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नगवा गांव का ग्राम प्रधान किया पदच्युत
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मऊ। जिलाधिकारी अमित सिंह वंसल ने रतनपुरा ब्लाक के नगवा गांव के प्रधान को पद च्युत कर दिया है। प्रधान पर गांव में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया है। गांव में तीन साल से अधिक समय पहले विकास कार्यों में 12 लाख 25 हजार नौ सौ रुपयों का फर्जीवाड़ा पाया गया था।विकास कार्यों में धाधली की शिकायत दो जांच समितियों ने अलग अलग समय पर की। जांच समितियों की रिपोर्ट पर डीएम ने घपले में आरोपी ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और तकनीकी सहायक को दोषी पाया। जांच समितियों की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम ने घपले कर रकम तीनों आरोपियों से वसूल करने का आदेश दिया। लेकिन एक असरदार नेता के दबाव पर डीएम के आदेश का अनुपालन दस महीने तक नहीं किया गया। अमर उजाला ने इस खबर को छह दिसंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
भूतपूर्व सैनिक संगठन के ब्लाक अध्यक्ष परमात्मा नंद सिंह और अन्य गांव वासियों की शिकायत पर नगवा गांव में विकास कार्यों की जांच पहले त्रिस्तरीय स्तर पर कराई गई। जांच समिति ने प्रधान,सेक्रेटरी और तकनीकी सहायक को गबन का दोषी पाया। प्रधान के प्रार्थनापत्र पर दुबारा कराई गई जांच में चार स्तरीय जांच समिति ने 12 लाख 25 हजार नौ सौ रुपये हेराफेरी पाई। जांच समिति की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने प्रधान रमेश चौहान, सेक्रेटरी वीरेंद्र प्रसाद और तकनीकी सहायक रवींद्र यादव से गबन की रकम की वसूली एक सप्ताह में कराकर नरई बांध स्थित मनरेगा खाते में जमा कराने का निर्देश दिया।इस मामले में तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज कराया गया। लेकिन जनपद के एक रसूखदार नेता के दबाव पर आरोपी प्रधान के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही आरोपी प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगी। शिकायत कर्ता पीएनसिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर आरोपी प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने की मांग की। जिलाधिकारी ने मंगलवार को आरोपी प्रधान रमेश चौहान को पदच्युत कर दिया। अब गांव की व्यवस्था संचालन के लिए त्रिस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इस बाबत प्रभारी सीडीओ विजय शंकर राय का कहना है कि प्रधान को पदच्युत कर दिया गया है।
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भूतपूर्व सैनिक संगठन के ब्लाक अध्यक्ष परमात्मा नंद सिंह और अन्य गांव वासियों की शिकायत पर नगवा गांव में विकास कार्यों की जांच पहले त्रिस्तरीय स्तर पर कराई गई। जांच समिति ने प्रधान,सेक्रेटरी और तकनीकी सहायक को गबन का दोषी पाया। प्रधान के प्रार्थनापत्र पर दुबारा कराई गई जांच में चार स्तरीय जांच समिति ने 12 लाख 25 हजार नौ सौ रुपये हेराफेरी पाई। जांच समिति की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीम ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने प्रधान रमेश चौहान, सेक्रेटरी वीरेंद्र प्रसाद और तकनीकी सहायक रवींद्र यादव से गबन की रकम की वसूली एक सप्ताह में कराकर नरई बांध स्थित मनरेगा खाते में जमा कराने का निर्देश दिया।इस मामले में तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज कराया गया। लेकिन जनपद के एक रसूखदार नेता के दबाव पर आरोपी प्रधान के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही आरोपी प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगी। शिकायत कर्ता पीएनसिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर आरोपी प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने की मांग की। जिलाधिकारी ने मंगलवार को आरोपी प्रधान रमेश चौहान को पदच्युत कर दिया। अब गांव की व्यवस्था संचालन के लिए त्रिस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इस बाबत प्रभारी सीडीओ विजय शंकर राय का कहना है कि प्रधान को पदच्युत कर दिया गया है।
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