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आपातकाल में रोडवेज चालकों के हाथ में एंबुलेंस की स्टेयरिंग
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मऊ। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावना के बीच एक नई मुसीबत ने आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। यह समस्या है जिले में संचालित निशुल्क एंबुलेंस व्यवस्था की। दरअसल समायोजन सहित पांच मांगों को लेकर 108, 102 एंबुलेंस के चालक कार्य बहिष्कार पर चल रहे है। जिला प्रशासन ने बीते 27 जुलाई की रात सभी एंबुलेंस को अपने कब्जे में भले ही ले लिया हो, लेकिन इसका शत प्रतिशत संचालन अब भी टेढी खीर साबित हो रही है।
हालात है कि एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी ने आनन फानन में 25 चालकों को भेजने की बात तो कह रही है, लेकिन यह संख्या नाकाफी है। सेवा प्रदाता कंपनी व स्वास्थ विभाग द्वारा आनन-फानन में पांच रोडवेज चालक व छह स्वास्थ्य विभाग के चालक समेत कुल 25 लोगों को एंबुलेंस संचालन में लगाया गया। वर्तमान में केवल 30 फीसदी ही एंबुलेंस का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा फायदा निजी एंबुलेंस द्वारा उठाया जा रहा है।
सेवा प्रदाता कंपनी के प्रोग्राम मैनेजर विजित श्रीवास्तव समेत दूसरे अधिकारी इसको लेकर बीते दो दिनों से एआरटीओ कार्यालय, सीएमओ कार्यालय, परिवहन निगम पहुंच रहे है। जिससे उन्हें जिले में संचालित़ 108 तथा 102 एंबुलेंस की 53 एंबुलेंस का नियमित संचालन मामला शांत होने तक हो सके। वर्तमान में 27 जुलाई की रात से प्रशासन द्वारा एंबुलेंस को भले ही अपने देखरेख में हड़ताली पायलटों से वापस लेकर संचालन शुरू कराने का प्रयास किया हो, लेकिन यह प्रयास विफल साबित होता दिख रहा है।
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सीएचसी पर चालक के इंतजार में खड़ी एंबुलेंस
मऊ। जिले में संचालित कुल 53 एंबुलेंस में 25 का ही संचालन सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा शुरू कराया जा सका है। जिला मुख्यालय से छह एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। दोहरीघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो एंबुलेंस तैनात हैं। इनमें से अभी तक किसी भी एंबुलेंस का संचालन प्रारंभ नहीं कराया जा सका है। रतनपुरा सीएचसी पर 108 व 102 के दो-दो एंबुलेंस हैं, लेकिन कार्य बहिष्कार के बाद से पायलट के अभाव में संचालन नहीं शुरू हुआ। रानीपुर सीएचसी पर छह एंबुलेंस चालक के अभाव में खड़ी हैं। चिकित्सा प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि इन एंबुलेंस पर किसी चालक के आने की कोई सूचना नहीं है। सीएचसी फतेहपुर मंडाव में तीन एंबुलेंस खड़ी हैं, जबकि सिर्फ एक का संचालन हो रहा है। घोसी सीएचसी के प्रभारी डा. एसएन आर्या ने बताया कि केंद्र पर पांच एंबुलेंस खड़ी हैं, अभी तक चालक के आने की कोई सूचना नहीं है।
पायलटों की भर्ती में जुटी कंपनी
मऊ। सेवा प्रदाता कंपनी के मैनेजर विजित श्रीवास्तव ने बताया कि संपूर्ण एंबुलेंस सेवा बहाली के लिए पायलटों की भर्ती की जा रही है। कुछ पुराने पायलट जो पूर्व में एंबुलेंस चला चुके हैं उनकी भी भर्ती की गई है। शुक्रवार को 25 एंबुलेंस का संचालन संचालित हो रही हैं, इनमें 108 एंबुलेंस 21 और चार 102 और तीन एएलएस एंबुलेंस शामिल हैं। पुराने कर्मचारियों द्वारा सीयूजी मोबाइल अभी तक नहीं लौटाया गया है इस कारण भी दिक्कत आ रही है। फोन आने पर किसी तरह से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. श्याम नारायण दूबे का कहना है कि सेवा प्रदाता कंपनी एंबुलेंस संचालन के लिए पायलटों की व्यवस्था कर रही है। इसके लिए सेवा प्रदाता कंपनी को स्वास्थ्य विभाग के छह और रोडवेज के पांच चालकों को लगाया गया है। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा पायलटों की भर्ती की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी उनकी पूरी मदद की जा रही है। जल्द से जल्द एंबुलेंस सेवा सुचारू रूप से बहाल हो जाएगी।
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हालात है कि एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी ने आनन फानन में 25 चालकों को भेजने की बात तो कह रही है, लेकिन यह संख्या नाकाफी है। सेवा प्रदाता कंपनी व स्वास्थ विभाग द्वारा आनन-फानन में पांच रोडवेज चालक व छह स्वास्थ्य विभाग के चालक समेत कुल 25 लोगों को एंबुलेंस संचालन में लगाया गया। वर्तमान में केवल 30 फीसदी ही एंबुलेंस का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा फायदा निजी एंबुलेंस द्वारा उठाया जा रहा है।
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सेवा प्रदाता कंपनी के प्रोग्राम मैनेजर विजित श्रीवास्तव समेत दूसरे अधिकारी इसको लेकर बीते दो दिनों से एआरटीओ कार्यालय, सीएमओ कार्यालय, परिवहन निगम पहुंच रहे है। जिससे उन्हें जिले में संचालित़ 108 तथा 102 एंबुलेंस की 53 एंबुलेंस का नियमित संचालन मामला शांत होने तक हो सके। वर्तमान में 27 जुलाई की रात से प्रशासन द्वारा एंबुलेंस को भले ही अपने देखरेख में हड़ताली पायलटों से वापस लेकर संचालन शुरू कराने का प्रयास किया हो, लेकिन यह प्रयास विफल साबित होता दिख रहा है।
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सीएचसी पर चालक के इंतजार में खड़ी एंबुलेंस
मऊ। जिले में संचालित कुल 53 एंबुलेंस में 25 का ही संचालन सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा शुरू कराया जा सका है। जिला मुख्यालय से छह एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। दोहरीघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो एंबुलेंस तैनात हैं। इनमें से अभी तक किसी भी एंबुलेंस का संचालन प्रारंभ नहीं कराया जा सका है। रतनपुरा सीएचसी पर 108 व 102 के दो-दो एंबुलेंस हैं, लेकिन कार्य बहिष्कार के बाद से पायलट के अभाव में संचालन नहीं शुरू हुआ। रानीपुर सीएचसी पर छह एंबुलेंस चालक के अभाव में खड़ी हैं। चिकित्सा प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि इन एंबुलेंस पर किसी चालक के आने की कोई सूचना नहीं है। सीएचसी फतेहपुर मंडाव में तीन एंबुलेंस खड़ी हैं, जबकि सिर्फ एक का संचालन हो रहा है। घोसी सीएचसी के प्रभारी डा. एसएन आर्या ने बताया कि केंद्र पर पांच एंबुलेंस खड़ी हैं, अभी तक चालक के आने की कोई सूचना नहीं है।
पायलटों की भर्ती में जुटी कंपनी
मऊ। सेवा प्रदाता कंपनी के मैनेजर विजित श्रीवास्तव ने बताया कि संपूर्ण एंबुलेंस सेवा बहाली के लिए पायलटों की भर्ती की जा रही है। कुछ पुराने पायलट जो पूर्व में एंबुलेंस चला चुके हैं उनकी भी भर्ती की गई है। शुक्रवार को 25 एंबुलेंस का संचालन संचालित हो रही हैं, इनमें 108 एंबुलेंस 21 और चार 102 और तीन एएलएस एंबुलेंस शामिल हैं। पुराने कर्मचारियों द्वारा सीयूजी मोबाइल अभी तक नहीं लौटाया गया है इस कारण भी दिक्कत आ रही है। फोन आने पर किसी तरह से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. श्याम नारायण दूबे का कहना है कि सेवा प्रदाता कंपनी एंबुलेंस संचालन के लिए पायलटों की व्यवस्था कर रही है। इसके लिए सेवा प्रदाता कंपनी को स्वास्थ्य विभाग के छह और रोडवेज के पांच चालकों को लगाया गया है। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा पायलटों की भर्ती की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी उनकी पूरी मदद की जा रही है। जल्द से जल्द एंबुलेंस सेवा सुचारू रूप से बहाल हो जाएगी।