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बचपन को सपनों के संसार में ले जाती है किताबों की दुनिया
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मऊ। जिला प्रशासन की पहल पर पर्यटन विभाग उप्र, संस्कृति विभाग तथा वन विभाग के सहयोग से नेशनल बुक ट्रस्ट के रचनात्मक सहयोग जिले में पुस्तक मेले का आयोजन 24 से 27 नवंबर को नगर के सोनीधापा बालिका इंटर कालेज के परिसर में आयोजित किया गया। इसमें देश भर के प्रकाशकों ने हिस्सा लिया है।
पुस्तक मेले में नेशनल बुक ट्स्ट, साहित्य अकादमी, राजकमल, राधाकृष्ण, किताब घर, नयी किताब, उत्कर्ष प्रकाशन, प्रकाशन संस्थान, लोकभारती, सारांष, संविधान मंच सहित संस्थाओं की हिस्सेदारी से तीसरे पुस्तक मेले का उद्घाटन मुख्य राजस्व अधिकारी केहरी सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी के हरि सिंह ने कहा कि किताबों की दुनिया बचपन को सपनों के संसार में ले जाती है। जब बाल मन खूली आंखों से सपने देखता है तो साहित्य उन सपनों को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि मऊ पंडित श्याम नारायण पांडेय और पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र की धरती है। वर्चुवल माध्यम से प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी संजय विश्वाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कार्बन उत्सर्जन मुक्त समाज बनाने में पर्यावरण शिक्षा के लिए यह पुस्तक मेला अभिनव प्रयास है।
उन्होंने कहा कि कई वर्षो की नियुक्ति में मऊ प्रवास में हमने इस क्षेत्र के सृृजन यात्रा को नजदीक से देखा हूं। इस लिए इस साहित्य उत्सव का आयोजन मुझे जरूरी लगता है। अध्यक्षता करते हुए डीसीएसके पी जी कालेज के प्राचार्य डॉ. शर्वेश पांडेय ने कहा कि किताबों का कोई विकल्प नहीं। इलेक्ट्रानिक युग में भी किताबों का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मऊ़ के लोगों की विरासत सृजन की विरासत है। इसलिए यह मेला नयी पीढ़ी को सृजन यात्रा से जोड़ने का अभियान है।
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सोनीधापा स्कूल की प्रधानाचार्य मंजू राय ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात कि इस वर्ष यह मेला मेरे परिसर में आयोजित हुई है। संस्कृृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि तीसरा मऊ पुस्तक मेला इस जनपद के लिए ज्ञान की धरोहर लेकर आया है। पुस्तक यात्रा में मऊ की नयी पीढ़ी को इतिहास का दर्शन कराएगी। शिक्षक ऋचा त्रिपाठी के निर्र्देशन में सोनीधापा स्कूल के बच्चों ने किताबों के महत्व पर बहुत ही रोचक नाटक प्रस्तुत किया।
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पुस्तक मेले में नेशनल बुक ट्स्ट, साहित्य अकादमी, राजकमल, राधाकृष्ण, किताब घर, नयी किताब, उत्कर्ष प्रकाशन, प्रकाशन संस्थान, लोकभारती, सारांष, संविधान मंच सहित संस्थाओं की हिस्सेदारी से तीसरे पुस्तक मेले का उद्घाटन मुख्य राजस्व अधिकारी केहरी सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी के हरि सिंह ने कहा कि किताबों की दुनिया बचपन को सपनों के संसार में ले जाती है। जब बाल मन खूली आंखों से सपने देखता है तो साहित्य उन सपनों को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि मऊ पंडित श्याम नारायण पांडेय और पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र की धरती है। वर्चुवल माध्यम से प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी संजय विश्वाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कार्बन उत्सर्जन मुक्त समाज बनाने में पर्यावरण शिक्षा के लिए यह पुस्तक मेला अभिनव प्रयास है।
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उन्होंने कहा कि कई वर्षो की नियुक्ति में मऊ प्रवास में हमने इस क्षेत्र के सृृजन यात्रा को नजदीक से देखा हूं। इस लिए इस साहित्य उत्सव का आयोजन मुझे जरूरी लगता है। अध्यक्षता करते हुए डीसीएसके पी जी कालेज के प्राचार्य डॉ. शर्वेश पांडेय ने कहा कि किताबों का कोई विकल्प नहीं। इलेक्ट्रानिक युग में भी किताबों का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मऊ़ के लोगों की विरासत सृजन की विरासत है। इसलिए यह मेला नयी पीढ़ी को सृजन यात्रा से जोड़ने का अभियान है।
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सोनीधापा स्कूल की प्रधानाचार्य मंजू राय ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात कि इस वर्ष यह मेला मेरे परिसर में आयोजित हुई है। संस्कृृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि तीसरा मऊ पुस्तक मेला इस जनपद के लिए ज्ञान की धरोहर लेकर आया है। पुस्तक यात्रा में मऊ की नयी पीढ़ी को इतिहास का दर्शन कराएगी। शिक्षक ऋचा त्रिपाठी के निर्र्देशन में सोनीधापा स्कूल के बच्चों ने किताबों के महत्व पर बहुत ही रोचक नाटक प्रस्तुत किया।