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Mau News: मौसम ने ली करवट, बूंदाबांदी और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान

Thu, 20 Mar 2025 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Mar 2025 11:39 PM IST
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Weather took a turn, drizzle and strong winds caused damage to crops
मऊ। जिले में बृहस्पतिवार को अचानक मौसम ने करवट ली। तड़के तेज हवा के साथ कहीं बूंदाबांदी तो कहीं हल्की बारिश हुई। दिन भर बादल छाए रहे। धूप छांव का सिलसिला बना रहा। बूंदाबांदी और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान पहुंचा है। गेहूं की तैयार फसल कई जगहों पर खेतों में ही गिर गई। मौसम में आए बदलाव से किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सताने लगी है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि बारिश और बादल होने की स्थिति में फसल उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत कमी आ सकती है।
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जिले में 95 हजार हेक्टेयर गेहूं की बुआई की गई है। जिले के अधिकांश गांवों में बड़ी संख्या में किसान गेहूं की खेती करते हैं। बुधवार को दिनभर तेज धूप के बाद देर शाम को अचानक बादल छा गए और बृहस्पतिवार को तड़के गरज चमक के साथ कहीं बूंदबांदी तो कहीं बारिश हुई। इस अप्रत्याशित बारिश से मौसम ठंडा हो गया। बदले मौसम से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अगेती गेहूं की फसल पकने को तैयार है। दिसंबर में बोई गई गेहूं की फसल में फूल आए हैं। ऐसे में अगर बारिश होती है तो फसल खराब हो सकती है। मार्च में बारिश का होना गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। सरसों की फसल की कटाई चल रही है। लेकिन, अचानक बारिश से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि गेहूं के लिए मार्च में अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। वातावरण में नमी बढ़ने के चलते कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहा। इस संबंध में किसान राजेंद्र पांडेय, आगम राम, जर्नादन सिंह, देव प्रकाश राय का कहना है कि मार्च में बारिश जारी रही, तो फसल को नुकसान हो सकता है। किसान सुरेंद्र लाल का कहना है कि सरसों की कटाई चल रही थी। इसी बीच मौसम में बदलाव से समस्या बढ़ गई है।
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वर्जन
बारिश से गेहूं की बालियों में नमी आ सकती है, इससे गेहूं के दानों का रंग काला पड़ सकता है और उनकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। इससे किसानों को बाजार में उचित मूल्य मिलने में दिक्कत हो सकती है।
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डॉ. विनय कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी
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