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UP: पहले वाला तोड़ा, नए शिलापट्ट से विधायक का नाम गायब; रामविलास चौहान- पत्थर से राजनीति नहीं होती

Fri, 14 Nov 2025 12:35 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 14 Nov 2025 12:35 AM IST
सार

Mau News: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में शिलापट्ट पर नाम जोड़ने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। इसे तोड़कर नया लगाया गया। दोहरीघाट ब्लाॅक क्षेत्र के धनौली रामपुर गांव में इंटरलाॅकिंग कार्य के लिए शिलापट्ट लगाया गया था।

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The previous one was broken, the MLA's name was missing from the new plaque.
दोहरीघाटब्लाक क्षेत्र के धनौली  सियरही गांव  में तोड़ा गया पुराना लगा शिलापट्ट। - फोटो : संवाद

विस्तार

UP News: मऊ के दोहरीघाट ब्लाॅक के धनौली गांव में विकास कार्य के शिलापट्ट को तोड़कर नया शिलापट्ट लगाया गया है। पहले शिलापट्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भाजपा के मधुबन विधायक रामविलास चौहान और कैबिनेट मंत्री एके शर्मा का नाम था, लेकिन नए शिलापट्ट से विधायक रामविलास का नाम गायब हो गया है।

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दोहरीघाट ब्लाॅक क्षेत्र के धनौली रामपुर गांव में विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना अंतर्गत 11 लाख रुपये से से रामवृक्ष राय के घर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. चंद्रधन राय के घर की तरफ जाने वाले 200 मीटर लंबे रास्ते पर इंटरलाॅकिंग का कार्य कराया गया है। इसके लिए पहले लगाए गए शिलापट्ट में विधायक रामविलास चौहान का नाम तीसरे नंबर पर अंकित था।
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पहले वाले को तोड़कर लगे नए शिलापट्ट पर विकास कार्य के पूरे विवरण के साथ योगी आदित्यनाथ और कैबिनेट मंत्री एके शर्मा का नाम तो है लेकिन मधुबन से बीजेपी विधायक रामविलास चौहान का नाम गायब है। इसको लेकर क्षेत्र में चर्चाएं हो रही हैं कि आखिर क्यों छह महीने पहले लगे शिलापट्ट को तोड़कर विधायक का नाम हटाकर दूसरा शिलापट्ट लगा दिया गया।

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पत्थर से राजनीति नहीं होती : रामविलास चौहान
मधुबन विधायक रामविलास चौहान ने बताया कि उन्हें शिलापट्ट के बारे में जानकारी मिली है। कहा कि वह इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकते हैं लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि पत्थर से राजनीति नहीं होती है।

सोशल मीडिया पर होती रही चर्चा
शिलापट्ट को हटाकर नया शिलापट्ट लगाने का एक ऐसा ही मामला नगर पालिका मऊ में भी हुआ था। इस पर पूर्व नपाध्यक्ष तैयब पालकी और नपाध्यक्ष अरशद जमाल के बीच विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा खूब वायरल हुई थी।

शासन के नियमों के अनुसार किया गया सुधार
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम ने हाल ही में चर्चा में आए कुछ शिलापट्टों पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2022–23 में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की निधि से कराए गए तीन कार्यों में भूलवश गलत शिलापट्ट लग गए थे। इन्हें अब शासन के नियमों के अनुसार सुधार दिया गया है।

इसको लेकर कुछ लोग अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं, जबकि यह सुधार शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। नियमानुसार जिस विधायक या विधान परिषद सदस्य की निधि से कार्य कराया जाता है, उसी का नाम शिलापट्ट पर अंकित करना अनिवार्य है। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू है। कुछ स्थानों पर तकनीकी कारणों से हुई भूल अब नियमानुसार ठीक कर दी गई हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें पक्षपात या अनुचित आचरण नहीं हुआ है।

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