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हल्दीघाटी के रचयिता के गांव में पगडंडियों का सहारा

Thu, 05 Aug 2021 10:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 10:18 PM IST
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Support of trails in the village of the creator of Haldighati
मऊ/बढ़ुआ गोदाम। रण बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था, राणा प्रताप के घोड़े से, पड़ गया हवा का पाला था... जैसी रचनाओं से वीरों की गाथा उकेरने वाले प्रसिद्ध कवि पं. श्याम नारायण पांडेय का गांव डुमरांव आजादी के सात दशक बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद सांसद हरिनारायण राजभर ने इसे गोद लिया तो ग्रामीणों में गांव के विकास की आस जगी, मगर मौजूदा समय में ग्रामीण यह कहने में भी गुरेज नहीं करते कि सांसद ने गांव को गोद न लिया होता तो अच्छा होता। कम से कम प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ तो मिल जाता। मौजूदा आलम यह है कि गांव में आज भी लोगों के आवागमन के लिए समुचित सड़कें नहीं बन पाईं, पगडंडियां ही सहारा बनी हैं।
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डुमरांव हल्दीघाटी काव्य ग्रंथ के रचयिता वीर रसावतार पं. श्याम नारायण पांडेय का गांव है। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद ने यदि इस गांव को गोद नहीं लिया होता तो प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ गांव के लोगों को जरूर मिला होता। लेकिन, सांसद के गोद लेने के बाद इस गांव के विकास की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज भी गांव की राजभर बस्ती में पहुंचने के लिए लोगों को पगडंडी का ही सहारा लेना पड़ता है। पं. श्याम नारायण पांडेय ने अपनी पहुंच और लोकप्रियता के कारण गांव में आने-जाने के लिए संपर्क मार्ग, प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, पशु चिकित्सा केंद्र, गांव में बिजली, सिचाई के लिए टयूबवेल सहित अन्य विकास के काम को करवाया था। लेकिन, मौजूदा हालात यह हैं कि गांव में मूलभूत सविधाएं भी मयस्सर नहीं हैं।
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सांसद ने इस गांव को लिया था गोद
वर्ष 2015-16 में वर्तमान सांसद हरिनारायण राजभर ने डुमरांव गांव को गोद लिया तो 33 बिंदुओं पर गांव में विकास कार्य कराने की बात थी, लेकिन इनमें से अधिसंख्य बिंदुओं पर कोई काम नहीं हुआ। पं. श्याम नारायण पांडेय के दरवाजे से होते हुए मुख्य मार्ग तक 6.90 लाख की लागत से 150 मीटर सीसी रोड का निर्माण कराया गया। छह पुरवों में बंटे गांव की आबादी लगभग पांच हजार है। गांव में प्रवेश करते ही मुख्य खड़ंजे पर नाबदान का पानी बहता दिख जाता है। इस खड़ंजे को कई वर्ष पहले ग्राम प्रधान ने लगवाया था। पानी की निकासी की बदहाली से तंग कई परिवारों ने चंदा एकत्र कर एक चौड़ी नाली का निर्माण कराया। डुमरांव में कई पुरवों में पक्के रास्ते नहीं हैं।
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