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Mau News: कहने को 372 राजकीय नलकूप, फिर भी नहीं हो पा रही सिंचाई
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मऊ/ बढुआगोदाम। जिले के राजकीय नलकूपों के संचालन की स्थिति बेहद खराब हैं। अधिकांश नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हाल में हैं। इसके चलते किसानों के खेतों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता है। इससे खेती किसानी पर विपरीत असर पड़ रहा है।
कहने को तो किसानों को सिंचाई की सुविधा के लिए जिले के सभी ब्लाॅकोंं में राजकीय नलकूप स्थापित किया गया है। जनपद में 372 राजकीय नलकूपों का संचालन किया जाता है। जिसमें हर महीने दस से बीस नलकूप खराब पड़े रहते हैं। नलकूप विभाग के अधिकारी अलग-अलग कारणों से खराब होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि नलकूपों की मरम्मत को लेकर हर वर्ष करीब करोड़ों रुपये का बजट शासन की ओर से जारी किया जाता है।
खेतों की सिंचाई के लिए जनपद में नहरों के अलावा राजकीय नलकूपों की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद सिंचाई संसाधनों की स्थिति खराब होने के कारण हर साल सिंचाई के लिए किसानों को जूझना पड़ता है। सिंचाई नहीं होने के कारण फसल के उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता हैं।
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किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए जनपद में 372 राजकीय नलकूपों से करीब 5026 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है। अधिकांश नलकूप खराब पड़े हैं। कोई यांत्रिक दोष से तो कोई विद्युत दोषों के कारण ठप है। कई जगह नालियां टूटी हुई हैं। किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है, जो काफी महंगा होता है।
बढुआ गोदाम। शासन की ओर से जिले में संचालित नलकूपों की मरम्मत के लिए जनपद के 372 नलकूप के लिए 74.44 लाख रुपये वहीं बलिया के 221 नलकूप खंड के लिए 44. 20 लाख की धनराशि शासन की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। इस तरह से हर वर्ष एक करोड़ 18 लाख 64 हजार रुपये खर्च होने के बावजूद जिले में नलकूपों का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है
जिले में दो खंडों की ओर से संचालित कुल 593 सरकारी नलकूप हैं। इनमें 372 नलकूपों का संचालन मऊ नलकूप खंड से होता है, जबकि बलिया जनपद के नगरा, रसडा और चिलकहर ब्लाॅक में मौजूद 221 नलकूपों का संचालन भी मऊ नलकूप खंड से किया जाता है। नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता अरूण गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में जिले में अलग-अलग कारणों से कुल 16 नलकूप खराब हैं। शीघ्र नलकूपों की मरम्मत करा दी जाएगी।
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कहने को तो किसानों को सिंचाई की सुविधा के लिए जिले के सभी ब्लाॅकोंं में राजकीय नलकूप स्थापित किया गया है। जनपद में 372 राजकीय नलकूपों का संचालन किया जाता है। जिसमें हर महीने दस से बीस नलकूप खराब पड़े रहते हैं। नलकूप विभाग के अधिकारी अलग-अलग कारणों से खराब होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि नलकूपों की मरम्मत को लेकर हर वर्ष करीब करोड़ों रुपये का बजट शासन की ओर से जारी किया जाता है।
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खेतों की सिंचाई के लिए जनपद में नहरों के अलावा राजकीय नलकूपों की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद सिंचाई संसाधनों की स्थिति खराब होने के कारण हर साल सिंचाई के लिए किसानों को जूझना पड़ता है। सिंचाई नहीं होने के कारण फसल के उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता हैं।
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किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए जनपद में 372 राजकीय नलकूपों से करीब 5026 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है। अधिकांश नलकूप खराब पड़े हैं। कोई यांत्रिक दोष से तो कोई विद्युत दोषों के कारण ठप है। कई जगह नालियां टूटी हुई हैं। किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है, जो काफी महंगा होता है।
बढुआ गोदाम। शासन की ओर से जिले में संचालित नलकूपों की मरम्मत के लिए जनपद के 372 नलकूप के लिए 74.44 लाख रुपये वहीं बलिया के 221 नलकूप खंड के लिए 44. 20 लाख की धनराशि शासन की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। इस तरह से हर वर्ष एक करोड़ 18 लाख 64 हजार रुपये खर्च होने के बावजूद जिले में नलकूपों का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है
जिले में दो खंडों की ओर से संचालित कुल 593 सरकारी नलकूप हैं। इनमें 372 नलकूपों का संचालन मऊ नलकूप खंड से होता है, जबकि बलिया जनपद के नगरा, रसडा और चिलकहर ब्लाॅक में मौजूद 221 नलकूपों का संचालन भी मऊ नलकूप खंड से किया जाता है। नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता अरूण गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में जिले में अलग-अलग कारणों से कुल 16 नलकूप खराब हैं। शीघ्र नलकूपों की मरम्मत करा दी जाएगी।