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बेवजह भी नहीं था ग्रामीणों का गुस्सा
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 01 Dec 2015 11:39 PM IST
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ब्लाक घोसी के बरौली ग्राम पंचायत में मतदान के दौरान हुए बवाल और हंगामे के लिए भुगतान ग्रामीणों को ही पड़ा। लाठीचार्ज और कार्रवाई से पूरे गांव में सन्नाटा है। गांव की बच्चे और महिलाएं सहमी हुई हैं।
जिनके घर के बड़े लोगों को पुलिस पकड़कर ले गई, उनके बच्चे बिलाप करते हुए देखे जा सकते हैं। सवाल उठता है कि ग्रामीणों को उग्र होने की क्या वजह रही। जबकि वे प्राथमिक विद्यालय रामनिधि मिश्रौली के बूथ संख्या-49 पर मतदान के लिए शांतिपूर्वक लाइन में खड़े थे।
गांव के ऐसे सैकड़ों मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए थे जो अभी हाल ही में संपन्न हुए जिला पंचायत के चुनाव में मतदान में हिस्सा लिया। सभी गांव में रह भी रहे हैं, लेकिन गांव के प्रधान पद के प्रत्याशी रहे विंध्याचल यादव का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव हारा एक व्यक्ति अब प्रधानी में दांव आजमाना चाहता था। जिसका साथ जिम्मेदार अफसर दे रहे हैं।
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उसे चुनाव में लाभ पहुंचाने के लिए ही उनके समर्थकों का सूची से नाम काट दिया गया। यह बात जिलाधिकारी के संज्ञान में आई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और काटे गए नामों को जोड़ने का आदेश भी दिया।
मतदाता सूची के परिवर्धन सूची और इंटरनेट पर ये नाम फिर चढ़ भी गए, लेकिन मतदान के लिए जो सूची बूथों पर भेजी गई उनमें नाम दर्ज नहंी थे। उन्होंने रात को ही इसकी शिकायत डीएम और सीडीओ से की थी। दोनों ही अधिकारियों ने बूथ पर सही मतदाता सूची भेजने का आश्वासन भी दिया।
डीएम वैभव श्रीवास्तव ने सीडीओ को इस बाबत निर्देश भी दिए। लेकिन मतदान के दिन बूथ पर सही मतदाता सूची नहीं भेजी गई। इस गांव में मतदाता सूची में गड़बड़ी की खबर अमर उजाला ने 20 नवंबर के अंक में प्रकाशित भी की थी।
मतदान के दिन मंगलवार की सुबह बरौली ग्राम पंचायत के मिश्रौली रामनिधि पुरवे में बूथ संख्या-49 पर कई मतदाताओं को वोट डालने से मना करते हुए गांव के दूसरे बूथ पर जाने के लिए कहा गया। इससे ग्रामीण उग्र हो गए। ग्रामीणों का आरोप था कि फर्जीवाड़ा करने के लिए अधिकारियों ने उनके बूथ बदल दिए हैं। ग्रामीण इस बात पर अड़ गए कि वे इसी बूथ पर वोट देंगे।
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जिनके घर के बड़े लोगों को पुलिस पकड़कर ले गई, उनके बच्चे बिलाप करते हुए देखे जा सकते हैं। सवाल उठता है कि ग्रामीणों को उग्र होने की क्या वजह रही। जबकि वे प्राथमिक विद्यालय रामनिधि मिश्रौली के बूथ संख्या-49 पर मतदान के लिए शांतिपूर्वक लाइन में खड़े थे।
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गांव के ऐसे सैकड़ों मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए थे जो अभी हाल ही में संपन्न हुए जिला पंचायत के चुनाव में मतदान में हिस्सा लिया। सभी गांव में रह भी रहे हैं, लेकिन गांव के प्रधान पद के प्रत्याशी रहे विंध्याचल यादव का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव हारा एक व्यक्ति अब प्रधानी में दांव आजमाना चाहता था। जिसका साथ जिम्मेदार अफसर दे रहे हैं।
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उसे चुनाव में लाभ पहुंचाने के लिए ही उनके समर्थकों का सूची से नाम काट दिया गया। यह बात जिलाधिकारी के संज्ञान में आई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और काटे गए नामों को जोड़ने का आदेश भी दिया।
मतदाता सूची के परिवर्धन सूची और इंटरनेट पर ये नाम फिर चढ़ भी गए, लेकिन मतदान के लिए जो सूची बूथों पर भेजी गई उनमें नाम दर्ज नहंी थे। उन्होंने रात को ही इसकी शिकायत डीएम और सीडीओ से की थी। दोनों ही अधिकारियों ने बूथ पर सही मतदाता सूची भेजने का आश्वासन भी दिया।
डीएम वैभव श्रीवास्तव ने सीडीओ को इस बाबत निर्देश भी दिए। लेकिन मतदान के दिन बूथ पर सही मतदाता सूची नहीं भेजी गई। इस गांव में मतदाता सूची में गड़बड़ी की खबर अमर उजाला ने 20 नवंबर के अंक में प्रकाशित भी की थी।
मतदान के दिन मंगलवार की सुबह बरौली ग्राम पंचायत के मिश्रौली रामनिधि पुरवे में बूथ संख्या-49 पर कई मतदाताओं को वोट डालने से मना करते हुए गांव के दूसरे बूथ पर जाने के लिए कहा गया। इससे ग्रामीण उग्र हो गए। ग्रामीणों का आरोप था कि फर्जीवाड़ा करने के लिए अधिकारियों ने उनके बूथ बदल दिए हैं। ग्रामीण इस बात पर अड़ गए कि वे इसी बूथ पर वोट देंगे।