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मजलिस को उलेमा ने किया खिताब, ताबूत अलम का जुलूस निकला
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:06 PM IST
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बड़ागांव में शबीहे ताबूत व अलम के जुलूस में नौहखानी करते अंजुमन के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बड़ागांव स्थित अलमदार हुसैन के मकान से रविवार की रात ताबूत और अलम का जुलूस उठाया गया। जो सदर इमाम बारगाह पर जाकर समाप्त हुआ। इस दौरान अंजुमनों ने नौहा मातम किया और कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। इससे पहले हुई मजलिस में उलेमा ने इमाम हुसैन की बहन जैनब के अपने बच्चों को जंग में भेजने का वाक्या बयान किया गया। जिसे सुनकर अजादार रो पड़े।
जुलूस से पहले मजलिस को सम्बोधित करते हुये मौलाना गऱीबुल हसन घोसवी ने कहा कि यह जुलूस हजरत जैनब के दो बेटों औन और मोहम्मद की याद में निकाला जाता है। वाकया बयान करते हुए मौलाना ने कहा कि कर्बला के मैदान में बीबी जैनब अपने बच्चों से कहती है कि ऐ औनो मोहम्मद जाओ मामू इमाम हुसैन से जंग की इजाजत लो और अपनी जान नाना के दीन पे क़ुर्बान कर दो।
औनो मोहम्मद इमाम हुसैन से जंग की इजाजत मांगते हैं लेकिन वह भांजों को गले लगा कर कहते हैं कि वह अभी छोटे हैं इसलिए उन्हें जंग में जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दोनों बच्चों की उम्र 11 और 12 साल की थी। लेकिन बीबी जैनब दोनों बच्चों को लेकर भाई इमाम हुसैन के पास पहुंची और बच्चों को जंग की इजाजत देने की दरख्वास्त की। बहन की बात को इमाम हुसैन मना नहीं कर सके और बच्चों को जंग की इजाजत दे दी।
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दोनों बच्चों ने जंग के दौरान नहरे फोरात पर कब्जा कर लिया। ऐसे में फ़ौज की बिगड़ती हालत देख उमरे साद के कहने पर सिपाहियों ने दोनों भाइयों को धोखे से अलग करते हुए जोरदार हमला कर दिया। जिसमें दोनों भाई घायल होकर घोड़े से गिर गए। इस दौरान पहुंचे इमाम हुसैन से बच्चों ने कहा कि उन्होंने अपनी मां से किया गया वादा पूरा कर दिया। यह कर उनकी रूह जिस्म से परवाज कर गई। वाक्या सुनकर मौजूद अजादार रो पड़े और नौहा मातम कर उन्हें खिराजे अकीदत पेश की।
जुलूस में इश्तेयाक हुसैन, शहादत अली, तक़ी फ़ैयाजी, जफर मेहदी, नजमुल हसन, अली रजा, तनवीर, बाकर रजा, फ़ैयाज शब्बर, जौन मोहम्मद, मजहर हुसैन, मोबारक हुसैन, गुलाम अब्बास, सलमान अख्तर, मोहम्मद अब्बास आदि उपस्थित रहे।
उधर, मदापुर बैसवाड़ा में रविवार की रात रेहाना बीबी के आवास पर देर रात तक शहीदाने कर्बला की याद में मजलिस का आयोजन किया गया। अंजुमनों ने नौहा और मातम कर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। तसव्वर अली की ओर से तबर्रुक तकसीम किया गया। इस दौरान सुभानुल्लाह, मासुम, शोएब जूही, अनवार अहमद, सादिक, जलालुद्दीन, अफजाल नाबीना सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद थे।
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जुलूस से पहले मजलिस को सम्बोधित करते हुये मौलाना गऱीबुल हसन घोसवी ने कहा कि यह जुलूस हजरत जैनब के दो बेटों औन और मोहम्मद की याद में निकाला जाता है। वाकया बयान करते हुए मौलाना ने कहा कि कर्बला के मैदान में बीबी जैनब अपने बच्चों से कहती है कि ऐ औनो मोहम्मद जाओ मामू इमाम हुसैन से जंग की इजाजत लो और अपनी जान नाना के दीन पे क़ुर्बान कर दो।
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औनो मोहम्मद इमाम हुसैन से जंग की इजाजत मांगते हैं लेकिन वह भांजों को गले लगा कर कहते हैं कि वह अभी छोटे हैं इसलिए उन्हें जंग में जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दोनों बच्चों की उम्र 11 और 12 साल की थी। लेकिन बीबी जैनब दोनों बच्चों को लेकर भाई इमाम हुसैन के पास पहुंची और बच्चों को जंग की इजाजत देने की दरख्वास्त की। बहन की बात को इमाम हुसैन मना नहीं कर सके और बच्चों को जंग की इजाजत दे दी।
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दोनों बच्चों ने जंग के दौरान नहरे फोरात पर कब्जा कर लिया। ऐसे में फ़ौज की बिगड़ती हालत देख उमरे साद के कहने पर सिपाहियों ने दोनों भाइयों को धोखे से अलग करते हुए जोरदार हमला कर दिया। जिसमें दोनों भाई घायल होकर घोड़े से गिर गए। इस दौरान पहुंचे इमाम हुसैन से बच्चों ने कहा कि उन्होंने अपनी मां से किया गया वादा पूरा कर दिया। यह कर उनकी रूह जिस्म से परवाज कर गई। वाक्या सुनकर मौजूद अजादार रो पड़े और नौहा मातम कर उन्हें खिराजे अकीदत पेश की।
जुलूस में इश्तेयाक हुसैन, शहादत अली, तक़ी फ़ैयाजी, जफर मेहदी, नजमुल हसन, अली रजा, तनवीर, बाकर रजा, फ़ैयाज शब्बर, जौन मोहम्मद, मजहर हुसैन, मोबारक हुसैन, गुलाम अब्बास, सलमान अख्तर, मोहम्मद अब्बास आदि उपस्थित रहे।
उधर, मदापुर बैसवाड़ा में रविवार की रात रेहाना बीबी के आवास पर देर रात तक शहीदाने कर्बला की याद में मजलिस का आयोजन किया गया। अंजुमनों ने नौहा और मातम कर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। तसव्वर अली की ओर से तबर्रुक तकसीम किया गया। इस दौरान सुभानुल्लाह, मासुम, शोएब जूही, अनवार अहमद, सादिक, जलालुद्दीन, अफजाल नाबीना सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद थे।