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नेत्र सर्जन के तीन पद, एक ही तैनात, कैसे हो समुचित इलाज
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मऊ। जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल में इन दिनों मानव संसाधन की कमी का रोना रो रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में डाक्टरों की संख्या लगातार घट रही है। 100 बेड के इस अस्पताल में ओपीडी के साथ चिकित्सकों को इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ रही है। यहां न तो कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती हुई है और ना ही एक भी इमरजेंसी मेडिकल आफिसर की तैनाती कराई जा सकी है। स्थिति यह है कि नेत्र रोग विभाग में स्वीकृत तीन सर्जन के पद पर एक ही सर्जन की तैनाती है। ऐसे में मरीजों के समुचित इलाज की बात बेमानी लगती है। जहां एक तरफ जिला अस्पताल संसाधनों के मामले में समृद्ध हो रहा है, वहीं मानव संसाधन की संख्या कम होती जा रही है। जिला अस्पताल इन दिनों लोगों को समुचित चिकित्सकीय सुविधाएं देने में नाकाफी साबित हो रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों 400 से 500 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से 15 से 20 फीसदी मरीज आंख के इलाज के लिए आते हैं। जिला अस्पताल का नेत्र विभाग काफी बड़ा और अहम विभाग है। शासन की तरफ से यहां तीन सर्जन डॉक्टर नियुक्त किए गये थे। जिनमें से वर्तमान में एक सर्जन ही कार्यरत हैं।
नेत्र विभाग में सर्जरी के लिए अलग से ऑपरेशन थिएटर भी है, जिसमें मरीजों का मोतियाबिंद जैसे मेजर ऑपरेशन के साथ माइनर ऑपरेशन होता है। लेकिन नेत्र सर्जरी के नाम पर जिला अस्पताल में महज खाना पूर्ति ही की जा रही है। पिछले काफी दिनों से एक भी सर्जरी नहीं हो सकी है। इस विभाग में तैनात चिकित्सक को इमरजेंसी ड्यूटी के साथ दिव्यांग दिवस की ड्यूटी भी करनी पड़ रही है। जिस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जबकि विभागीय अधिकारी मानव संसाधन की कमी का रोना रो रहा है।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बृज कुमार ने बताया कि इस समय गर्मी के कारण कम मरीजों की नेत्र सर्जरी हो रही है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें इमरजेंसी से लेकर अन्य ड्यूटी में भी लगाया जाता है। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों 400 से 500 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से 15 से 20 फीसदी मरीज आंख के इलाज के लिए आते हैं। जिला अस्पताल का नेत्र विभाग काफी बड़ा और अहम विभाग है। शासन की तरफ से यहां तीन सर्जन डॉक्टर नियुक्त किए गये थे। जिनमें से वर्तमान में एक सर्जन ही कार्यरत हैं।
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नेत्र विभाग में सर्जरी के लिए अलग से ऑपरेशन थिएटर भी है, जिसमें मरीजों का मोतियाबिंद जैसे मेजर ऑपरेशन के साथ माइनर ऑपरेशन होता है। लेकिन नेत्र सर्जरी के नाम पर जिला अस्पताल में महज खाना पूर्ति ही की जा रही है। पिछले काफी दिनों से एक भी सर्जरी नहीं हो सकी है। इस विभाग में तैनात चिकित्सक को इमरजेंसी ड्यूटी के साथ दिव्यांग दिवस की ड्यूटी भी करनी पड़ रही है। जिस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जबकि विभागीय अधिकारी मानव संसाधन की कमी का रोना रो रहा है।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बृज कुमार ने बताया कि इस समय गर्मी के कारण कम मरीजों की नेत्र सर्जरी हो रही है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें इमरजेंसी से लेकर अन्य ड्यूटी में भी लगाया जाता है। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है।