मानवीय रूप: सिपाही ने रक्तदान कर बचाई नवजात की जान, पीड़ित पिता ने डीआईजी से लगाई थी गुहार
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला. यहां सिपाही ने रक्तदान कर नवजात की जान बचाई। सिपाही के इस कार्य की सोशल मीडिया पर पूरे दिन चर्चा होती रही।
विस्तार
समाज में पुलिस के प्रति अक्सर छवि को नकारात्मक रूप में लेते हैं। लेकिन बृहस्पतिवार को मूसलाधार बारिश के बीच सिपाही ने रक्त दान कर नवजात की जान बचाने का काम किया। सिपाही के इस कार्य की सोशल मीडिया पर पूरे दिन चर्चा होती रही।
बलिया निवासी एक व्यक्ति का नवजात बीमार हो गया। जिसे उपचार के लिए मऊ मुख्यालय स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में परिवार के सदस्यों ने भर्ती कराया। बच्चे का ब्लड ओ निगेटिव था। पीड़ित पिता ने इसकी गुहार डीआईजी से लगाई। डीआईजी ने इस संबंध में एसपी मऊ सुशील घुले को फोन कर पीड़ित की मदद करने के लिए उन्हें टास्क दिया।
इस पर एसपी ने पुलिस लाइन में मौजूद सिपाहियों के बीच इस मामले को रखा और बच्चे की जान बचाने के लिए सिपाहियों से मदद करने के कहा। इस दौरान पता चला कि तीन सिपाहियों का ओ निगेटिव ग्रुप है। तीनों सिपाही बच्चे की जान बचाने के लिए संबंधित अस्पताल पहुंचे और पीड़ित पिता से संपर्क किए। इस दौरान आरक्षी अरूण कुमार राय का ब्लड बच्चे के खून से मैच कर गया। इस दौरान सिपाही ने रक्तदान कर बच्चे की जान बचाने में सहायक हुआ।
मऊ में बच्चों के लिए ‘पिकू’ वार्ड तैयार
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। मऊ जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुट गया है। जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में पिकू वार्ड स्थापित किया गया है। वार्ड में बाल रोग विशेषज्ञ के साथ चिकित्सकों की 24 घंटे तैनाती की जाएगी तथा संबंधित चिकित्सीय संसाधन और दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश चंद्र सिंह ने दी। बताया कि वार्ड में एक माह से 15 वर्ष तक के गंभीर बीमार बच्चों को अभी इमरजेंसी ट्रायेज असेस्मेंट एवं टीट्रमेंट इकाई में प्राथमिक उपचार प्रदान किया जाता है। इसका उपयोग कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को सुरक्षित रखने में किया जाएगा। स्वास्थ्य में सुधार होने पर शिशु रोग वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है।