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Mau News: योग सिखाने वाला केंद्र खुद नहीं साध पाया संतुलन, 8 साल में 6 बार बदला स्थान
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गुमनामी के बीच जिला अस्पताल में एक छोटे से कमरे में संचालित हो रहा योगा वेलनेस सेंटर। संवाद
आगामी 21 जून को विश्व योग दिवस है। इसे लेकर जिले में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं लेकिन जिले में योग के लिए बेहतर सुविधाएं न होने के कारण योग साधकों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल में 1 जून 2018 को बना योगा वेलनेस सेंटर स्वयं अव्यवस्था की स्थिति में है, ऐसे में यह दूसरों को स्वस्थ कैसे रखेगा? अव्यवस्था के चलते योगा वेलनेस सेंटर गुमनामी के बीच संचालित हो रहा है।
बीते आठ वर्षों में इस सेंटर का स्थान छह बार बदला गया, लेकिन हर बार इसका आकार घटता गया। वर्तमान में दो योग प्रशिक्षकों की तैनाती के बावजूद बमुश्किल दस से कम मरीज ही पहुंचते हैं। जबकि अस्पताल की ओपीडी 800 से अधिक है, इसमें 90 प्रतिशत मरीजों को योगा वेलनेस सेंटर की जानकारी तक नहीं है।
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विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि शासन द्वारा जो सुविधा उपलब्ध कराई गई है, उसी में योग को लेकर प्रयास जारी हैं। जिला अस्पताल में दस बेड की क्षमता वाला योगा वेलनेस सेंटर 2018 में शुरू किया गया था।
उस समय यह ब्लड बैंक के बगल स्थित बड़े कक्ष में संचालित किया गया, जहां वर्तमान में डायलिसिस यूनिट संचालित है। दो वर्ष बाद इस सेंटर को पोषण पुनर्वास केंद्र के पास एक छोटे कमरे में स्थानांतरित किया गया।
इसके बाद वर्ष 2022 में इसे ए और बी के रूप में विभाजित दो कमरों में संचालित किया गया। तीन माह बाद ही इसे बगल के एक बड़े हॉल में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन स्थायी व्यवस्था के बजाय आयुष्मान केंद्र के बगल में एक अलग चैंबर बनाकर वहां शिफ्ट किया गया।
वर्तमान में यह कक्ष संख्या 26 सी में संचालित हो रहा है। छोटे कक्ष में संचालन के कारण इस सेंटर में न के बराबर ही योग साधक पहुंचते हैं। जिले में इस केंद्र के लिए एक योग प्रशिक्षक और एक सहायक प्रशिक्षक की नियुक्ति है, लेकिन यहां आठ से अधिक मरीज कभी नहीं पहुंचे। बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से महज तीन दिन पहले केवल चार मरीज ही पहुंचे।
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सुबह का योगाभ्यास नहीं होता
21 जून को विश्व योग दिवस को लेकर आयुष विभाग की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस अवसर पर एक दिन योग सत्र आयोजित किया जाएगा, लेकिन यह नियमित रूप से नहीं चलता, क्योंकि केंद्र के पास पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है।
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है जिससे नियमित रूप से लोगों को योग सेवा दी जा सके।
जिले का दूसरा योगा वेलनेस सेंटर कासिमपुर में संचालित है, जहां भी आठ से कम मरीज ही पहुंचते हैं। यहां तैनात सहायक योग प्रशिक्षक राजन विश्वकर्मा ने तीन दिन पहले नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने बताया कि 2018 में उनकी नियुक्ति दस हजार रुपये के मानदेय पर हुई थी, लेकिन आठ वर्षों में एक बार भी मानदेय में वृद्धि नहीं की गई। न ही नियमित भुगतान हुआ। तीन माह से मानदेय न मिलने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
कोट-- -
योग दिवस पर दो हजार से अधिक योग साधकों को योग कराने की तैयारी विभाग की है। जिला अस्पताल और कासिमपुर में योगा वेलनेस सेंटर के माध्यम से योग चिकित्सा दी जाती है। जहां स्थान मिलता है, वहां उसी अनुसार संचालन किया जा रहा है। बड़े कक्ष के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है और इस संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। -डॉ. वीरेंद्र कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, मऊ
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जिला अस्पताल में 1 जून 2018 को बना योगा वेलनेस सेंटर स्वयं अव्यवस्था की स्थिति में है, ऐसे में यह दूसरों को स्वस्थ कैसे रखेगा? अव्यवस्था के चलते योगा वेलनेस सेंटर गुमनामी के बीच संचालित हो रहा है।
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बीते आठ वर्षों में इस सेंटर का स्थान छह बार बदला गया, लेकिन हर बार इसका आकार घटता गया। वर्तमान में दो योग प्रशिक्षकों की तैनाती के बावजूद बमुश्किल दस से कम मरीज ही पहुंचते हैं। जबकि अस्पताल की ओपीडी 800 से अधिक है, इसमें 90 प्रतिशत मरीजों को योगा वेलनेस सेंटर की जानकारी तक नहीं है।
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विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि शासन द्वारा जो सुविधा उपलब्ध कराई गई है, उसी में योग को लेकर प्रयास जारी हैं। जिला अस्पताल में दस बेड की क्षमता वाला योगा वेलनेस सेंटर 2018 में शुरू किया गया था।
उस समय यह ब्लड बैंक के बगल स्थित बड़े कक्ष में संचालित किया गया, जहां वर्तमान में डायलिसिस यूनिट संचालित है। दो वर्ष बाद इस सेंटर को पोषण पुनर्वास केंद्र के पास एक छोटे कमरे में स्थानांतरित किया गया।
इसके बाद वर्ष 2022 में इसे ए और बी के रूप में विभाजित दो कमरों में संचालित किया गया। तीन माह बाद ही इसे बगल के एक बड़े हॉल में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन स्थायी व्यवस्था के बजाय आयुष्मान केंद्र के बगल में एक अलग चैंबर बनाकर वहां शिफ्ट किया गया।
वर्तमान में यह कक्ष संख्या 26 सी में संचालित हो रहा है। छोटे कक्ष में संचालन के कारण इस सेंटर में न के बराबर ही योग साधक पहुंचते हैं। जिले में इस केंद्र के लिए एक योग प्रशिक्षक और एक सहायक प्रशिक्षक की नियुक्ति है, लेकिन यहां आठ से अधिक मरीज कभी नहीं पहुंचे। बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से महज तीन दिन पहले केवल चार मरीज ही पहुंचे।
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सुबह का योगाभ्यास नहीं होता
21 जून को विश्व योग दिवस को लेकर आयुष विभाग की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस अवसर पर एक दिन योग सत्र आयोजित किया जाएगा, लेकिन यह नियमित रूप से नहीं चलता, क्योंकि केंद्र के पास पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है।
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है जिससे नियमित रूप से लोगों को योग सेवा दी जा सके।
जिले का दूसरा योगा वेलनेस सेंटर कासिमपुर में संचालित है, जहां भी आठ से कम मरीज ही पहुंचते हैं। यहां तैनात सहायक योग प्रशिक्षक राजन विश्वकर्मा ने तीन दिन पहले नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने बताया कि 2018 में उनकी नियुक्ति दस हजार रुपये के मानदेय पर हुई थी, लेकिन आठ वर्षों में एक बार भी मानदेय में वृद्धि नहीं की गई। न ही नियमित भुगतान हुआ। तीन माह से मानदेय न मिलने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
कोट
योग दिवस पर दो हजार से अधिक योग साधकों को योग कराने की तैयारी विभाग की है। जिला अस्पताल और कासिमपुर में योगा वेलनेस सेंटर के माध्यम से योग चिकित्सा दी जाती है। जहां स्थान मिलता है, वहां उसी अनुसार संचालन किया जा रहा है। बड़े कक्ष के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है और इस संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। -डॉ. वीरेंद्र कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, मऊ