{"_id":"595207104f1c1bfe728b49d6","slug":"100-days-of-yogi-sarkar-showing-some-effect-in-the-city","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मेरठ: योगी सरकार के 100 दिन : क्रांतिधरा में कुछ दिखा असर, थोड़ी रह गई कसर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरठ: योगी सरकार के 100 दिन : क्रांतिधरा में कुछ दिखा असर, थोड़ी रह गई कसर
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:02 PM IST
विज्ञापन
सड़कों की हालत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का बस दावा
सरकार ने धन दिया नहीं और फरमान जारी कर दिया सभी सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने का। सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने के लिए पीडब्लूडी, आवास विकास, नगर निगम, जल निगम विभागों को जिम्मेदारी दी गई। क्योंकि ये विभाग ही अधिकतर सड़कें बनवाने का कार्य कर रहे हैं।
धन के अभाव में गड्ढा मुक्त नहीं हो सकीं जनपद की सभी सड़कें
पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के अधिकारियों के मुताबिक जनपद के ब्लॉक खरखौदा, जानी, मेरठ, माछरा, परीक्षितगढ़, मवाना में पीडब्लूडी की 450 सड़कें हैं। जिनमें से 376 सड़कों को गडढ़ा मुक्त किया गया है। बाकी 74 सड़कों में से 36 सड़कों का चयन विशेष मरम्मत और 38 सड़कों का चयन नवीनीकरण के लिए किया गया है। इन 74 सड़कों को बनाने के लिए शासन से अभी तक पीडब्लूडी को मात्र 20 प्रतिशत धनराशि मिली है। हालांकि गडढ़ा मुक्त की गई 376 सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने पर 116 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया है। इसके अलावा दौराला ब्लॉक, रजपुरा, हस्तिनापुर ब्लॉक में भी कुछ सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने का दावा किया जा रहा है।
हटा जरूर, लेकिन फिर हुआ अतिक्रमण
सरकार ने भले ही जिला प्रशासन को शहर की सड़कें और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिए हों, लेकिन उन पर कोई खास तवज्जो नहीं दी जा रही है। सरकार बनने के बाद 15 दिन तक महानगर में जरूर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला। अतिक्रमण हटाया भी गया। लेकिन उसके बाद किसी भी विभाग के आला अधिकारी ने अतिक्रमण को वापस मुड़कर देखने का प्रयास नहीं किया। यही कारण है कि शहर की सड़कें अतिक्रमण और जाम की चपेट में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार ने धन दिया नहीं और फरमान जारी कर दिया सभी सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने का। सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने के लिए पीडब्लूडी, आवास विकास, नगर निगम, जल निगम विभागों को जिम्मेदारी दी गई। क्योंकि ये विभाग ही अधिकतर सड़कें बनवाने का कार्य कर रहे हैं।
धन के अभाव में गड्ढा मुक्त नहीं हो सकीं जनपद की सभी सड़कें
पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के अधिकारियों के मुताबिक जनपद के ब्लॉक खरखौदा, जानी, मेरठ, माछरा, परीक्षितगढ़, मवाना में पीडब्लूडी की 450 सड़कें हैं। जिनमें से 376 सड़कों को गडढ़ा मुक्त किया गया है। बाकी 74 सड़कों में से 36 सड़कों का चयन विशेष मरम्मत और 38 सड़कों का चयन नवीनीकरण के लिए किया गया है। इन 74 सड़कों को बनाने के लिए शासन से अभी तक पीडब्लूडी को मात्र 20 प्रतिशत धनराशि मिली है। हालांकि गडढ़ा मुक्त की गई 376 सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने पर 116 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया है। इसके अलावा दौराला ब्लॉक, रजपुरा, हस्तिनापुर ब्लॉक में भी कुछ सड़कों को गडढ़ा मुक्त करने का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन
हटा जरूर, लेकिन फिर हुआ अतिक्रमण
सरकार ने भले ही जिला प्रशासन को शहर की सड़कें और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिए हों, लेकिन उन पर कोई खास तवज्जो नहीं दी जा रही है। सरकार बनने के बाद 15 दिन तक महानगर में जरूर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला। अतिक्रमण हटाया भी गया। लेकिन उसके बाद किसी भी विभाग के आला अधिकारी ने अतिक्रमण को वापस मुड़कर देखने का प्रयास नहीं किया। यही कारण है कि शहर की सड़कें अतिक्रमण और जाम की चपेट में हैं।
विज्ञापन
लाखों खर्च, फिर भी शहर में नहीं सफाई
शहर की सफाई व्यवस्था
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार के लाखों रुपये और 14वें वित्त आयोग, निगम फंड से करोड़ों रुपये सफाई पर खर्च हो रहे हैं। लेकिन शहर का नाम गंदे शहरों में ही शुमार है। शहर के नाले हो या फिर सड़कें, सभी जगह सफाई नहीं है। निगम प्रशासन सरकार की मंशा के अनुरूप सरकारी योजनाएं लागू करने में भी कामयाब नहीं हो रहा है। ताजा उदाहरण डस्टबिन वितरण और डोर टू डोर कूड़ा व्यवस्था लागू न होना है। शहर में पूरी तरह शौचालय तक नहीं बनवाए जा सके हैं। शहर में लगभग 30 हजार मकान ऐसे हैं जिनमें शौचालय ही नहीं हैं।
खनन पर नहीं हुई उचित कार्रवाई, बढ़ गई उगाही
सीएम योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के साथ ही प्रदेश में अवैध खनन रोकने के निर्देश दिये थे। खनन को लेकर एनजीटी के आदेश भी पूरी तरह स्पष्ट हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की सख्ती को हथियार बनाकर सरकारी अमले ने खनन नहीं रोका, बल्कि खनन पर होने वाली उगाही के रेट बढ़ा दिये। खनन की सूचना पर भी कार्रवाई तो दूर निरीक्षण तक करना गवारा नहीं करते हैं। मेरठ में गंगा नदी से रेत के साथ ही मुख्य रूप से मिट्टी खनन का अवैध धंधा होता है। नियमानुसार सरकारी विकास कार्यों के मिट्टी खनन की स्वीकृति है। लेकिन निजी कॉलोनियों और निजी कामों के लिए धड़ल्ले से खुलेआम खनन हो रहा है। मेरठ में रुड़की रोड और मवाना रोड के बीच का जंगल मिट्टी खनन का सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अलावा परीक्षितगढ़ मार्ग, गढ़ मार्ग और हापुड़ मार्ग के साथ परतापुर क्षेत्र, सरधना और जानी क्षेत्र में भी मिट्टी खनन धड़ल्ले से होता है। रात गहराने के साथ ही खनन माफिया जेसीबी मशीनों से खनन कर डंफर में मिट्टी भरकर ढोना शुरू कर देते हैं। यह सब खनन विभाग, राजस्व और पुलिस की सांठगांठ से होता है। सपा सरकार में मिट्टी के एक डंफर पर 1500 हजार और ट्राली पर 400 सौ रुपये तीनों विभागों की संयुक्त उगाही होती थी। लेकिन योगी सरकार में डंफर पर दो हजार से ढाई हजार और ट्राली पर एक हजार से 1500 रुपये का रेट है।
इंडस्ट्री के पक्ष में सरकार, नहीं काटी मिलों की आरसी
सत्ता से बाहर रहने पर भाजपा सपा सरकार पर शुगर इंडस्ट्री के साथ मिली होने का आरोप लगाती थी। भाजपा नेता कहते थे कि जो मिल पैसा नहीं दे रहे तो उनकी आरसी कटनी चाहिए। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने तो विधानसभा में यहां तक कह दिया था कि सरकार अगर मिल के लाला को जेल भेज दे तो उसकी पत्नी बकाया भुगतान लेकर तुरंत पहुंच जाएगी। लेकिन सरकार आते ही सब दावे हवा हो गए।
खनन पर नहीं हुई उचित कार्रवाई, बढ़ गई उगाही
सीएम योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के साथ ही प्रदेश में अवैध खनन रोकने के निर्देश दिये थे। खनन को लेकर एनजीटी के आदेश भी पूरी तरह स्पष्ट हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की सख्ती को हथियार बनाकर सरकारी अमले ने खनन नहीं रोका, बल्कि खनन पर होने वाली उगाही के रेट बढ़ा दिये। खनन की सूचना पर भी कार्रवाई तो दूर निरीक्षण तक करना गवारा नहीं करते हैं। मेरठ में गंगा नदी से रेत के साथ ही मुख्य रूप से मिट्टी खनन का अवैध धंधा होता है। नियमानुसार सरकारी विकास कार्यों के मिट्टी खनन की स्वीकृति है। लेकिन निजी कॉलोनियों और निजी कामों के लिए धड़ल्ले से खुलेआम खनन हो रहा है। मेरठ में रुड़की रोड और मवाना रोड के बीच का जंगल मिट्टी खनन का सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अलावा परीक्षितगढ़ मार्ग, गढ़ मार्ग और हापुड़ मार्ग के साथ परतापुर क्षेत्र, सरधना और जानी क्षेत्र में भी मिट्टी खनन धड़ल्ले से होता है। रात गहराने के साथ ही खनन माफिया जेसीबी मशीनों से खनन कर डंफर में मिट्टी भरकर ढोना शुरू कर देते हैं। यह सब खनन विभाग, राजस्व और पुलिस की सांठगांठ से होता है। सपा सरकार में मिट्टी के एक डंफर पर 1500 हजार और ट्राली पर 400 सौ रुपये तीनों विभागों की संयुक्त उगाही होती थी। लेकिन योगी सरकार में डंफर पर दो हजार से ढाई हजार और ट्राली पर एक हजार से 1500 रुपये का रेट है।
इंडस्ट्री के पक्ष में सरकार, नहीं काटी मिलों की आरसी
सत्ता से बाहर रहने पर भाजपा सपा सरकार पर शुगर इंडस्ट्री के साथ मिली होने का आरोप लगाती थी। भाजपा नेता कहते थे कि जो मिल पैसा नहीं दे रहे तो उनकी आरसी कटनी चाहिए। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने तो विधानसभा में यहां तक कह दिया था कि सरकार अगर मिल के लाला को जेल भेज दे तो उसकी पत्नी बकाया भुगतान लेकर तुरंत पहुंच जाएगी। लेकिन सरकार आते ही सब दावे हवा हो गए।
बैठकों में ही गुजर गई एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की कार्रवाई
cm yogi
सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त और भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में थी। इन 100 दिनों के भीतर इस पर विशेष रूप से फोकस करते हुए कार्रवाई होनी थी, लेकिन मेरठ प्रशासन ने 100 दिन सिर्फ बैठकों में ही गुजार दिए। मेरठ में सरकारी जमीन का शहर से लेकर देहात तक बड़ा क्षेत्रफल है। इसमें से अधिकांश भूमि पर कब्जे भी हो चुके हैं। शहरी क्षेत्र में कब्जों की स्थिति ज्यादा गंभीर है। नगर निगम, राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई आदि तमाम विभाग ऐसे हैं, जिनकी जमीनों पर शहरी क्षेत्र में कब्जे हैं। इनमें राजस्व विभाग की तो चारागाह, नजूल आदि की तमाम जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं। निगम की जमीन और संपत्ति पर ज्यादा कब्जे हैं। भूमाफिया इन पर कॉलोनी, व्यावसायिक कांप्लेक्स, अस्पताल, कॉलेज आदि बना चुके हैं। ऐसी ही स्थिति देहात में है। देहात की जमीन पर कई कब्जेदारों में कई तो ऐसे हैं, जिन्होंने कई सौ बीघा जमीनें कब्जाई हुईं है। जिन पर कार्रवाई नहीं हुई।
कुछ दिन चलने के बाद बंद हो गया अभियान
मेरठ। प्रदेश में योगी सरकार के आते ही अपराध आंकड़ों में घटे तो पुलिस अभियानों में व्यस्त रही। एंटी रोमियो अभियान कुछ दिन चलकर बंद हो गया। चौकियों, थानों से लेकर पुलिस लाइन में सिपाही से लेकर एसएसपी ने झाड़ू लगाई। जनता में विश्वास जगाने के लिए एडीजी जोन बाजारों में घूमे तो सोतीगंज और लिसाड़ी गेट इलाका खंगाला गया। ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए योजनाएं बनीं जिनका धरातल पर आने का इंतजार है। एसएसपी जे. रविंदर गौड का दावा है कि लोगों की शिकायतें गंभीरता से सुनी जा रही हैं। वे खुद सुबह नौ बजे अपने ऑफिस पहुंच जाते हैं। तीन साल के तुलनात्मक आंकड़ों में इस साल एक जनवरी से 15 जून तक अपराधों में कमी दर्ज की गई है।
कुछ दिन चलने के बाद बंद हो गया अभियान
मेरठ। प्रदेश में योगी सरकार के आते ही अपराध आंकड़ों में घटे तो पुलिस अभियानों में व्यस्त रही। एंटी रोमियो अभियान कुछ दिन चलकर बंद हो गया। चौकियों, थानों से लेकर पुलिस लाइन में सिपाही से लेकर एसएसपी ने झाड़ू लगाई। जनता में विश्वास जगाने के लिए एडीजी जोन बाजारों में घूमे तो सोतीगंज और लिसाड़ी गेट इलाका खंगाला गया। ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए योजनाएं बनीं जिनका धरातल पर आने का इंतजार है। एसएसपी जे. रविंदर गौड का दावा है कि लोगों की शिकायतें गंभीरता से सुनी जा रही हैं। वे खुद सुबह नौ बजे अपने ऑफिस पहुंच जाते हैं। तीन साल के तुलनात्मक आंकड़ों में इस साल एक जनवरी से 15 जून तक अपराधों में कमी दर्ज की गई है।
गन्ना भुगतान का वादा नहीं निभाया
चीनी मिल
योगी सरकार किसानों को गन्ना आपूर्ति के बाद 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान कराने के वादे को नहीं निभा सकी। गन्ना पेराई खत्म हुए दो महीने हो गए हैं, लेकिन अभी भी प्रदेश की शुगर मिलों पर किसानों का करीब 2900 करोड़ रुपया दबा हुआ है। जिसमें वेस्ट यूपी के दो प्रमुख गन्ना मंडल मेरठ और सहारनपुर के किसानों का करीब 1500 करोड़ रुपये हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले गन्ना किसानों को अपनी तरफ करने के लिए गन्ना आपूर्ति के बाद 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान कराने का न केवल वादा किया था, बल्कि अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र 2017 में भी शामिल किया था। चुनावी सभाओं में पीएम मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और सीएम योगी तक ने मंचों से पुरजोर वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के बाद कुछ नहीं बदल सका है। सपा सरकार में किसानों को खून के आंसू रुलाने वाली शुगर मिलें इस सरकार में भी किसानों के हक पर कुंडली मारकर बैठी है। प्रदेश के गन्ना अवशेष पर नजर डालें तो करीब 2900 करोड़ रुपया बकाया है। वहीं मेरठ मंडल की मिलों पर करीब 1000 करोड़ और सहारनपुर मंडल की मिलों पर करीब 500 करोड़ रुपया बकाया है।
इंतजार में बढ़ रहा किसानों का कर्ज
सरकार ने किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। दो महीने तक तो बैंक गाइड लाइन का ही इंतजार करते रहे। किसानों को नोटिस और रिकवरी तहसीलों में भेजे जाते रहे। कर्ज माफी का लाभ पांच एकड जोत वाले किसानों को ही मिलना है। जिले के करीब 2.40 लाख किसान इसके दायरे में आते हैं। इन पर करीब 2210 करोड़ रुपया बैंकों का फसली लोन है। सरकार ने मार्च में कर्ज माफी की घोषणा की थी, इसके बाद ही किसानों ने बैंकों के कर्ज की किश्त भी जमा करानी बंद कर दी थी। किसान कर्ज माफी के लिए बैंकों के चक्कर काटते रहे और बैंक गाइड लाइन ना मिलने की बात कहते रहे। मई के आखिरी सप्ताह में इस संबंध में गाइड लाइन जारी हुई। जिसके बाद बैंकों में पात्रों के चयन का काम शुरू हुआ। तीन महीने बाद भी किसान को कर्ज माफी का लाभ नहीं मिला। उधर, बैंकों ने पहले की तरह किसानों को नोटिस और रिकवरी भेजना जारी रखा।
इंतजार में बढ़ रहा किसानों का कर्ज
सरकार ने किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। दो महीने तक तो बैंक गाइड लाइन का ही इंतजार करते रहे। किसानों को नोटिस और रिकवरी तहसीलों में भेजे जाते रहे। कर्ज माफी का लाभ पांच एकड जोत वाले किसानों को ही मिलना है। जिले के करीब 2.40 लाख किसान इसके दायरे में आते हैं। इन पर करीब 2210 करोड़ रुपया बैंकों का फसली लोन है। सरकार ने मार्च में कर्ज माफी की घोषणा की थी, इसके बाद ही किसानों ने बैंकों के कर्ज की किश्त भी जमा करानी बंद कर दी थी। किसान कर्ज माफी के लिए बैंकों के चक्कर काटते रहे और बैंक गाइड लाइन ना मिलने की बात कहते रहे। मई के आखिरी सप्ताह में इस संबंध में गाइड लाइन जारी हुई। जिसके बाद बैंकों में पात्रों के चयन का काम शुरू हुआ। तीन महीने बाद भी किसान को कर्ज माफी का लाभ नहीं मिला। उधर, बैंकों ने पहले की तरह किसानों को नोटिस और रिकवरी भेजना जारी रखा।
अवैध कमेलों पर चला सरकार का डंडा
अवैध कमेलों पर हुई कार्रवाई
अवैध रूप से चल रहे कमेलों के खिलाफ लेकर सरकार ने सख्ती दिखाई। मेरठ में 60 अधिकारियों की टीम ने भारी पुलिस बल, पीएसी तथा दंगा नियंत्रण वाहन के साथ नौ फैक्ट्रियों में कार्रवाई की। सभी जगह भारी अनियमितताएं मिलीं, जिस पर इन सभी को सील कर दिया दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एमडीए, अग्निशमन, पशुपालन विभाग, खाद्य सुरक्षा, पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने हापुड़ रोड स्थित अलीपुर जिजमाना तथा आसपास की फैक्ट्रियों में एक साथ छापे मारे। कहीं मुर्गीदाना बनाने के नाम पर पशु कटान हो रहा था तो कहीं कच्चा माल लाने का कोई एग्रीमेंट नहीं था। कई स्लाटर हाउस तो ऐसे मिले जिनके पास किसी भी विभाग की एनओसी नहीं थी। ऐसे में इन सब पर सील लगा दी गई। दरअसल सरकार ने अपनी मंशा पहले ही साफ कर दी थी कि अवैध रूप से पशु कटान नहीं होगा। जैसे ही भाजपा सरकार सत्तासीन हुई और योगी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, कई जगह कटान रुक गया। इन नौ फैक्ट्रियों पर अभी तक भी सील लगी है। कुछ एमडीए में मानचित्र स्वीकृत कराने की कवायद में लगे हैं। छोटी दुकानों को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है कि जिसके पास नगर निगम से लाइसेंस होगा वहीं मीट बेच सकेगा।
पशु कटान बंद, गली मोहल्लों में नहीं रुका
योगी सरकार के फरमान का असर पशु कटान की फैक्ट्रियों पर तो अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन शहर की गली मोहल्लों में पशुओं का कटान 10 दिन बंद रहने के बाद फिर से चालू हो गया है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की गलियों में पशुओं का खून बहता है। पशुओं के खून और अवशेष से ओडियन नाला सहित काफी नाले दूषित हो रहे हैं। बगैर लाइसेंस के ही शहर में मीट विक्रेताओं ने दुकानें खोली हुई हैं। नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस सरकार के आदेश को नजर अंदाज करे बैठे हैं। सरकार के आदेश की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इतना जरूर है कि हापुड़ रोड़ पर अधिकतर मीट कंपनियों में पशुओं का कटान बंद है।
पशु कटान बंद, गली मोहल्लों में नहीं रुका
योगी सरकार के फरमान का असर पशु कटान की फैक्ट्रियों पर तो अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन शहर की गली मोहल्लों में पशुओं का कटान 10 दिन बंद रहने के बाद फिर से चालू हो गया है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की गलियों में पशुओं का खून बहता है। पशुओं के खून और अवशेष से ओडियन नाला सहित काफी नाले दूषित हो रहे हैं। बगैर लाइसेंस के ही शहर में मीट विक्रेताओं ने दुकानें खोली हुई हैं। नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस सरकार के आदेश को नजर अंदाज करे बैठे हैं। सरकार के आदेश की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इतना जरूर है कि हापुड़ रोड़ पर अधिकतर मीट कंपनियों में पशुओं का कटान बंद है।
ओटी होंगी मॉड्यूलर, बनेगी नई बिल्डिंग
अस्पताल
उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के सौ दिन पूरे होने वाले हैं। इस दौरान सरकार का मेरठ की स्वास्थ्य सेवाओं पर खास फोकस रहा है। मुख्यमंत्री खुद मेरठ आए और मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी का निरीक्षण किया। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया और पुरानी बिल्डिंग की जगह नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव मांगा है। इस दौरान मेडिकल की कॉलेज की ओटी के उच्चीकरण के लिए 4.39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया बीमारी के लिए अलग से वार्ड बनाए जाने के लिए करीब 76 लाख रुपये रिलीज किए गए हैं। मेडिसिन आदि के लिए भी करीब एक करोड़ रुपये जारी किए गए थे। बायोमेट्रिक हाजिरी के लिए मशीन दी गई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। साथ ही मेडिकल कॉलेज के बजट का प्रस्ताव मांगा गया है, जिसके जुलाई में पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, जिला अस्पताल में डेंगू और मलेरिया की जांच के लिए सेंटिनल लैब बनाए जाने क ेलिए किट उपलब्ध कराई गई हैै। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी का इलाज की विधिवत शुरुआत इसी महीने हुई है, हालांकि इसका संचालन फरवरी से हो रहा था। दोनों ही सरकारी अस्पतालों से नई योजनाओं का प्रस्ताव मांगा गया है, जो तैयार किया जा रहा है।
समय पर दफ्तरों में बैठने लगे सरकारी हाकिम
image
योगी सरकार में यदि कुछ बेहतर नजर आया तो वह सरकारी दफ्तरों का हाल। जहां पर अधिकारी और कर्मचारी समय पर दफ्तरों में बैठे नजर आते हैं। योगी सरकार से पहले सभी सरकारी दफ्तरों के खुलने का समय सुबह 10 बजे से था। लेकिन अफसरों का दफ्तरों में बैठने का कोई तय समय नहीं था। मनमर्जी से अधिकारी दफ्तरों में बैठते और निकलते थे। ऐसेे में तमाम फरियादी और मुलाकाती परेशान घूमते थे। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल दफ्तरों के खुलने का समय सुबह 9 बजे से तय किया, बल्कि सभी को समय पर आने की सख्त हिदायत भी दे डाली। इसके लिए शासन स्तर के साथ ही मंत्रियों को भी उपस्थिति चेक करने का जिम्मा दे दिया। मुख्यमंत्री के भय से पुलिस प्रशासन के साथ ही तमाम सरकारी विभागों के अधिकारी सुबह 9 बजे दफ्तर पहुंच रहे हैं और जनता से मुलाकात कर रहे हैं। अधिकारियों के समय पर दफ्तर पहुंचने के कारण उनके अधिनस्थ अधिकारी और कर्मचारी भी समय पर अपनी सीटों पर बैठकर काम निपटाते नजर आते हैं। इसके अलावा सभी विभागों में बायोमेट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता के आदेश होने से विभागों में बायोमेेट्रिक मशीनें भी लगनी शुरू हो गई हैं, जिससे उपस्थिति में और ज्यादा सुधार आया है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/