आजमगढ़। कर्मचारियों के उत्पीड़न, अवैध स्थानांतरण, वेतन भुगतान में अनियमितता तथा श्रम कानूनों के उल्लंघन के विरोध में बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया।यूपीएमएसआरए के अध्यक्ष प्रशांत सिंह ने आरोप लगाया कि कई नियोक्ता बिक्री संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 सहित अन्य श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अवैध रूप से नौकरी से निकाला जा रहा है, फर्जी आरोपों में फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और यूनियन गतिविधियों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञापन में 20 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं। प्रमुख मांगों में चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने, न्यूनतम वेतन 26,910 प्रतिमाह घोषित करने, ईपीएस पेंशन 9,000 प्रतिमाह सुनिश्चित करने तथा 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करने की मांग शामिल है। इसके अलावा श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी शून्य करने, आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में जीडीपी का 5 प्रतिशत बजट आवंटित करने की मांग की गई है। संघ ने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के कार्य को आपराधिक कृत्य न मानने और अस्पतालों में उनके कार्य पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लेने की भी मांग उठाई। साथ ही दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने तथा कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार रोकने के लिए वैधानिक विपणन संहिता लागू करने की बात कही गई है। सचिव नूर आलम ने सरकार से हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को न्याय दिलाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन को तेज करेगा।