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रजिस्टर फाड़ने के मामले में दो सदस्यीय टीम ने शुरू की जांच

Tue, 20 Aug 2019 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Aug 2019 12:03 AM IST
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Two-member team started investigation in case of register tearing
मऊ। जिला अस्पताल में कार्रवाई से बचने के लिए उपस्थिति रजिस्टर फाड़ने के मामले में सीएमओ द्वारा दो सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। गठित टीम के सदस्यों ने गत दिवस जिला अस्पताल पहुंचकर एनसीडी क्लीनिक में चिकित्सक तथा कर्मचारियों से इस मामले की जानकारी ली। साथ ही उपस्थिति रजिस्टर और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की।
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अनुपस्थिति से बचने के लिए सीएमएस कक्ष में रखा उपस्थिति रजिस्टर को तीन अगस्त को रजिस्टर का पेज फाड़ दिया गया था। इस मामले में सीएमएस डॉ. बृजकुमार द्वारा सीएमओ को पत्र लिखकर अवगत कराया गया था। इस मामले में सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह द्वारा दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। जिसमें एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकांरी डॉ. पीके राय तथा डीपीएम रविंद्र कुमार शामिल है। जांच टीम गत शनिवार को इस मामले की जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंची। जहां इस संबंध में सीएमएस डॉ. बृजकुमार द्वारा रजिस्टर फाड़ने के मामले में एनसीडी क्लीनिक के ऊपर लगाए आरोप की जांच के लिए एनसीडी क्लीनिक पहुंची। यहां जांच टीम द्वारा चिकित्साधिकारी से लेकर कर्मचारियों से इस मामले की जानकारी ली गई। इसके बाद टीम सीएमएस कक्ष पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर के साथ कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की। इस बाबत सीएमओ डॉ.सतीशचंद्र सिंह का कहना है कि सीएमएस कक्ष में रखे उपस्थिति रजिस्टर को फाड़ने के मामले में दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। वो मामले की जांच कर रही है। बताते चले कि अमर उजाला द्वारा यह पूरा प्रकरण आठ अगस्त को कार्रवाई से बचने के लिए फाड़े रजिस्टर के पन्ने शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला अस्पताल सहित सीएमओ कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई थी।
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यह है पूरा मामला
मऊ। सीएमएस डॉ. बृजकुमार द्वारा पांच अगस्त को सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह को लिखे पत्र में अवगत कराया था कि जिला अस्पताल में गैर संचारी बीमारियों के इलाज के लिए सीएमओ कार्यालय से संचालित हो रहे एनसीडी क्लीनिक में तैनात चिकित्साधिकारी तथा स्वास्थ्य कर्मचारी कभी भी समय से उपस्थित नहीं रहते हैं। इसके चलते एनसीडी के मरीजों के इलाज के लिए अन्य चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। पत्र में यह उल्लेख किया था कि कई बार चेतावनी देने के बाद इनके कार्यप्रणाली में कोई सुुधार नहीं आ रहा है। साथ ही आरोप लगाया था कि 2 अगस्त को आजमगढ़ से आए ज्वाइंट कमिश्नर द्वारा एनसीडी क्लीनिक का निरीक्षण किया गया था। जिसमें चिकित्साधिकारी तथा कुछ कर्मचारी अनुपस्थित मिले थे। जहां तीन अगस्त को अनुपस्थित के संबंधित पेज को फाड़ दिया जाता है। पूछे जाने पर इनके द्वारा इस बारे में अपनी अनभिज्ञता जताई जाती है। अनुशासनहीनता की बात का जिक्रकर सीएमएस ने सीएमओ से एनसीडी क्लीनिक का सारा दायित्व सीएमओ खुद लेने तथा इनके वेतन आदि का भुगतान अपने स्तर से कराने की बात कही थी।
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