{"_id":"579a4cb24f1c1bf62e21ed34","slug":"the-highways-jammed-with-lineman-s-body","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाइनमैन का शव रख कर हाईवे किया जाम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाइनमैन का शव रख कर हाईवे किया जाम
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:49 PM IST
विज्ञापन
जाम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
21 जुलाई को मादी सिपाह विद्युत उपकेंद्र पर काम करते समय बिजली विभाग में संविदा कर्मी शब्बीर की गुरुवार को वाराणसी में इलाज के दौरान मौत हो गई। शव आने की सूचना पर परिजन एवं ग्रामीण गोंठा विद्युत उपकेंद्र के समीप इकट्ठा हो गए। शव को हाइवे पर रखकर मुआवजा सहित विभिन्न मांगों को लेकर गुरूवार को लगभग 3 बजे चक्का जाम कर दिया। घंटों चला चक्काजाम गुरूवार की शाम को समाप्त हुआ। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ ग्रामीणों की लंबी कतारें लग गई।
परिरीजन का आरोप है कि जेई व एसडीओ के कहने पर शब्बीर उपकेंद्र में काम करने गया था। जहां पर शार्ट शर्किट होने से वह गंभीर रूप से झुलस गया। शब्बीर के झुलसने के बाद न तो जेई और न ही एसडीओ ने हाल चाल लिया। आर्थिक तंगी के कारण इलाज करवाने में असमर्थ शब्बीर के परिजनों को ग्रामीणों ने एक लाख रूपया चन्दा इक्ठ्ठा कराकर दवा इलाज करवाया था। लेकिन प्रशासन के तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई थी।
पैसे के अभाव में आखिरकार शब्बीर ने दम तोड़ दिया। मृतक शब्बीर पुत्र लालमनी अतरसावां का रहने वाथा और अपने दो भाईयों में से सबसे बड़ा था। मृतक के 3 लड़के व 2 लड़किया है। बड़ा बेटा रजा 12 वर्ष बड़ा बेटा हसन बेटा 10 वर्ष आमीर 8 वर्ष, लड़की सबुस्ता 4 वर्ष व 6 माह की बच्ची अपने मां कौशरी से लपट कर रो रही थी।
विज्ञापन
ग्रामीण और परिजन दोषी अधिकारियों के विरूध कार्रवाई करने एवं मुआवजा सहित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे थे। जाम लगभग साढ़े छह बजे मधुबन एसडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी के मौके पर पहुंचने पर समाप्त हुआ। पीड़ित परिवार को मुआवजा सहित परिवार के एक सदस्य को विभाग में संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया।
विज्ञापन
परिरीजन का आरोप है कि जेई व एसडीओ के कहने पर शब्बीर उपकेंद्र में काम करने गया था। जहां पर शार्ट शर्किट होने से वह गंभीर रूप से झुलस गया। शब्बीर के झुलसने के बाद न तो जेई और न ही एसडीओ ने हाल चाल लिया। आर्थिक तंगी के कारण इलाज करवाने में असमर्थ शब्बीर के परिजनों को ग्रामीणों ने एक लाख रूपया चन्दा इक्ठ्ठा कराकर दवा इलाज करवाया था। लेकिन प्रशासन के तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई थी।
विज्ञापन
पैसे के अभाव में आखिरकार शब्बीर ने दम तोड़ दिया। मृतक शब्बीर पुत्र लालमनी अतरसावां का रहने वाथा और अपने दो भाईयों में से सबसे बड़ा था। मृतक के 3 लड़के व 2 लड़किया है। बड़ा बेटा रजा 12 वर्ष बड़ा बेटा हसन बेटा 10 वर्ष आमीर 8 वर्ष, लड़की सबुस्ता 4 वर्ष व 6 माह की बच्ची अपने मां कौशरी से लपट कर रो रही थी।
विज्ञापन
ग्रामीण और परिजन दोषी अधिकारियों के विरूध कार्रवाई करने एवं मुआवजा सहित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे थे। जाम लगभग साढ़े छह बजे मधुबन एसडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी के मौके पर पहुंचने पर समाप्त हुआ। पीड़ित परिवार को मुआवजा सहित परिवार के एक सदस्य को विभाग में संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया।