग्राम खाद्य पदार्थ (44 किलोग्राम दूध पाउडर, 13 किलो तेल और तीन किलो रंग) सीज किया था। 292 किलोग्राम अपमिश्रित खाद्य पदार्थ (260 किलोग्राम चीनी का सड़ा घोल, छह किलो बंगाली रसगुल्ला, 20 किलो बेसन के लड्डू, 5 किलो बर्फी और एक किलो रंगी मूंगफली) नष्ट की थी।
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आजीवन कारावास तक की है सजा
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाएंगे, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलेगा। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के साथ ही तीन लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
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खाद्य पदार्थ बनाने के ये हैं नियम
- खाद्य सामग्री खुले में न रखें।
- शुद्ध पानी का इस्तेमाल करें।
- संक्रामक रोग से ग्रसित कर्मचारी को खाद्य निर्माण प्रतिष्ठान में न रखें।
- बर्तन साफ और धुले हुए हों।
- बासी खाद्य सामग्री का प्रयोग न करें।
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बीमार होने का रहता है खतरा
फिजिशियन डॉ. विश्वजीत बैंबी ने बताया कि गंदगी में बन रहे खाद्य पदार्थ खाने से बीमार होने का खतरा बना रहता है। सबसे ज्यादा पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बदहजमी आदि शिकायतें हो सकती हैं। मिलावटी पदार्थ का लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।