{"_id":"6a4803fbad9a29207e087434","slug":"with-a-capacity-of-40-beds-and-20000-patients-treated-in-a-year-not-a-single-patient-was-admitted-mau-news-c-295-1-mau1001-147978-2026-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: 40 बेड की क्षमता, एक साल में 20 हजार मरीजों का इलाज पर एक को भी भर्ती नहीं किया गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: 40 बेड की क्षमता, एक साल में 20 हजार मरीजों का इलाज पर एक को भी भर्ती नहीं किया गया
विज्ञापन
नगर के पुरानी तहसील स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के वार्ड में मौजूद बेड। संवाद
कोविड के बाद से लोगों में आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्व बढ़ा है, लेकिन इलाज मुहैया कराने के लिए शहर का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बेमकसद साबित हो रहा है।
हैरत की बात यह है कि जिले के दो सबसे बड़े आयुर्वेद अस्पताल नगर के पुरानी तहसील और घोसी जिनकी क्षमता 40 बेड की है, वहां आज तक एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। एक साल में दोनों जगह 20 हजार से अधिक मरीजों ने उपचार कराया है।
पड़ताल में दोनों जगहों पर केवल मौके पर दस बेड ही पाए गए। वहीं घोसी में तैनात दोनों चिकित्सक मौके पर नहीं मिले, जबकि वहां फार्मासिस्ट मरीजों का इलाज करते हुए पाए गए।
विज्ञापन
नगर के पुरानी तहसील स्थित किराए के भवन में संचालित 15 बेड के अस्पताल पर जब टीम पहुंची तो पाया गया कि 15 बेड की जगह केवल सात बेड ही उपलब्ध थे। इनमें से दो बेड पर न चादर थी और न गद्दा।
वार्ड में मरीजों की सुविधा के लिए एक पंखा लगा हुआ मिला, जबकि प्रकाश के नाम पर कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी और कमरे में लगी खिड़की के उजाले से ही रोशनी मिल रही थी।
मौके पर दो डॉक्टर मिले, जिनमें डॉ. शिखा और डॉ. जितेंद्र कुमार शामिल थे। दोनों चिकित्सकों ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 1 मार्च 2026 तक 10,513 मरीजों को ओपीडी में देखा गया है। रोजाना ओपीडी में 30 से 50 मरीज आते हैं।
मरीज भर्ती करने के सवाल पर उन्होंने बताया कि व्यवस्था नहीं है, इसलिए यदि कोई मरीज आता भी है तो ओपीडी समय में एक से दो घंटे के लिए ही भर्ती कर उपचार किया जाता है।
घोसी के 25 बेड क्षमता वाले अस्पताल में तैनात डॉ. अभिलाषा और डॉ. धर्मेंद्र मौके पर मौजूद नहीं मिले। यहां फार्मासिस्ट मनोज कुमार एक मरीज का उपचार करते हुए मिले। यहां एक साल में दस हजार से अधिक मरीजों ने उपचार कराया है।
पूछने पर बताया गया कि डॉ. अभिलाषा लंबे समय से वाराणसी में अटैच हैं, जबकि डॉ. धर्मेंद्र पारिवारिक कारणों से अवकाश पर हैं।
फार्मासिस्ट ने बताया कि रोजाना 30 से 40 मरीज आते हैं, लेकिन मरीज भर्ती करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह कुछ नहीं बता सकते, इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारी ही दे सकते हैं।
2016 से अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ
जिले में आयुर्वेद विधा के 28 अस्पताल हैं और नियम के अनुसार हर अस्पताल में मरीजों की भर्ती की सुविधा होनी चाहिए। इनमें दो सबसे बड़े अस्पताल नगर और घोसी हैं। चौंकाने वाली बात है कि 2016 से अब तक यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता। कई अस्पतालों में दोपहर बाद संचालन बंद हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों के समय से न पहुंचने की स्थिति भी सामने आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते, तो वार्ड बनाए रखने की आवश्यकता क्यों है।
28 अस्पतालों में 12 के पास भवन, चार जर्जर हालत में
जिले में आयुर्वेद के 28 अस्पताल हैं, जिनमें से 16 यानी लगभग 60 प्रतिशत अस्पताल किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार केवल 12 अस्पताल ही अपने भवन में चल रहे हैं। इनमें चकरा, कसारा, करहा, करमी, चिरैयाकोट, देवलास, गोकुलपुरा, सिपाह, अमिला, कटिहारी, मझवारा और कमलसागर शामिल हैं। इनमें भी चकरा, अमिला, मझवारा, कमलसागर और सिपाह की स्थिति जर्जर बताई गई है। मझवारा और कमलसागर में नए भवन लगभग तैयार हो चुके हैं।
कोट-- -
मुख्यालय से बेड और स्टाफ की मांग की गई है। दिन में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। स्टाफ पूरा होने के बाद मरीजों को पूरी तरह भर्ती करने की सुविधा मिलेगी।
-डॉ. वीरेंद्र कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, मऊ
विज्ञापन
हैरत की बात यह है कि जिले के दो सबसे बड़े आयुर्वेद अस्पताल नगर के पुरानी तहसील और घोसी जिनकी क्षमता 40 बेड की है, वहां आज तक एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। एक साल में दोनों जगह 20 हजार से अधिक मरीजों ने उपचार कराया है।
विज्ञापन
पड़ताल में दोनों जगहों पर केवल मौके पर दस बेड ही पाए गए। वहीं घोसी में तैनात दोनों चिकित्सक मौके पर नहीं मिले, जबकि वहां फार्मासिस्ट मरीजों का इलाज करते हुए पाए गए।
विज्ञापन
नगर के पुरानी तहसील स्थित किराए के भवन में संचालित 15 बेड के अस्पताल पर जब टीम पहुंची तो पाया गया कि 15 बेड की जगह केवल सात बेड ही उपलब्ध थे। इनमें से दो बेड पर न चादर थी और न गद्दा।
वार्ड में मरीजों की सुविधा के लिए एक पंखा लगा हुआ मिला, जबकि प्रकाश के नाम पर कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी और कमरे में लगी खिड़की के उजाले से ही रोशनी मिल रही थी।
मौके पर दो डॉक्टर मिले, जिनमें डॉ. शिखा और डॉ. जितेंद्र कुमार शामिल थे। दोनों चिकित्सकों ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 1 मार्च 2026 तक 10,513 मरीजों को ओपीडी में देखा गया है। रोजाना ओपीडी में 30 से 50 मरीज आते हैं।
मरीज भर्ती करने के सवाल पर उन्होंने बताया कि व्यवस्था नहीं है, इसलिए यदि कोई मरीज आता भी है तो ओपीडी समय में एक से दो घंटे के लिए ही भर्ती कर उपचार किया जाता है।
घोसी के 25 बेड क्षमता वाले अस्पताल में तैनात डॉ. अभिलाषा और डॉ. धर्मेंद्र मौके पर मौजूद नहीं मिले। यहां फार्मासिस्ट मनोज कुमार एक मरीज का उपचार करते हुए मिले। यहां एक साल में दस हजार से अधिक मरीजों ने उपचार कराया है।
पूछने पर बताया गया कि डॉ. अभिलाषा लंबे समय से वाराणसी में अटैच हैं, जबकि डॉ. धर्मेंद्र पारिवारिक कारणों से अवकाश पर हैं।
फार्मासिस्ट ने बताया कि रोजाना 30 से 40 मरीज आते हैं, लेकिन मरीज भर्ती करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह कुछ नहीं बता सकते, इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारी ही दे सकते हैं।
2016 से अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ
जिले में आयुर्वेद विधा के 28 अस्पताल हैं और नियम के अनुसार हर अस्पताल में मरीजों की भर्ती की सुविधा होनी चाहिए। इनमें दो सबसे बड़े अस्पताल नगर और घोसी हैं। चौंकाने वाली बात है कि 2016 से अब तक यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता। कई अस्पतालों में दोपहर बाद संचालन बंद हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों के समय से न पहुंचने की स्थिति भी सामने आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते, तो वार्ड बनाए रखने की आवश्यकता क्यों है।
28 अस्पतालों में 12 के पास भवन, चार जर्जर हालत में
जिले में आयुर्वेद के 28 अस्पताल हैं, जिनमें से 16 यानी लगभग 60 प्रतिशत अस्पताल किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार केवल 12 अस्पताल ही अपने भवन में चल रहे हैं। इनमें चकरा, कसारा, करहा, करमी, चिरैयाकोट, देवलास, गोकुलपुरा, सिपाह, अमिला, कटिहारी, मझवारा और कमलसागर शामिल हैं। इनमें भी चकरा, अमिला, मझवारा, कमलसागर और सिपाह की स्थिति जर्जर बताई गई है। मझवारा और कमलसागर में नए भवन लगभग तैयार हो चुके हैं।
कोट
मुख्यालय से बेड और स्टाफ की मांग की गई है। दिन में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। स्टाफ पूरा होने के बाद मरीजों को पूरी तरह भर्ती करने की सुविधा मिलेगी।
-डॉ. वीरेंद्र कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, मऊ

नगर के पुरानी तहसील स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के वार्ड में मौजूद बेड। संवाद