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Mau News: डीजल वाष्पीकरण में चार बुकिंग क्लर्कों से हुई ढाई लाख की रिकवरी
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मऊ। मऊ डिपो से डीजल वाष्पीकरण के मामले में तैनात रहे चार बुकिंग क्लर्कों से परिवहन निगम ने ढाई लाख रुपये की रिकवरी की है। जो कार्यरत हैं उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई है।
बीते जून में तैनात जांच के घेरे में आए बुकिंग क्लर्क संतोष से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले फंड से 75 हजार रुपये की रिकवरी कर ली गई है। इन क्लर्कों ने वित्तीय वर्ष 2021 से 2023 तक डीजल वाष्पीकरण की रिपोर्ट मुख्यालय नहीं भेजी थी। बीते अप्रैल माह में अचानक उच्चाधिकारियों की जांच में पता चला कि मऊ डिपो की बसों में खर्च हुए 2330 लीटर डीजल का हिसाब ही नहीं है। डिपो के अधिकारियों के पास भी इसका जवाब नहीं था। जिसके बाद आरएम आजमगढ़ मनोज कुमार वाजपेयी ने एआरएम कार्मिक और एआरएम फाइनेंस को जांच सौंपी थी।
तीन साल के कार्यकाल में यहां चार बुकिंग क्लर्क तैनात रहे। इनमें से तीन का कहीं और ट्रांसफर हो गया था। जबकि बुकिंग क्लर्क संतोष यहां तैनात थे। जांच टीम ने सभी को तलब कर इससे जुड़े दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा था। मऊ डिपो की रोडवेज बसों को चलाने के लिए हर माह 12 हजार लीटर के छह टैंकर डिपो के वर्कशॉप में स्थापित टंकी में आते हैं। कभी कभी 14 हजार लीटर का टैंकर भी आता है।
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12 हजार लीटर वाले टैंकर के लिए उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम 10 लाख 64 हजार और 14 लीटर वाले टैंकर के लिए लगभग 12 लाख रुपये भुगतान करता है। लेकिन जनपद स्तर पर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और वाहन स्वामियों की मिली भगत से डीजल चोरी का खेल चलता रहा। साथ ही तीन साल तक वाष्पीकरण की रिपोर्ट नहीं भेजा।
नियम के अनुसार डीजल टैंकर आने पर टंकी में डालने से पहले इंचार्ज और बुकिंग क्लर्क टैंकर की पूरी तरह से जांच करते हैं। डिप डालकर टैंकर के सभी भागों में मानक की जांच की जाती है। टैंकर चालक के पास मौजूद चालान में टैंकर में डीजल की पूरी जानकारी होती है। उससे मिलान करके अधिकारी डीजल मापते हैं और सही पाए जाने के बाद टंकी में डीजल डलवाया जाता है।
डीजल वाष्पीकरण में मऊ डिपो से 2330 लीटर डीजल का हिसाब नहीं मिल रहा था। जांच के दौरान भी बुकिंग क्लर्कों द्वारा संतोषजनक तथ्य और साक्ष्य नहीं दिया गया। जिसके बाद बुकिंग क्लर्कों से रिकवरी की गई है। जो कार्यरत थे उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। - मनोज कुमार वाजपेयी, आरएम, आजमगढ़
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बीते जून में तैनात जांच के घेरे में आए बुकिंग क्लर्क संतोष से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले फंड से 75 हजार रुपये की रिकवरी कर ली गई है। इन क्लर्कों ने वित्तीय वर्ष 2021 से 2023 तक डीजल वाष्पीकरण की रिपोर्ट मुख्यालय नहीं भेजी थी। बीते अप्रैल माह में अचानक उच्चाधिकारियों की जांच में पता चला कि मऊ डिपो की बसों में खर्च हुए 2330 लीटर डीजल का हिसाब ही नहीं है। डिपो के अधिकारियों के पास भी इसका जवाब नहीं था। जिसके बाद आरएम आजमगढ़ मनोज कुमार वाजपेयी ने एआरएम कार्मिक और एआरएम फाइनेंस को जांच सौंपी थी।
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तीन साल के कार्यकाल में यहां चार बुकिंग क्लर्क तैनात रहे। इनमें से तीन का कहीं और ट्रांसफर हो गया था। जबकि बुकिंग क्लर्क संतोष यहां तैनात थे। जांच टीम ने सभी को तलब कर इससे जुड़े दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा था। मऊ डिपो की रोडवेज बसों को चलाने के लिए हर माह 12 हजार लीटर के छह टैंकर डिपो के वर्कशॉप में स्थापित टंकी में आते हैं। कभी कभी 14 हजार लीटर का टैंकर भी आता है।
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12 हजार लीटर वाले टैंकर के लिए उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम 10 लाख 64 हजार और 14 लीटर वाले टैंकर के लिए लगभग 12 लाख रुपये भुगतान करता है। लेकिन जनपद स्तर पर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और वाहन स्वामियों की मिली भगत से डीजल चोरी का खेल चलता रहा। साथ ही तीन साल तक वाष्पीकरण की रिपोर्ट नहीं भेजा।
नियम के अनुसार डीजल टैंकर आने पर टंकी में डालने से पहले इंचार्ज और बुकिंग क्लर्क टैंकर की पूरी तरह से जांच करते हैं। डिप डालकर टैंकर के सभी भागों में मानक की जांच की जाती है। टैंकर चालक के पास मौजूद चालान में टैंकर में डीजल की पूरी जानकारी होती है। उससे मिलान करके अधिकारी डीजल मापते हैं और सही पाए जाने के बाद टंकी में डीजल डलवाया जाता है।
डीजल वाष्पीकरण में मऊ डिपो से 2330 लीटर डीजल का हिसाब नहीं मिल रहा था। जांच के दौरान भी बुकिंग क्लर्कों द्वारा संतोषजनक तथ्य और साक्ष्य नहीं दिया गया। जिसके बाद बुकिंग क्लर्कों से रिकवरी की गई है। जो कार्यरत थे उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। - मनोज कुमार वाजपेयी, आरएम, आजमगढ़