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सब्जी की खेती की ओर बढ़ रहा है किसानों का रुझान

Fri, 15 Apr 2022 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 Apr 2022 12:03 AM IST
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The trend of farmers is moving towards vegetable cultivation
जिले के किसान धान और गेहूं की परंपरागत खेती की बढ़ती लागत और घटते लाभ की वजह से इससे मुंह मोड़ रहे हैं। सब्जियों के दिनोंदिन महंगी होते जाने और इसकी खेती करने वाले किसानों को मोटा मुनाफा कमाते देख परंपरागत खेती करने वाले किसानों का रुझान भी अब सब्जी की खेती की ओर बढ़ रहा है। जिले का उद्यान विभाग इसे सुखद संकेत मान रहा है। किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती के भंडारण की व्यवस्था हो तो और अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
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सब्जी की खेती जिले के किसानों की समृद्धि का द्वार खोल रही है। सब्जी की खेती का रकबा हर साल बढ़ रहा है। पिछले साल करीब 3560 हेक्टयर में सब्जी की खेती की गई थी जो इस बार बढ़ कर चार हजार हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसे बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग बीज और उर्वरक आदि पर अनुदान देने के साथ सब्जी की खेती के लिए प्रशिक्षण भी देता है। इसका असर दिखाई देने लगा है। जिले के मधुबन का देवारा, दोहरीघाट, परदहां ब्लाक क्षेत्र के कहिनौर, पिपरी, सरयां, रानीपुर ब्लाक सहित विभिन्न क्षेत्रों के किसान बड़े पैमाने पर आलू, गोभी, करेला, नेनुआ, लौकी, कोहड़ा, मिर्च, आलू और भिंडी आदि सीजनल सब्जियां उगा कर अच्छा लाभ कमा रहे हैं। यही कारण है कि धान व गेहूं की परंपरागत खेती करने वाले किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर अब सब्जी की खेती की ओर मुड़ रहे हैं।
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चिरैयाकोट के युसूफाबाद निवासी सब्जी उत्पादक किसान अशोक मौर्य का कहना था कि बैंगन तथा बंद गोभी सहित अन्य सब्जियों से अच्छी आय हो जा रही है। प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक की सब्जी आसानी से बिक जाती है। यह जरूर है कि भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से इसे अधिक समय तक रख नहीं सकते हैं।
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कुसुम्हा के दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के सियरही गांव में कई किसान सब्जी की खेती से अच्छी आमदनी ले रहे हैं। क्षेत्र के सियरही निवासी अरविंद राय गुजरात में एक कंपनी में नौकरी करते थे। कोरोना काल में नौकरी छोड़कर घर आ गए। सब्जी की खेती करना शुरू कर दिया। अब प्रतिदिन सब्जी की खेप मंडी जा रही है। अच्छी इनकम हो रही है।

सब्जी की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की तरफ से बीज, उर्वरक अनुदान पर दिया जाता है। किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। आलू और प्याज के लिए भंडारण की सुविधा है। अन्य हरी सब्जियों के भंडारण करने पर विचार किया जा रहा है।
- सुभाष कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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