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भगवान की कृपा से मिलता है, सत्संग और संत दर्शन
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Sun, 22 Mar 2015 11:40 PM IST
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नगर के भीटी में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए कथावाचक अनूपानंद महाराज ने कहा कि जब कई जन्मों का पुण्य उदय होता है तब जाकर भगवान की कथा श्रवण करने का अवसर मिलता है। जब भगवान की कृपा होती है तब सत्संग एवं संत दर्शन प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि जब प्रभु की कथा प्रारंभ होती है तब व्यक्ति के मनुष्य का संसार से मोह समाप्त होता है। जब मोह का नाश होता है तब भगवान के चरणों में प्रेम होता है।
जब तक मनुष्य गंगा में स्वान नहीं करता तब तक पवित्र नहीं होता है। कहा कि हमारे भारतवर्ष मेें दो गंगा बहती है एक तो भागीरथी गंगा और दूसरी भागवती गंगा और दोनों ही गंगा भगवान भोलेनाथ से प्रकट हुई हैं।
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एक गंगा भगवान भोलेनाथ की जटा से तो दूसरी गंगा भगवान भोलेनाथ की जिह्वा से। जो जटा से गंगा प्रकट हुई वो भागीरथ का तप था तथा जो जिह्वा से प्रकट हुई गंगा वो पार्वती का तप था।
भागीरथी गंगा मेें स्नान करने से केवल तन पवित्र होता है। भागवत कथा रुपी गंगा में स्नान करने से तन,मन धन तीनों पवित्र हो जाता है। उधर रासलीला में वृदावन के कलाकारों
ने झांकी तथा मोर नृत्य पेश कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर इंद्रपाल सिंह, अशोक सिंह, पुन्नू सिंह, संतोष सिंह, अनिल सिंह, पवन सिंह, हरिंद्र सिंह आदि शामिल थे।
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उन्होंने कहा कि जब प्रभु की कथा प्रारंभ होती है तब व्यक्ति के मनुष्य का संसार से मोह समाप्त होता है। जब मोह का नाश होता है तब भगवान के चरणों में प्रेम होता है।
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जब तक मनुष्य गंगा में स्वान नहीं करता तब तक पवित्र नहीं होता है। कहा कि हमारे भारतवर्ष मेें दो गंगा बहती है एक तो भागीरथी गंगा और दूसरी भागवती गंगा और दोनों ही गंगा भगवान भोलेनाथ से प्रकट हुई हैं।
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एक गंगा भगवान भोलेनाथ की जटा से तो दूसरी गंगा भगवान भोलेनाथ की जिह्वा से। जो जटा से गंगा प्रकट हुई वो भागीरथ का तप था तथा जो जिह्वा से प्रकट हुई गंगा वो पार्वती का तप था।
भागीरथी गंगा मेें स्नान करने से केवल तन पवित्र होता है। भागवत कथा रुपी गंगा में स्नान करने से तन,मन धन तीनों पवित्र हो जाता है। उधर रासलीला में वृदावन के कलाकारों
ने झांकी तथा मोर नृत्य पेश कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर इंद्रपाल सिंह, अशोक सिंह, पुन्नू सिंह, संतोष सिंह, अनिल सिंह, पवन सिंह, हरिंद्र सिंह आदि शामिल थे।