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शिक्षण सत्र करीब, पाठ्य पुस्तकों की नहीं ली सुधि
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मऊ। नया शिक्षण सत्र शुरू होने में महज 14 दिन शेष है, लेकिन अभी तक परिषदीय विद्यालय के छात्रों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने के लिए कोई व्यवस्था प्रशासन की तरफ से नहीं की गई। इसका परिणाम है कि ऐसे में 1502 परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
जिले में 1060 प्राथमिक और 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में 14 दिन शेष है, लेकिन अभी तक निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरण करने के मामले में निदेशालय से दिशा निर्देश नहीं आया है। अमूमन जनवरी-फरवरी में पाठ्यपुस्तक वितरण की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है।
सूत्रों की मानें तो बेसिक शिक्षा विभाग ने पाठ्य पुस्तकों के लिए 17 मार्च तक टेंडर आमंत्रित किए हैं। टेंडर मिलने के बाद प्रकाशकों को पाठ्य पुस्तकों और कार्य पुस्तिकाओं की सप्लाई क्रमश 90 और 120 दिन के अंदर जिले को करनी है। ऐसे में बच्चों को नई पाठ्य पुस्तकों के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। वैसे विभाग की तरफ से 1.56 लाख बच्चों के लिए लगभग 10 लाख निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के लिए निदेशालय को डिमांड भेजी गई है। कोरोना काल के चलते नया शिक्षा सत्र को लेकर शिक्षकों, बच्चों तथा अभिभावकों में उहापोह की स्थिति है।
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कमजोर बच्चों की चल रही रेमिडियल टीचिंग
लाकडाउन तथा कोरोना संक्रमण के चलते परिषदीय विद्यालय लगभग 11 माह तक बंद रहे। ऐसे में पठन पाठन का समय कम मिलने से कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। शासन के फरमान पर कमजोर बच्चों को चिंहित कर 100 दिन की रेमिडियल टीचिंग चल रही है। रेमिडियल टीचिंग पूरी होने पर बच्चों का स्टूडेंट असेसमेंट टेस्ट के जरिए अंतिम आंकलन कर कक्षाओं में प्रमोट किया जाएगा।
बच्चों को दक्ष बनाने के लिए रेमिडियल टीचिंग चल रही है। शासन के दिशा निर्देश के अनुरूप निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- अशोक गौतम, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
पिछला सत्र कोरोना संक्रमण काल में बीता, इस बार किताब नहीं
मऊ। बीते वर्ष कोरोना संक्रमण का खतरा होने से लॉक ाउन लगने से छात्रों का सत्र बर्बाद हुआ था। अब इस बार पुस्तक की समस्या छात्रों के सामने आने लगी है। इस तरह से बच्चों के अभिभावकों को चिंता सताने लगी है कि कही इस बार भी बच्चों की पढ़ाई विभाग की लापरवाही के भेंट न चढ जाए। अभिभावक मोती गुप्ता ने बताया कि बीते वर्ष तो उनका बेटा लॉक डाउन के चलते घर पर ही रहा। कोई पढ़ाई नहीं हुई, इस बार भी किताब आदि नहीं दिया गया।
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जिले में 1060 प्राथमिक और 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में 14 दिन शेष है, लेकिन अभी तक निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरण करने के मामले में निदेशालय से दिशा निर्देश नहीं आया है। अमूमन जनवरी-फरवरी में पाठ्यपुस्तक वितरण की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है।
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सूत्रों की मानें तो बेसिक शिक्षा विभाग ने पाठ्य पुस्तकों के लिए 17 मार्च तक टेंडर आमंत्रित किए हैं। टेंडर मिलने के बाद प्रकाशकों को पाठ्य पुस्तकों और कार्य पुस्तिकाओं की सप्लाई क्रमश 90 और 120 दिन के अंदर जिले को करनी है। ऐसे में बच्चों को नई पाठ्य पुस्तकों के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। वैसे विभाग की तरफ से 1.56 लाख बच्चों के लिए लगभग 10 लाख निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के लिए निदेशालय को डिमांड भेजी गई है। कोरोना काल के चलते नया शिक्षा सत्र को लेकर शिक्षकों, बच्चों तथा अभिभावकों में उहापोह की स्थिति है।
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कमजोर बच्चों की चल रही रेमिडियल टीचिंग
लाकडाउन तथा कोरोना संक्रमण के चलते परिषदीय विद्यालय लगभग 11 माह तक बंद रहे। ऐसे में पठन पाठन का समय कम मिलने से कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। शासन के फरमान पर कमजोर बच्चों को चिंहित कर 100 दिन की रेमिडियल टीचिंग चल रही है। रेमिडियल टीचिंग पूरी होने पर बच्चों का स्टूडेंट असेसमेंट टेस्ट के जरिए अंतिम आंकलन कर कक्षाओं में प्रमोट किया जाएगा।
बच्चों को दक्ष बनाने के लिए रेमिडियल टीचिंग चल रही है। शासन के दिशा निर्देश के अनुरूप निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- अशोक गौतम, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
पिछला सत्र कोरोना संक्रमण काल में बीता, इस बार किताब नहीं
मऊ। बीते वर्ष कोरोना संक्रमण का खतरा होने से लॉक ाउन लगने से छात्रों का सत्र बर्बाद हुआ था। अब इस बार पुस्तक की समस्या छात्रों के सामने आने लगी है। इस तरह से बच्चों के अभिभावकों को चिंता सताने लगी है कि कही इस बार भी बच्चों की पढ़ाई विभाग की लापरवाही के भेंट न चढ जाए। अभिभावक मोती गुप्ता ने बताया कि बीते वर्ष तो उनका बेटा लॉक डाउन के चलते घर पर ही रहा। कोई पढ़ाई नहीं हुई, इस बार भी किताब आदि नहीं दिया गया।