{"_id":"6110181b8ebc3e794f13eb95","slug":"the-joy-of-coming-home-turned-into-mourning-mau-news-vns6050267148","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर आने की खुशी मातम में बदली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर आने की खुशी मातम में बदली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर मेें महेश अपने छोटे भाई दिनेश के परिवार के साथ संयुक्त रूप से रहता है। जेएमको कंपनी में एक अधिकारी के तौर पर तैनात महेश हर छह माह पर अवकाश मिलने पर अपने वाहन से पूरे परिवार संग गांव आते रहते हैं। शनिवार को इसी क्रम में रक्षाबंधन से पहले अवकाश मिलने पर वह अपने गांव फुलवरिया (गोरखपुर उप्र) के लिए निकला था। लेकिन रास्ते में अपनी ससुराल मधुबन थाना क्षेत्र के दुबारी मोड में अपनी पत्नी को रक्षाबंधन को देखते हुए छोड़ने जा रहा था।
उधर महेश के छत्तीसगढ़ से निकलने की सूचना पर उसके गांव फुलवरिया के रिश्तेदार तथा ससुराल पक्ष के लोग उसका और पूरे परिवार को बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही परिवार और ससुराल में मातम छा गया। कार गिरने के बाद पलट गई, इससे उसमें बैठी ममता तथा चारों मासूम बाहर निकल नहीं सके। घटना के बाद शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और घायलों को बचाने में जुट गए। पानी में गिरी कार से निकाले गए मासूमों के शव को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखे नम हो गईं।
विज्ञापन
उधर महेश के छत्तीसगढ़ से निकलने की सूचना पर उसके गांव फुलवरिया के रिश्तेदार तथा ससुराल पक्ष के लोग उसका और पूरे परिवार को बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही परिवार और ससुराल में मातम छा गया। कार गिरने के बाद पलट गई, इससे उसमें बैठी ममता तथा चारों मासूम बाहर निकल नहीं सके। घटना के बाद शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और घायलों को बचाने में जुट गए। पानी में गिरी कार से निकाले गए मासूमों के शव को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखे नम हो गईं।
विज्ञापन