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Mau News: राजनीति रसूख की चाहत थी, पहले पत्नी फिर मां के सहारे की थी कोशिश

Tue, 01 Apr 2025 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Apr 2025 12:18 AM IST
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There was a desire for political influence, first the attempt was made with the help of wife and then mother
मऊ। जनपद का कुख्यात अपराधी अनुज कन्नौजिया अपराध की दुनिया में नाम पैसा कमाने और आतंक के बाद राजनीति में भी अपनी पैठ बनाने का प्रयास किया। व्यापारियों, ठेकेदारों और धन कुबेरों के लिए आतंक का पर्याय बने अनुज को जनता की अदालत में समर्थन नहीं मिला।
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बात साल 2010 की है। रानीपुर थाना क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य गुड्डा सिंह की हत्या के बाद सुर्खियों में आया अनुज का क्षेत्र में काफी दबदबा हो गया। इस बीच राजनीतिक महत्वाकांक्षा और राजनीतिक संरक्षण के लिए सफेदपोश बनने के लिए खुद तो नहीं लेकिन अपनी पत्नी के माध्यम से राजनीतिक में आने का प्रयास किया।
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इसके लिए मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के खैराबाद जिला पंचायत क्षेत्र से अपनी पत्नी रीना को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया। अपराध में नामजद होने के कारण वह खुद चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुआ। कहा जाता है कि उसकी पत्नी को यहां से चुनाव लड़ाने के पीछे उसके आका मुख्तार अंसारी का भी हाथ था। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र खैराबाद, अतरारी 2010 के जिला पंचायत सदस्य की सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित थी। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जनता ने उसे नकार दिया।
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साल 2016 में क्षेत्र पंचायत चुनाव का बिगुल बजा तो एक बार फिर से अनुज की राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने जोर पकड़ा। पद पैसा और प्रतिष्ठा के लिए रानीपुर ब्लाॅक प्रमुख पद पर कब्जा को लेकर वह सक्रिय हो गया। रानीपुर ब्लॉक प्रमुख पद के लिए अपनी मां कौशल्या देवी को ब्लाॅक प्रमुख पद पर जीत के लिए पूरा जोर लगा दिया। हालांकि दूसरी तरफ प्रतिद्वंदी के रूप में कद्दावर नेता यशवंत सिंह का परिवार मुक़ाबिल था। चुनाव के दौरान अनुज कन्नौजिया गोरखपुर जेल में बंद था। इस चुनाव में अनुज की मां को 52 वोट मिले थे जबकि सपा प्रत्याशी निती सिंह को 59 वोट मिला था, इस प्रकार कड़े मुकाबले में निति सिंह ने कौशल्या देवी को हराया था। पहले पत्नी की हार फिर मां की पराजय के बाद अनुज ने राजनीति से दूरी बना लिया।
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