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सडकों से चले जा रहे थके हारे प्रवासी

Thu, 14 May 2020 09:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 09:51 PM IST
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Weary loser
मऊ । लॉकडाउन में ट्रकों और बसों में सवार होकर आ रहें प्रवासी मजदूर सड़कों पर थके हारे अपने घरों को चले जा रहे हैं। झुंड के झुंड जा रहे इन मजदूरों की हालत देख लोग द्रवित हो जा रहे हैं, लेकिन कोरोना वायरस के डर के चलते लोग इनकी सहायता करने को आगे भी नहीं आ रहें। वहीं, बिना किसी जांच के ये लोग अपने घरों तक पहुंच जा रहे है। इन्हें क्वारंटाइन सेंटरों पर ही भेजने के लिए प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं दिखाई नहीं पड़ रही है। जनपद के विभिन्न गांवों के लोग मुंबई ठाणे भिवंडी कल्यान आदि इलाकों में रहते हैं। इन इलाकों में कोरोना वायरस का कहर जारी है। ऐसे में लोग श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का इंतजार न करके ट्रकों से घर के लिए कूच कर दे रहे हैं। तीन दिन पहले दोहरीघाट क्षेत्र में मुंबई से टेंपो चलाकर तीन युवक मादी पहुंचे तो इसीक्रम में मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र में ट्रक रिजर्व करके कई व्यक्ति परिवार के साथ पहुंच गए। कई युवक बाइक चलाकर मुंबई से अपने घरों को पहुंचे। वृहस्पतिवार को सुबह लगभग 11 बजे मुंबई से करीब 50 लोगों को लेकर एक ट्रक भीटी पहुंचा। इस ट्रक में हरे बांस के टुकड़ों से परछत्ती बनाकर डबल डेकर का रूप दे दिया गया था। इसके अलावा इसी रास्ते से एक घंटे के अंतराल में तीन ट्रकें महाराष्ट्र से ठसाठस भरे प्रवासियों को लेकर पहुंचीं। इन ट्रकों को न तो पुलिस वालों ने कहीं रोका और न ही इनकी कहीं जांच हुई और न ही घर जाने के लिए इन्हें वाहन ही उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार कई टुकड़ों में ट्रकों से सफर करते हुए प्रवासी रोडवेज होते हुए दोहरीघाट और मधुबन तथा रतनपुरा ,रसडा की ओर से जा रहे हैं। सभी पैदल चले जा रहे हैँ। कुछ लोगों को बलिया मोड़ से पुलिस वाले ही ट्रकों पर बिठा कर उनके घरों की ओर से भेज दे रहे हैँ। यहा तक कि गिट्टी लदे ट्रकों पर प्रवासियों को आते देखा जा रहा है। इस बाबत अध्यापक पीयूष राय, अधिवक्ता शिवनारायण राय, समाजसेवी अरविंद मूर्ति कहते हैं कि बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूरों के साथ मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। उन्हें भोजन और जांच की व्यवस्था की जानी चाहिए। फिलहाल प्रशासन ने बाहर से घर आने वालों की सूचना देने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान, सदस्य, आंगन बाड़ी कार्यकर्ता और आशाओं को दे रखी है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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