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फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा तिघरा पीएचसी
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मऊ। मधुबन तहसील के देवाराचंल कस्बा में 15 से ज्यादा गांवों के हजारों ग्रामीणों के उपचार के लिए तिघरा ग्राम पंचायत में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बीते सात माह से कोई चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में चिकित्सक के अभाव में यहां तैनात फार्मासिस्ट द्वारा अस्पताल में आने वाले मरीजों का उपचार किया जा रहा है। कई बार चिकित्सकों की तैनाती की मांग को लेकर शिकायत करने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस पर कोई अमल नहीं किया जा रहा है।
सन 1991 में क्षेत्र के तिघरा गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण कराया गया तो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने की आस जगी, लेकिन लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया। नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को वर्षों पूर्व उच्चीकृत तो कर कर दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं पूर्ववत है। अस्पताल में चिकित्सक का पद सात माह से रिक्त चल रहा है। ऐसे में फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के संतविजय सिंह, रामहर्ख गौड़, रामनारायण सिंह, पारस यादव, अभिराम शर्मा, किशुन मौर्य का कहना था कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अकाल है। वहीं स्थानीय ग्रामीण महिलाओं द्वारा परिसर की दीवारों पर गोबर के उपले भी थोपे जाते हैं जिससे पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लागा है। वर्षो पूर्व अस्पताल को उच्चीकृत तो किया गया, लेकिन सुविधाओं को बहाल नहीं किया जा सका है। चिकित्सक का पद महीनों से रिक्त चल रहा है। इससे मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। प्रधान प्रतिनिधि कुंवर श्याम नारायण सिंह का कहना है कि मुख्य चिकित्साधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है।
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सन 1991 में क्षेत्र के तिघरा गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण कराया गया तो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने की आस जगी, लेकिन लोगों के सपने पर ग्रहण लग गया। नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को वर्षों पूर्व उच्चीकृत तो कर कर दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं पूर्ववत है। अस्पताल में चिकित्सक का पद सात माह से रिक्त चल रहा है। ऐसे में फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के संतविजय सिंह, रामहर्ख गौड़, रामनारायण सिंह, पारस यादव, अभिराम शर्मा, किशुन मौर्य का कहना था कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अकाल है। वहीं स्थानीय ग्रामीण महिलाओं द्वारा परिसर की दीवारों पर गोबर के उपले भी थोपे जाते हैं जिससे पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लागा है। वर्षो पूर्व अस्पताल को उच्चीकृत तो किया गया, लेकिन सुविधाओं को बहाल नहीं किया जा सका है। चिकित्सक का पद महीनों से रिक्त चल रहा है। इससे मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। प्रधान प्रतिनिधि कुंवर श्याम नारायण सिंह का कहना है कि मुख्य चिकित्साधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है।
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